- झूठे आंकड़ों के जरिए ‘सुशासन’ का नीतीश का दावा हास्यास्पद.
पटना: 24 फरवरी 2017, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार में दलित व कमजोर वर्ग की छात्राओं पर लगातार जुल्म ढाये जा रहे हैं. वैशाली जिला के डीका बलात्कार-हत्या कांड के सभी दोषियों को अभी प्रशासन ने गिरफ्तार भी नहीं किया गया है कि इसी जिले के सहदेई बुजुर्ग ओपी के चकफैज पंचायत में आठवीं कक्षा की दलित समुदाय से आने वाली एक छात्रा की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गयी. वहीं, कैमूर जिले के चैनपुर में पिछले बुधवार की रात एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है. डीका बलात्कार-हत्या कांड के बाद बलात्कारियों-अपराधियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी और इन मसलों पर नीतीश सरकार की चुप्पी का ही नतीजा है कि इन ताकतों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले एक महीने में बिहार में बलात्कार की कई घटनायें सामने आयी हैं. वैशाली के राजकीय अंबदेकर छात्रावास में डीका कांड के बाद नवादा के राजकीय अंबेदकर छात्रावास में यौन शोषण का मामला उजागर हुआ. 11 फरवरी को औरगंाबाद में एक महादलित मुसहर समुदाय की लड़की से बलात्कार किया गया. गया में दसवीं की एक स्कूली छात्रा के साथ सामूहिक गैंगरेप किया गया. इससे कहीं अधिक घटनायें घट रही हैं, लेकिन वे सामने नहीं आ पा रही हैं. बावजूद, सरकार इन मसालों पर एक बयान तक नहीं दे रही है और निर्लज्जता के साथ बिहार में ‘सुशासन’ का ढोल पीट रही है. झूठे आंकड़ों के जरिए विधि व्यवस्था में सुधार का दावा कर रही है. दलित समुदाय की छात्राओं पर लगातार बढ़ते हमले ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में सामंती-अपराधियों के सामने सरकार ने घुटने टेक दिए हैं और वह पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुकी है.

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