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शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

अंतिम दिन अपने लिए शिवपाल ने जमकर किया प्रचार

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जसवंतनगर(इटावा) 17 फरवरी, उत्तर प्रदेश की जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जिले में आयोजित सभाओं में खुद को विजयी बनाने की अपील की। तीसरे चरण के चुनाव प्रचार के अन्तिम दिन आज श्री यादव ने सिसहाट, नगला विधी, फुलरई, परसौआ, नगला नरिया, उसरई, भालासैया, भाउपुर, रनुआ, लाखौर, आलई और चैपुला में जनसभाएं की। चैपुला में सभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि आजादी के बाद पण्डित नेहरु के बाद देश में केवल शिवपाल सिंह यादव ही एक ऐसे नेता हैं जिनको चाचा कहा जाता है। इनकी लोकप्रियता का ग्राफ इसी से पता चलता है कि देश के तमाम प्रचार माध्यम भी इन्हें चाचा के नाम से ही संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि इटावा की धरती पर पैदा हुए इनके बडे भाई मुलायम सिंह यादव को भी सुभाष चन्द बोस के बाद नेताजी के नाम से जाना जाता है। चुनाव प्रचार के लिए हरियाणा से आये स्वामी कल्याण देव ने श्री यादव को गरीबों का मसीहा बताया तो कल्कि धाम के मठाधीश आचार्य प्रमोद कृष्णन ने शिवपाल की तुलना भगवान राम के भाई लक्ष्मण और भरत से की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करते हुए आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी के लोग केवल चुनाव में ही जनता से वायदे करते हैं और चुनाव के बाद अपने ही वायदों को जुमला करार देते हैं। आचार्य ने राम मंदिर बनाने, गंगा साफई, गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने और धारा 370 को खत्म करने जैसे अनेकों वायदे किये थे लेकिन सरकार बने करीब तीन साल हो गये आज तक एक भी वायदा पूरा नहीं किया। इस मौके पर श्री यादव ने कहा, “मैं आज जो कुछ भी हूं वह केवल नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और क्षेत्र की जनता की वजह से हूं। न तो मैंने कभी किसी के विरुद्ध साजिश की और ना ही कभी किसी के विरुद्ध छल किया। मैंने कभी किसी का अपमान भी नहीं किया।”


अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए श्री यादव ने कहा, “जब मैं कृषि मंत्री था तो आलू और धान को विदेशों में निर्यात किया गया था लेकिन केंद्र सरकार गलत नीतियों की वजह से आलू और धान के किसानों की हालत खराब हैं। उन्हें अपनी मेहनत और उपज का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि आलू किसान को एक पैकेट का मात्र सौ रुपये ही मिल पा रहा है जबकि उसकी लागत कम से कम चार से पांच गुनी आती है। समाजवादी पार्टी की सरकार ने तो केन्द्र को पत्र लिखा था लेकिन मौजूदा केन्द्र सरकार ने आलू तथा धान किसानों का लाभकारी मूल्य तय नहीं किया जिस कारण किसान को अपनी उपज को औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि यदि आप लोगों को अपनी उपज का सही मूल्य चाहिए तो नेताजी के नेतृत्व में दिल्ली की गद्दी पर भी कब्जा करना होगा। नेताजी जब भी सत्ता में आये तो गरीबों, मजदूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए ऐसी योजनाएं बनायी जिससे इन लोगों का भला हो सके। जबकि केन्द्र की सरकार ने नोटबंदी करके सबसे ज्यादा नुकसान किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों का ही किया है। श्री यादव ने कहा कि श्री मोदी ने कहा था कि विदेशों से कालाधन लाकर सबके खाते में 15-15 लाख रुपये जमा करायेंगे लेकिन हुआ क्या। सरकार बनने के कुछ ही माह बाद अपने वादे को जुमला करार दे दिया। नोटबंदी के बाद आज तक यह भी नहीं बताया कि इससे देश और देशवासियों को आखिर लाभ क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यदि इस बार आपने हमें पावर दी तो हम यह कोशिश करेंगे कि हर परिवार की एक लड़की या लड़के को सरकारी नौकरी दी जा सके और जिसे नौकरी नहीं मिले उसे रोजगार का दूसरा कोई साधन उपलब्ध कराया जाये ताकि परिवार का गुजर-बसर हो सके। 

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