बिहार में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति से कोई निवेश को नहीं तैयार : सुशील मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 30 जनवरी 2017

बिहार में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति से कोई निवेश को नहीं तैयार : सुशील मोदी

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पटना 30 जनवरी, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधानमंडल दल के नेता सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि राज्य की बिगड़ी कानून-व्यवस्था और नई औद्योगिक नीति में अधिकांश अनुदान एवं प्रोत्साहन वापस ले लिए जाने के कारण सरकार के दावों के विपरीत मात्र 900 करोड़ रूपये के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं । श्री मोदी ने यहां कहा कि राज्य की बिगड़ी कानून-व्यवस्था और नई औद्योगिक नीति में कैपिटल सब्सिडी, 300 प्रतिशत वैट प्रतिपूर्ति समेत अधिकांश अनुदानों को समाप्त किये जाने का ही नतीजा है कि राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआईपीबी) की पहली बैठक में मात्र 900 करोड़ के छोटे-मोटे उद्योगों के लिए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है लेकिन राज्य सरकार 6500 करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त होने का दावा करते हुए इसे प्रचारित कर रही है। भाजपा नेता ने कहा कि इसके अतिरिक्त करीब 850 करोड़ के दो निवेश प्रस्ताव जिनमें फुलवरिया में 651 करोड़ के निजी औद्योगिक पार्क और बोधगया में 200 करोड़ के थीम पार्क के जमीन पर उतरने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरानी औद्योगिक नीति के अन्तर्गत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क के लिए आए करीब छह प्रस्ताव तो कार्यान्वित ही नहीं हो सके, जबकि नई औद्योगिक नीति में पुरानी की तुलना में और अधिक अव्यवहारिक प्रावधान कर दिए गए है जिसके कारण निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क लगने का तो सवाल ही पैदा नहीं हो रहा है। श्री मोदी ने कहा कि निवेश के लिए मिले प्रस्तावों में औरंगाबाद में पहले से कार्यरत सीमेंट फैक्ट्री के 334 करोड़ रूपये और मझौलिया चीनी मिल के 90 करोड़ रूपये के प्रस्ताव क्षमता विस्तार से संबंधित हैं। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वह बताये कि जिस 6,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने को लेकर जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है वह कहां-कहां और किन-किन क्षेत्रों के लिए है । भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री के सात निश्चय में जहां उद्योग को कोई स्थान नहीं दिया गया है, वहीं नई औद्योगिक नीति में अधिकांश अनुदान और प्रोत्साहन वापस ले लिए गए हैं, दूसरी ओर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी लचर बनी हुई है, ऐसे में बिहार में कोई निवेश करना नहीं चाहेगा । 




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