पटना 04 फरवरी, बिहार विधायिका के गौरवमयी इतिहास को याद करने के लिए 07 फरवरी को आयोजित होने वाले बिहार विधानसभा स्थापना दिवस समारोह में सामाजिक एवं मानवीय सरोकारों को जीवंत बनाये रखने के उद्देश्य से राज्य के पूर्व एवं वर्तमान विधायक सामूहिक रक्तदान करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने आज यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विधानसभा के स्थापना दिवस को स्मरणीय बनाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष राज्य के 100 से अधिक विधायकों ने सामूहिक रक्तदान कर रिकॉर्ड बनाया था। विधायिका के इस सामाजिक एवं मानवीय सरोकारों को मजबूत बनाने के लिए इस वर्ष 07 फरवरी को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के वर्तमान एवं पूर्व विधायकों द्वारा सामूहिक रक्तदान किया जाएगा। उन्होंने रक्तदान के लिए पिछली बार की तुलना में इस वर्ष और अधिक विधायकों के शामिल होने की उम्मीद जताई।
श्री चौधरी ने कहा कि पिछले वर्ष दान किये गये रक्त को राजधानी पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) भेजा गया था। उन्होंने कहा, “रक्त के लिए कई बड़े संस्थानों ने संपर्क किया था लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं पीएमसीएच में राज्य के ग्रामीण इलाकों से बीमार गरीब इलाज कराने आते हैं। ऐसे में इस संस्थान को रक्त भेजकर बीमार गरीबों को मदद देने का प्रयास किया गया था।” विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के रक्तदान को ऐतिहासिक बताया और कहा कि बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है जहां के विधायकों ने सामूहिक रक्तदान किया है। उन्हें उम्मीद है कि उनकी पहल पर शुरू किये गये इस महाअभियान का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों के रक्तदान करने से लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। अधिक से अधिक लोग इस महादान में हिस्सा लेंगे और इससे खून के अभाव में मरने वाले लोगों की संख्या में कमी आ सकेगी। श्री चौधरी ने राज्य के वर्तमान एवं पूर्व विधायकों से रक्तदान करने की अपील करते हुये कहा कि रक्तदान जन प्रतिनिधियों के लिए जनसेवा करने का विशेष अवसर की तरह है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी पूर्व विधायकों को बिहार विधानसभा के नये भवन में आयोजित होने वाले स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने बिहार विधायिका के इतिहास में 07 फरवरी के महत्व का उल्लेख करते हुये बताया कि ब्रिटिश भारत के पहले भारतीय गवर्नर लॉर्ड सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा ने 07 फरवरी 1921 में बिहार विधानमंडल के मौजूदा भवन का उद्घाटन किया था और इसी दिन सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में इस भवन में नवगठित विधायी निकाय की पहली बैठक हुई थी। इसलिए, ऐतिहासिक दृष्टिकोण से 07 फरवरी का दिन बिहार विधानमंडल के भवन एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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