साहित्योत्सव में मातृभाषा और आदिवासियों की भाषा पर होगा सम्मेलन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

साहित्योत्सव में मातृभाषा और आदिवासियों की भाषा पर होगा सम्मेलन

 नयी दिल्ली 17 फरवरी, भूमंडलीकरण और बाजार के दौर में साहित्य अकादमी अपनी मातृभाषाओं को बचाने के लिए मंगलवार से साहित्योत्सव में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इक्कीस से 26 फरवरी तक चलने वाले साहित्योत्सव में देश के 200 से अधिक लेखक भाग लेंगे और वे अादिवासियों की भाषाअों-मातृभाषाओं तथा अलिखित भाषाओं को बचाने पर जोर देंगे। साहित्योत्सव के पहले दिन दो दिवसीय राष्ट्रीय मातृभाषा संरक्षण संगोष्ठी का उद्घाटन साहित्य अकादमी के मानद फेलो एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ के प्रख्यात लेखक एस एल भारप्पा करेंगे।  अकादमी के सचिव श्रीनिवास राव ने पत्रकारों को बताया कि संगोष्ठी का शुभारंभ अकादमी के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध आलोचक डॉ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी करेंगे। इसके अलावा इस संगोष्ठी में पूर्व संस्कृति सचिव एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त उड़िया के मशहूर कवि डॉ सीता कान्त महापात्र, अकादमी के उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर कम्बार, जाने-माने भाषाविद उदय नारायण सिंह,जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अवकाश प्राप्त अंग्रेजी के प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध लेखक अनीसुर्रहमान के अलावा साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव डॉ इन्द्रनाथ चौधरी और चर्चित पत्रकार राहुल देव आदि भाग लेंगे। 



इक्कीस तारीख को प्रादेशिक भाषाओं के चार लेखक भाषा सम्मान से विभूषित किये जायेंगे, जिनके नाम हरिहर वैष्णव निर्मल विज लोजंग जम्सल ठुप्स्तान पल्दल हैं। ये क्रमशः हल्बी कुरुख तथा लद्दाखी भाषा के सरंक्षण के लिए सम्मानित किये जायेंगे। अकादमी के अध्यक्ष डॉ तिवारी इन्हें ये पुरस्कार देंगे। बाइस तारीख को 24 भाषाओं के लेखकों को वर्ष 2016 के अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। यह पुरस्कार डॉ तिवारी प्रदान करेंगे। इस मौके पर पद्मविभूषण से सम्मानित मशहूर वैज्ञानिक एवं प्रसिद्ध मराठी लेखक जयंत विष्णु नार्लीकर मुख्य अतिथि होंगे। प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा इस बार 23 फरवरी को ऐतिहासिक जीवनी का शिल्प विषय पर संवत्सर व्याख्यान देंगे। चौबीस फरवरी से दो दिवसीय लोक साहित्य कथा एवं पुनर्कथन एवं पूर्व एवं उत्तरी लेखकों का सम्मलेन भी होगा जिसमें 22 भाषाओं के लेखक भी भाग लेंगे। इसके अलावा 25 फरवरी को आदिवासी लेखक सम्मलेन होगा जिसमें 15 आदिवासी भाषाओं के लेखक भाग लेंगे जबकि 26 फरवरी को भारत की अलिखित भाषाओं पर भी एक सम्मलेन का आयोजन होगा। इसके अलावा युवा लेखकों और अनुवादकों का भी एक सम्मेल्लन होगा।

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