नयी दिल्ली, 03 अप्रैल, उच्चतम न्यायालय ने बिजवासन से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक कर्नल देवेंद्र सहरावत का वह अनुरोध आज ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी उन्हें निष्कासित करती है तो उन्हें निर्दलीय सदस्य के तौर पर मान्यता प्रदान की जाये। न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस ए नज़ीर की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल आशंका के आधार पर याचिका दायर की है, जबकि उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। श्री सहरावत के वकील ने दलील दी कि यदि उनके मुवक्किल के खिलाफ आम आदमी पार्टी कार्रवाई करती है तो उन्हें निर्दलीय विधायक के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए और विधानसभा अध्यक्ष को विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। याचिका में कर्नल सहरावत ने कहा था कि दिल्ली की आप सरकार लोगों को दिये गये भरोसों को पूरा करने में नाकाम रही है। केजरीवाल सरकार के कामकाज का विरोध करने के लिए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के वास्ते विधानसभा अध्यक्ष के पास कार्यवाही चल रही है। अत: शीर्ष अदालत इस मामले में दखल दे और उन्हें संरक्षण दे। हालांकि न्यायालय ने उनकी दलील ठुकरा दी। गौरतलब है कि कर्नल सहरावत ने दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इन पर जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने का आरोप लगाया था जिसके बाद पार्टी विरोधी बयानबाजी के चलते पार्टी ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की है। यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के अधीन चल रहा है। कर्नल सहरावत ने एक पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी की अंदरुनी कलह को तो उजागर कर दिया है, साथ-साथ विपक्षी पार्टियों को भी बैठे-बिठाये एक मुद्दा दे दिया है। सहरावत ने अपने पत्र में दिल्ली डायलॉग कमीशन की उपयोगिता पर सवाल खड़े किये हैं। साथ ही इसकी तुलना सफेद हाथी से करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से बंद करने की सलाह दी है।
मंगलवार, 4 अप्रैल 2017
कर्नल सहरावत को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत
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