नयी दिल्ली, 09 अगस्त, रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज कहा कि रेलवे की प्राथमिकताएं बदली है और अब रेल बजट को अाम बजट में शामिल कर दिया जाना चाहिए। श्री प्रभु ने रेलवे की लाभांश को लेकर पेश सरकारी संकल्प पर राज्यसभा में आज हुई चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि रेल बजट को आम बजट में शामिल करने को लेकर उन्होंने वित्त मंत्री को पत्र भी लिखा है। उन्होंने रेल बजट को आम बजट में समाहित करने को राष्ट्र हित में बताते हुए कहा कि इसमें सिर्फ रेलवे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व के अधिकांश देशों में रेलवे को राज सहायता मिलती है और भारतीय रेल को भी इसकी जरूरत है। उन्होंने कहा कि उपनिवेश काल के दौरान रेलवे को पांच अरब डॉलर की सहायता मिलती थी और अब वह 34 हजार करोड़ रूपये की राज सहायता मांग रहे है। उन्होंने कहा कि रेलवे से चार-पांच वर्षो तक सरकार को लाभांश नहीं लेना चाहिये। रेल मंत्री ने वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण रेलवे पर 36 हजार करोड रूपये का भार है । इसके अलावा रेलवे यात्रियों को कई तरह की रियायते भी देता है। उन्होंने कहा कि नई रेल लाइन आधुनिक प्रौद्योगिकी और हाईस्पीड ट्रेन के लिये उसे आर्थिक मदद की जरूरत है। इससे पूर्व कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि 1928 से देश में अलग रेल बजट पेश किया जा रहा था जिसकी सार्थकता अब समाप्त हो गयी है और इसे आम बजट का हिस्सा बनाने की जरूरत है। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन कहा कि रेलवे का सामाजिक दायित्व बढा और उसे लाभांश नहीं देना चाहिए। चर्चा में समाजवादी पार्टी नीरज शेखर और अन्नाद्रमुक के के.आर. अर्जुनन ने भी हिस्सा लिया। बाद में संक्लप को पारित कर दिया ।
बुधवार, 10 अगस्त 2016
रेल बजट को आम बजट में मिला दिया जाय : प्रभु
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