मजबूर लोग न्याय पाने से वंचित न हो : इलाहबाद हाई कोर्ट - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

मजबूर लोग न्याय पाने से वंचित न हो : इलाहबाद हाई कोर्ट

poor-must-get-justice-allahabd-high-court
लखनऊ, 05 फरवरी, चिकित्सालय और अदालतों में लोग मजबूरी में आते हैं,न्याय के रखवालों को उन लोगों का विशेष ध्यान रखना है कि ऐसे मजबूर लोग न्याय पाने से वंचित न रह जायें। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में आयोजित दो दिवसीय न्यायिक अधिकारी सम्मेलन में इलाहाबाद न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबा साहब भोसले ने कहा कि न्यायिक अधिकारियो की कार्यशैली न्याय का प्रतिपादन एवं सभी को सुलभ न्याय की वकालत करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी निर्भीक,स्पष्ट और सरल होकर फैसले दें जिससे समाज का हर पीडित व्यक्ति लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि न्याय तभी दिखाई देता है जब दोनों पक्षों ( वादी और प्रतिवादी ) में न्याय के प्रति संतुष्टि एवं विश्वास दिखाई दे। उन्होंने प्रदेशभर से आये न्यायिक अधिकारियों को शीघ्र और सुलभ न्याय के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने कहा चिकित्सालय और अदालतों में लोग मजबूरी में ही आते हैं और न्याय के रखवालों को उन लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए । लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय , न्यायमूर्ति ए आर मसूदी एवं न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने भी न्यायिक अधिकारियों द्वारा प्रभावी तरीके से न्याय दिए जाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि न्याय होना ही काफ़ी नही है, बल्कि समाज में न्याय होता हुआ भी दिखाई पड़ना चाहिए । न्यायमूर्ति राजन रॉय , न्यायमूर्ति पंकज मित्तल , न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा , न्यायमूर्ति प्रत्यूश कुमार एवं न्यायमूर्ति नारायण शुक्ला ने भी न्याय के अनेक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी को न्याय की प्रक्रिया के साथ-साथ स्वयं का विवेक लगाना भी जरूरी है कार्यक्रम के अंत में उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश अरुण मिश्रा ने न्यायिक अधिकारियों को प्रभावी न्याय दिए जाने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की । न्यायमूर्ति ने न्याय के कई अहम पहलुओं को भी विस्तार से बताया । सेमीनार के आयोजन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ निबन्धक विकास कुँवर एवं निबंधक संजय शंकर पांडेय और अन्य सभी स्टाफ ने भी अहम भूमिका निभाई।

कोई टिप्पणी नहीं: