बिहार : 23 अप्रैल से 1 मई तक ‘भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ’ जनाधिकार यात्रा. - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

बिहार : 23 अप्रैल से 1 मई तक ‘भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ’ जनाधिकार यात्रा.

  • राज्य के पांच केंद्रों से निकलेगी यात्रा, 1 मई को पटना में होगा जनाधिकार सम्मेलन.
  • चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के समापन पर 14 अप्रैल को बेतिया में भूमि अधिकार सभा का आयोजन, माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य होंगे शामिल.
  • 2 अप्रैल के भारत बंद में दसियों हजार लोगों पर फर्जी मुकदमे के खिलाफ 7 अप्रैल को राज्यव्यापी प्रतिवाद.

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पटना 6 अप्रैल 2018, भाकपा-माले का 10 वां महाधिवेशन पिछले मार्च महीने में पंजाब के मानसा में संपन्न हुआ. 5 अप्रैल को पार्टी की बिहार राज्य स्थायी समिति की एक दिवसीय बैठक पटना स्थित राज्य कार्यालय में संपन्न हुई. जिसमें कई आंदोलनात्मक कार्यक्रम लिए गए हैं. 1. 23 अप्रैल-1 मई तक ‘भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ’ जनाधिकार यात्रा: राज्य के पांच स्थानों से 23 अप्रैल से ‘भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ’ जनाधिकार यात्रा निकाली जाएगी. पहली यात्रा शाहाबाद जोन के विक्रमंगज से निकलेगी, जिसकी प्रत्यक्ष अगुवाई पार्टी महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य करेंगे. आरा होते हुए यह यात्रा 1 मई को पटना पहुंचेगी. दूसरी यात्रा गया से निकलेगी जो जहानाबाद, मसौढ़ी होते हुए पटना पहुंचेगी. तीसरी यात्रा बिहारशरीफ से निकलकर हिलसा, फतुहा होते हुए पटना पहुंचेगी. चैथी यात्रा मुजफ्फरपुर से निकलकर वैशाली होते पटना पहंुचेगी. पांचवी यात्रा खगड़िया-बेगूसराय में निकलेगी. 1 मई को पटना में ‘भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ’ जनाधिकार सम्मेलन होगा. इस एक सप्ताह की यात्रा के दौरान हर टीम में दसियों हजार मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान आदि शामिल होंगे. दंगा नहीं - जीने का अधिकार चाहिए, भूमि व आवास का अधिकार चाहिए जैसे नारे यात्रा के प्रमुख नारे होंगे. इसके अलावा छात्र-नौजवानों से जुड़े शिक्षा व रोजगार के सवाल, स्कीम वर्करों की स्थायी नौकरी, भोजन का अधिकार जैसे अन्य मुद्दे भी शामिल रहेंगे.

2. 14 अप्रैल को बेतिया में भूमि अधिकार सभा: चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के समापन के अवसर पर 14 अप्रैल को बेतिया में भूमि अधिकार सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्य वक्ता के बतौर माले महासचिव भाग लेंगे. यह कार्यक्रम मुख्यतः चंपारण सत्याग्रह के नाम पर भाजपा-जदयू सरकार द्वारा जनता से किए विश्वासघात के खिलाफ होगा. मोदी और नीतीश कुमार चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष का ढोंग पूरे जोर-शोर से कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर दलित-गरीबों को भूमि देने के बदले जमीन से लगातार उजाड़ा जा रहा है. चंपारण में आज भी अंग्रेजी राज का कानून चल रहा है. अंग्रेजों के समय में बेतिया राज की जमींदारी ‘‘कोर्ट आॅफ वार्डस’’ के अधीन थी, जो आज तक चली आ रही है. बिहार सरकार कह रही है कि उस जमीन को अधिग्रहित करने का अधिकार बिहार सरकार को नहीं है, इसलिए जमीन पर जो गरीब बसे हैं, उन्हें जमीन खाली करनी होगी. गरीबों को अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है. शहर के परिधि की बस्तियां को उजाड़कर सरकार उन्हें खाली कर दरअसल लैंड बैंक बनाना चाहती है. जबकि बेतिया राज की महज 10-20 प्रतिशत जमीन पर ही गरीबों का कब्जा है. शेष 80 प्रतिशत जमीन या तो चीनी मिलों, जमींदारों, बड़े भूस्वामियों के कब्जे में है. इस अवैध कब्जे पर सरकार एक शब्द नहीं बोलती. ठीक उसी प्रकार भूदान की जमीन की आज सरकार उलटी व्याख्या कर रही है. यहां पर गरीबों को जमीन से बेदखल करने के लिए सरकार कह रही है कि जमींदारों को तो जमीन दान करने का अधिकार ही नहीं था. इसलिए भूदान की जमीन गरीबों की बसावट असंवैधानिक है. बेतिया राज की तीस एकड़ जमीन पर केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने भी कब्जा जमा रखा है. 10 अप्रैल को जिस दिन मोदी चंपारण आ रहे हैं, भाकपा-माले विश्वासघात दिवस मनाएगी.

3. एससी-एसटी कानून में संशोधन के खिलाफ भारत बंद के दौरान दसियों हजार आंदोलनकारियों पर किए गए फर्जी मुकदमों की अविलंब वापसी, खगड़िया के माले जिला सचिव अरूण कुमार दास सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए हमलों व हत्या की घटनाओं का स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को दंडित करने तथा एससी-एसटी कानून में संशोधन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वापस न लेने की स्थिति में संसद से अध्यादेश पारित कर कानून की पुनबर्हाली की मांग पर 7 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध दिवस का आयोजन किया जाएगा. 4. 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीम राव अंबेदकर के जन्म दिवस पर छह वाम दलों के संयुक्त आह्वान पर जिला मुख्यालयों पर ‘संविधान बचाओ-देश बचाओ’ दिवस का आयोजन किया जाएगा. बिहार में हाल के दिनों में सांप्रदायिक उन्माद-उत्पात की घटनाओं में जबरदस्त वृद्धि हुई है और प्रशासन लगभग मूकदर्शक बना रहा है. साथ ही दलित अधिकार पर भी हमले बढ़े हैं. इन सवालों को 14 अप्रैल के कार्यक्रम में उठाया जाएगा.
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