बिहार : 22 जून को राजधानी पटना में ऐपवा का विशाल प्रदर्शन - Live Aaryaavart

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बुधवार, 13 जून 2018

बिहार : 22 जून को राजधानी पटना में ऐपवा का विशाल प्रदर्शन

  • पटना उच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान लेकर बिहार के सभी बालिका गृहों की जांच करायें

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पटना. बहुत ही अच्छा नारा लगता है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ'. ऐसे नारों के उलट कारनामा का पर्दाफाश हो जाता है. खुलेआम सरकारी संरक्षण में रहने वाली लड़कियों के साथ हो रहा है बलात्कार और यौन शोषण की खबर सामने आ जाती है.सरकार लिपापोती करने में जुट जाती है आज बुधवार को अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने प्रेसवार्ता कर मुजफ्फरपुर बालिका संरक्षण गृह  की घटना पर बिहार सरकार के रवैये पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि नीतीश सरकार भी अपने सहयोगी भाजपा सरकारों की तरह काम कर रही है. जिस प्रकार उ.प्र.  के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने उन्नाव की पीड़िता के बदले बलात्कारी भाजपा विधायक को बचाने की कोशिश की, कठुआ में धर्म के नाम पर बलात्कारियों  के पक्ष में तिरंगा लेकर जुलूस निकाला उसी तरह बिहार में आज बालिका गृह कांड के अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है.  इन गृहों में अनाथ लड़कियों को आश्रय  देने के बदले उनका बलात्कार और यौन शोषण का कारोबार चल रहा है और इस पर सरकार का रवैया सिर्फ संवेदनहीनता का मामला नहीं है बल्कि इस संगठित अपराध में शामिल अपराधियों की पर्दादारी की जा रही है. इस घटना की पीड़ित लड़कियों का बयान सामने आने के बावजूद बिहार के मुख्यमंत्री  चुप हैं और 15 दिन बीत जाने के बाद भी संरक्षण गृह के संचालक और स्टाफ के अतिरिक्त किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं हुई है.ऐपवा के एक जांच दल ने विगत 8 जून को बालिका गृह जाकर जांच पड़ताल की. फिलहाल इस गृह को सील कर दिया गया है.यह गृह 2012 से चल रहा है.गृह संचालक ब्रजेश ठाकुर के परिवार की महिलाओं के अनुसार यहां 47 लड़कियां रह रही थीं.4000 स्कावयर फीट के इस गृह में 7 महिला स्टाफ थीं जो अब जेल में हैं. उनके अनुसार डायरेक्टर सुनील कुमार लड़कियों और पैसे की मांग करते थे उनकी मांग पूरी न होने के कारण उन्होंने अपने रिटायरमेंट से एक दिन पहले एफ.आई.आर.दर्ज कराया. ऐपवा ने सवाल उठाया है कि डायरेक्टर सुनील कुमार और संरक्षण गृह का नियमित दौरा करने वाले कल्याण पदाधिकारी रवि रोशन के खिलाफ कोई कार्रवाई या गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई है? न्यायालय की देखरेख में संरक्षण गृह रहते हैं.लेकिन वहां की स्थिति से न्यायालय को अवगत क्यों नहीं करवाया गया? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बाल संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष ने कहा है कि फरवरी महीने में टी.आई.एस.एस.ने बिहार के बालिका गृहों का ऑडिट रिपोर्ट को किन अधिकारियों ने दबा कर रखा? सीएम इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? ऐपवा ने ऐलान कर दिया कि राजधानी पटना में 22 जून को विशाल प्रदर्शन करेंगी.वहीं पटना उच्च न्यायालय से अपील की है कि स्वत: संज्ञान लेकर बिहार के सभी बालिका गृहों की जांच करायें. ऐपवा नेत्री मीना तिवारी,सरोज चौबे और शशि यादव ने प्रेसवार्ता को संबोधित की. 
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