उत्तर प्रदेश में नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ आ जाने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। लेकिन प्रशासन महज खानापूर्ती में लगा हुआ है। बाढ़ से बचाव के प्रति उत्तर प्रदेश शासन पूरी तरह से बेपरवाह है। तटबंधों पर बने बड़े-बड़े रैनकट और रैनहोल भारी बरसात में जनधन की भारी तबाही को आमंत्रित कर रहे हैं। संबंधित विभाग इससे बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम करें। अगर विभागीय अधिकारियों की वजह से जनधन की हानि हुई तो संबंधित अधिकारियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उक्त बातें गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने राप्ती नदी से सटे हुए कई तटबंधों का निरीक्षण करने के उपरांत कहीं।
जिलाधिकारी से की वार्ता
गोरक्षपीठाधीश्वर के महंत और गोरखपुर सांसद योगी ने इस संबंध में जिलाधिकारी से भी वार्ता करके जिला प्रशासन के स्तर पर बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की मांग की। और उनसे स्पष्ट कहा कि तुर्कवालिया तथा उत्तरासोत के पास हो रहे कटान पर बचाव कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू किए जाएं।
घाघरा नदी में बाढ़, लोग पलायन को मजबूर
बाराबंकी जनपद के अंतर्गत आने वाले रामनगर विधानसभा के कुछ गांव जैसे कि ढेकवा, घुटरू, सिरौली गुंग, टेपरा, तेलवारी आदि कई गांव जो कि घाघरा नदी के बढ़े हुए जलस्तर की वजह से डूब गए हैं। रहने का ठिकाना पानी ने छीन लिया और खाने का कोई आसरा नहीं है। पीड़ित लोग अपनी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
नहीं मिली पर्याप्त मदद
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रशासन की ओर से महज कुछ लोगों के लिए तिरपाल की व्यवस्था कराई गई है। जबकि सैकड़ों की तादाद में लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

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