एयर इंडिया का विनिवेश विफल, मंत्रियों का समूह तय करेगा आगे की प्रक्रिया - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 1 जून 2018

एयर इंडिया का विनिवेश विफल, मंत्रियों का समूह तय करेगा आगे की प्रक्रिया

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नयी दिल्ली 31 मई, पचास हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबी सार्वजनिक विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की सरकार की योजना को आज उस समय गहरा झटका लगा जब अभिरुचि पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी कोई खरीददार सामने नहीं आया। आगे की प्रक्रिया अब एयरलाइन के विनिवेश के लिए बना मंत्रियों का समूह तय करेगा। नागरिक उड्डयन सचिव राजीव नयन चौबे ने बताया कि एयर इंडिया के लिए कोई बोली नहीं लगायी गयी। आज शाम पाँच बजे अभिरुचि पत्र दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो गयी। उन्होंने कहा “हम इससे बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रहे थे।”
उन्होंने बताया कि निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) की प्रक्रिया के तहत विभाग के अतिरिक्त सचिव तथा वित्तीय सलाहकार वाली आँकलन समिति स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले विनिवेश का कोर समूह इस पर विचार करेगा और अंतत: मामला एयर इंडिया में विनिवेश के लिए बने मंत्रियों के समूह के समक्ष इसे रखा जायेगा। मंत्रियों के समूह को आगे की प्रक्रिया पर अंतिम फैसला करना है। दो सप्ताह के भीतर मामला मंत्रियों के समूह के पास पहुँच जाने की उम्मीद है। इस बीच विनिवेश प्रक्रिया के नियुक्त सौदा सलाहकार ईवाई से भी प्रक्रिया के विफल रहने के कारणों के बारे में जानकारी माँगी जायेगी।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। एयर इंडिया का विनिवेश पहले प्रयास में विफल रहने से इस गहरा झटका लगा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल एयर इंडिया में रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके लिए इस साल 28 मार्च को आरंभिक सूचना पत्र जारी किया गया था। एयरलाइन की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए निविदा जारी की थी। अभिरुचि पत्र दायर करने की अवधि पहले 14 मई थी जिसे बढ़ाकर 31 मई किया गया था। नागरिक उड्डयन सचिव ने कहा कि मंत्रियों का समूह ही आगे की दिशा तय करेगा। यदि समूह दुबारा विनिवेश प्रक्रिया शुरू करने का फैसला करता है तो शर्तों के साथ विनिवेश की रणनीति में बदलाव का विकल्प भी खुला है। पहले सरकार ने एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। यह पूछे जाने पर कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी हो जायेगी श्री चौबे ने कोई समय सीमा बताने से इन्कार कर दिया। बोली लगाने वाली संभावित विमान सेवा कंपनियों की चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू से ही बाजार को अवगत करा दिया था कि एयर इंडिया के परिचालन पर हिस्सेदारी खरीदने वाली कंपनी का पूरा नियंत्रण होगा। इसलिए सरकार ने 76 प्रतिशत हिस्सेदारी विनिवेश के लिए रखी थी। 

श्री चौबे ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विनिवेश प्रक्रिया के लंबा खिंचने से एयर इंडिया वित्तीय अनिश्चितता की स्थिति में न पहुंच जाये। उसके नये विमान खरीदने तथा विस्तार पर लगी आंशिक रोक पर मंत्रालय जल्द ही विचार करेगा। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि एयर इंडिया की बाजार हिस्सेदारी प्रभावित हो।” एयर इंडिया पर इस समय करीब 58 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें 25 हजार करोड़ रुपये एक विशेष कंपनी बनाकर उसे स्थानांतरित किया जाना था, जबकि शेष 33 हजार करोड़ रुपये का कर्ज एयर इंडिया के पास ही रहना था।  विनिवेश की घोषणा के तुरंत बाद देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी इंडिगो ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई थी। लेकिन, आरंभिक सूचना पत्र जारी होने के बाद विनिवेश की शर्तें मनमाफिक न होने के कारण उसने हाथ खींच लिये। इंडिगो के अलावा एक विदेशी कंपनी ने भी रुचि दिखाई थी, लेकिन विनिवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोई खरीददार सामने नहीं आया। 
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