महागठबंधन अमानत, मजबूत विपक्ष का प्रयास रहेगा जारी : शरद यादव - Live Aaryaavart

Breaking

शनिवार, 19 अगस्त 2017

महागठबंधन अमानत, मजबूत विपक्ष का प्रयास रहेगा जारी : शरद यादव

mahagathbandhan-alive-sharad-yadav
पटना 19 अगस्त, बिहार में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) से गठजोड़ करने के श्री नीतीश कुमार के फैसले से बागी हुये जनता दल यूनाईटेड(जदयू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समानांतर बैठक में महागठबंधन को अमानत बताते हुये इसके टूटने पर दुख जताया और कहा कि संकट से घिरे देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी है और वह इस दिशा में ‘साझी विरासत’ के जरिये शुरू किये गये प्रयास को आगे बढ़ाने में लगे हैं। श्री यादव ने आज यहां श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में जदयू के बागी गुट की ओर से आयोजित ‘जन अदालत का फैसला महागठबंधन जारी है ’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में महागठबंधन बनना अमानत के समान था लेकिन यह बिखर गया। महागठबंधन का बिखरना काफी दुखद है। बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद वह देशभर में लोगों से मिलकर उनकी राय ली है। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान किसी व्यक्ति या पार्टी का नाम नहीं लिया और कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है, वह विचारधारा और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। जदयू के राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश आज विकट दौर से गुजर रहा है। आजादी के 70 साल बाद भी बिहार में अभी भी बाढ़ की समस्या बनी हुयी है और इससे अब तक डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को ‘जवान’ बताते हैं, जहां युवाओं की आबादी सबसे अधिक है लेकिन 60 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ में काम नहीं होने से घर औेर बाहर उन्हें ताना सुनना पड़ता है। 


श्री यादव ने कहा कि स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई चौपट हो गयी है। उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर कहा कि केन्द्र में सत्तारूढ़ दल ने प्रत्येक वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था और इस वादे के अनुसार अब तक छह करोड़ तथा पांच वर्ष में दस करोड़ युवाओं को रोजगार मिल जाता। इस तरह प्रत्येक परिवार में यदि पांच व्यक्ति भी हो तो इससे देश के करीब 50 करोड़ लोगों की जिंदगी संवर सकती थी। जदयू सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में बोली सच्ची होनी चाहिए। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि बोली और कर्म में अंतर हो तो लोकतंत्र नहीं चलेगा। आज सिर्फ जनता से झूठे वादे किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और धर्म के नाम पर हत्याएं हो रही है। वहीं, दूसरी ओर किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। श्री यादव ने कहा कि किसानों के समक्ष अकाल की समस्या खड़ी हो गयी है। किसान कभी आत्महत्या नहीं किया करते थे लेकिन आज खेत ही उनकी मौत का कारण बन गयी है। कई हजार किसानों ने आत्महत्याएं की है। उन्होंने कहा कि इस देश की खूबसूरती यही है कि सभी धर्म के लोग रहते हैं। उन्होंने पूना में मरे हुए जानवर की खाल निकाले जाने की चर्चा करते हुए कहा कि जानवर की खाल निकालने पर धर्म के नाम पर उस व्यक्ति की पिटाई की गयी। उन्होंने कहा कि देश में धर्म से जात नहीं बनी है। बाबा साहब भीम राव अम्बेदकर ने संविधान तो बना दिया लेकिन यदि इसे लागू करने वाले ईमानदार नहीं हुए तो देश भला नहीं होगा। 

जदयू सांसद ने कहा कि बिहार में गठबंधन था जो अब बिखर गया है लेकिन उनकी किसी से शिकायत नहीं हैं। देश में कई बड़ी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि जब वह मधेपुरा से लोकसभा का चुनाव हारे थे तभी उन्हें एहसास हुआ था कि ऐसी शक्तियों को रोकने के लिये महागठबंधन बनाना आवश्यक है। इस पर श्री नीतीश कुमार ने सहमति भी जतायी थी और इसके बाद ही महागठबंधन बना था जिसमें कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जदयू शामिल हुयी। श्री यादव ने भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की ओर इशारा करते हुए कहा कि महागठबंधन बनने के बाद बिहार में भाजपा के विजयी रथ को रोक दिया गया। प्रदेश के लोगों ने दो तिहाई बहुमत से महागठबंधन के उम्मीदवारों को चुनाव में जीत दर्ज करायी थी। उन्होंने कहा कि बिहार में महागठबंधन बनने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हो रही थी लेकिन आज परिस्थिति उलट गयी है। गठबंधन तोड़कर अब सरकारी पार्टी बन गयी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यह भी खूबसूरती है कि विपक्ष मजबूत रहे और तभी लोगों का कल्याण हो सकेगा । जदयू सांसद ने कहा कि गठबंधन लोगों के दिलों में बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महागठबंधन टूटने के बाद जब वह बिहार में लोगों से जन संवाद कार्यक्रम के लिये निकले तब उनके साथ रहे पूर्व मंत्री रमई राम, पूर्व सांसद अर्जुन राय समेत कई लोगों को पार्टी से निकाल दिया गया। चुटकी लेते हुए कहा कि बचे हुए जदयू से अब उन्हें भी बेघर करने की कोशिश हो रही है। महागठबंधन टूटने से बिहार के लोग आज दुखी हैं। उन्होंने कहा कि लोग तो आते जाते रहते हैं लेकिन रह जाता है सिद्धांत। आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके सिद्धांत आज भी कायम है।अपने पुरखों की याद उनके साथ है। उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर कहा कि किसी ने राहत ली लेकिन वह तो नहीं बदले। लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है और उसी का फैसला अंतिम होता है। इस मौके पर जदयू के बागी राज्यसभा सांसद अली अनवर, पूर्व मंत्री परवीन अमानुल्लाह, रामधनी सिंह, रमई राम, अर्जुन राय, रामदेव यादव, पूर्व सांसद राजवंशी महतो, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला और पार्टी से निलंबित राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने भी सभा को संबोधित किया । 

एक टिप्पणी भेजें
Loading...