कोरबा, 05 फरवरी, छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक महिला की मृत्यु हो जाने पर उसकी चार बेटियों ने मुखाग्नि देकर बेटे की कमी पूरी कर दी। संयोग ही था कि परिवार में कोई पुरूष सदस्य नहीं है। पिता की मौत के बाद मां कैंसर से लड़ाई लड़ रही थी। आखिरकार इस भयानक बीमारी ने उसकी जान ले ली। सूत्रों के अनुसार सिटी कोतवाली अंतर्गत पुरानी बस्ती में रहने वाले धमेन्द्र ठाकुर की दस साल पहले मौत हो गयी। पिता का साया जब सिर से उठा तो बड़ी बेटी अंजू और उसके बाद मंजू ने एक किराना दुकान में काम करते हुए घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभाला। इस परिवार पर एक साल पहले एक और बज्रपात उस समय हुआ जब उन्हें पता चला कि गीता को कैंसर हो गया है। बहनों ने मिलकर उसे रायपुर कैंसर अस्पताल में दाखिल कराया। स्मार्ट कार्ड से गीता का इलाज हुआ। जब स्मार्ट कार्ड के पैसे खत्म हो गये तो वे अपनी मां को लेकर कोरबा आ गये। जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिये। आखिरकार गीता ने घर में दम तोड़ दिया। इस परिवार का एक मात्र रिश्तेदार पंजाब में रहता है। इसके अलावा दूर-दूर तक इनकी रिश्तेदारी नहीं है। इस कठिन चुनौती की घड़ी में चारो बेटियों ने बेटा बनकर अपनी मां का अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। दुख की इस घड़ी में बस्ती वालों का भी संबल मिला। चारों बेटियों ने पहले अपनी मां को कंधा दिया। इसके बाद मुक्तिधाम में अंजू, मंजू, संध्या और रानी ने अपनी मां की चिता को अग्नि दी।
रविवार, 5 फ़रवरी 2017
बेटियाें ने मां काे मुखाग्नि दे निभाया बेटे का फर्ज
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