अमेठी 25 जनवरी, करीब 27 साल से अपने हक की लडाई लड रही गरिमा सिंह को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अमेठी विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। श्रीमती गरिमा सिंह कांग्रेस नेता संजय सिंह की पहली पत्नी हैं। संजय सिंह ने अमिता मोदी से शादी करने के बाद गरिमा को छोड दिया था, हालांकि बाद में सीतापुर की एक अदालत से तलाक दिये जाने की खबरें आयीं थीं। अमेठी रियासत के भूपति भवन से उन्हें अपमानित कर निकाल दिया गया था। तब से वह लखनऊ में रह रहीं थीं लेकिन दो वर्ष पहले गरिमा के बेटे ने अपनी मां के संघर्ष में शामिल होकर लम्बी लडाई लडी। तब कहीं जाकर वह भूपति भवन में घुस पायीं थीं। अमेठी के राजकुमार रहे कांग्रेस के चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष डा. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा को अमेठी में भाजपा से टिकट मिल जाने पर उनकी पारिवारिक लडाई में जीत की सम्भावना और बढ गयी हैं। सूबे के राज्यपाल रहे रोमेश भंडारी के कार्यकाल में पूर्व सांसद और जनता दल के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह की अगुवाई में सैकड़ों की संख्या में गाडियों का कारवां भूपति भवन में गरिमा सिंह को स्थापित कराने गया था, पर भूपति भवन का दरवाज़ा नहीं खुला और सारे लोग वापस लौट गए।
वर्ष 1989 के बाद गरिमा सिंह संजय सिंह से दूर हो गई। तमाम कानूनी प्रकिया चली। सीतापुर की एक अदालत से तलाक होने की बात भी सामने आई, पर पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के भाई की बेटी गरिमा कभी चौखट के बाहर मर्यादा तोड़कर नहीं निकली। गरिमा अब भी अमेठी में रानी के तौर पर जानी जाती हैं। यूं तो भूपति भवन आज़ादी के पहले से तमाम तरह के रहस्य समेटे हुए है, पर गरिमा सिंह अपवाद ही रहीं। पूरा देश भूपति भवन में उनके घुसने का तमाशा देखता रहा। जनता हिंसक हो गई थी और एक सिपाही की मृत्यु भी हो गई थी। तब कहीं जाकर गरिमा सिंह उनके बेटे बहू व बेटियों को भूपति भवन में जगह मिल सकी।
भाजपा ने संजय सिंह को कैप्टन सतीश शर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ाया था और संजय सिंह को जीत भी मिली थी। फिर भाजपा ने सोनिया गांधी के खिलाफ भी संजय सिंह को लड़ाया। वर्ष 2004 में संजय सिंह पार्टी छोड़ कांग्रेस में चले गए और 2014 में एक बार फिर भाजपा में वापस आने की कोशिश कर रहे थे। जिसको लेकर संघ परिवार बेहद नाराज़ था। ऐसे में जिस गरिमा सिंह को उनके ही परिवार ने 1989 के बाद मान्यता नहीं दी उन्हीं गरिमा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाकर कम से कम अमेठी में बड़ा संदेश दिया है। इस बीच,2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अकेले स्मृति ईरानी से मुकाबला करने में दोनों भाई बहनों के पसीने छूट गए थे। ऐसे में अब गरिमा के भी मुकाबले में आ जाने के बाद कांग्रेस के ये दिग्गज सकते में हैं।

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