नयी दिल्ली 13 जून, मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ की नीति को आगे बढाते हुए रक्षा खरीद परिषद ने देश के प्रमुख रक्षा शोध संस्थान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से ढाई लाख करोड रूपये से अधिक की खरीद के सौदों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने डीआरडीओ के सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों को आधुनिक हथियारों और उपकरणों से लैस करने में योगदान का उल्लेख करने वाली एक पुस्तिका का आज विमोचन किया। रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार पिछले तीन वर्षों में डीआरडीओ के साथ हुए रक्षा सौदों की राशि में 60 फीसदी की बढोतरी हुई है। इस दौरान डीआरडीओ के साथ 2 लाख 57 हजार करोड रूपये के सौदों को मंजूरी दी गयी जबकि इससे पहले इतनी ही अवधि में केवल 1 लाख 61 हजार करोड रूपये के सौदे किये गये थे। डीआरडीओ द्वारा दूसरे देशों को बेची जाने वाली रक्षा सामग्री में भी काफी इजाफा हुआ है और यह 3 करोड 79 लाख डालर तक पहुंच गयी है। डीआरडीओ ने सशस्त्र सेनाओं को तेजस लडाकू विमान , अवाक्स रडार प्रणाली , आकाश मिसाइल प्रणाली, सोनार प्रणाली, वरूणास्त्र टारपीडो , परमाणु, जैविक और रसायनिक हथियारों को नष्ट करने वाला वाहन, अग्नि - 5 मिसाइल , सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी, मध्यम दूरी की मिसाइल, बख्तरबंद वाहन और मानव रहित यान से लैस करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस मौके पर डीआरडीओ के अध्यक्ष डा एस क्रिस्टोफर , सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत , नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल करमबीर सिंह , वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल एस बी देव और रक्षा मंत्रालय तथा डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बुधवार, 14 जून 2017
डीआरडीओ को मिले ढाई लाख करोड के सौदे
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