रांची 16 फरवरी, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि झारखंड में परंपरागत उद्योग के क्षेत्र में निवेश किये जाने के अलावा पर्यटन एवं शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की जरूरत है और इसके लिए केंद्र सरकार पूरा सहयोग करेगी। श्री जेटली ने यहां प्रथम झारखंड वैश्विक निवेशक सम्मेलन का उदघाटन करते हुए कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संपदा बहुत है, जिसने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की जबरदस्त प्रतिस्पर्द्धा है। झारखंड भी निवेश आकर्षित करने में अग्रणी राज्य बनेगा। वित्तमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश के किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और अब यह पुरानी बात हो गयी है कि राज्यों को उनके संसाधनों के अनुसार राजस्व नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि कोयला ब्लॉकों की पारदर्शी नीलामी के बाद जिस राज्य से जो राजस्व प्राप्त होगा, वह उसी राज्यों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोयला और खनिज कानून में संशोधन किया गया है और इसका लाभ राज्यों को मिल रहा है।
श्री जेटली ने एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने के फैसले के बाद कितनी राशि बैंकों में आयी, इसका लेखा-जोखा रिजर्व बैंक तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि नकद लेन-देन होने से कई तरह की विसंगतियां होती है, जिसमें कर चोरी और अपराध भी शामिल है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस अवसर पर कहा कि 28, 29 और 30 नवंबर 2018 को प्रवासी झारखंडी सम्मेलन तथा वर्ष 2019-20 में अगले वैश्विक निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने उद्योग जगत की नामचीन हस्तियों का अभिनंदन करते हुए सभी से झारखंड की विकास यात्रा में सहयोग करने की अपील की। समारोह को भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, केंद्रीय सूचना तथा प्रसारण राज्यमंत्री वेंकैया नायडू, केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री स्मृति ईरानी के अलावा उद्योगपति रतन टाटा, कुमारमंगलम बिड़ला, राजेश गौतम अडाणी, अनिल अग्रवाल और नवीन जिन्दल, चेक गणराज्य, जापान, मंगलोलिया, आस्ट्रलिया और ट्यूनिशिया के प्रतिनिधियों समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया।

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