बिहार : तीर-धनुष के बल पर अनुसूचित जन जाति के संथाल लोगों ने 60 एकड़ खेतिहर जमीन कब्जाया - Live Aaryaavart

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रविवार, 1 जुलाई 2018

बिहार : तीर-धनुष के बल पर अनुसूचित जन जाति के संथाल लोगों ने 60 एकड़ खेतिहर जमीन कब्जाया

जब सरकार के द्वारा बंदोबस्ती करने वाले लाल कार्डधारी जमीन पर कब्जा करने गये तो संथालियों ने तीर-धनुष से कमलेश्वरी ऋषि को ढेर किया, घर और कोर्ट का चक्कर 25 सालों से लगा रहे हैं महादलित 
land-capture-by-mahadalit
समेली,(कटिहार). महादलित मुसहर समुदाय की जमीन पर संथालियों का कब्जा बरकार.25 सालों से घर और कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं महादलित. महादलित जमीन बंदोबस्ती करने वाले लाल कार्ड को देखकर हो जाते हैं लाल.  कटिहार जिले में है समेली प्रखंड.इस प्रखंड में छोहार पंचायत है.इस पंचायत के वार्ड नम्बर 1में है बड़ी मुसहरी.यहां पर 125 घर है.जनसंख्या करीब 675 है. केवल चार लोग ही मैट्रिक उर्तीण हैं.  वार्ड नम्बर 1 के वार्ड सदस्य है बिसो ऋषि.कहते हैं कि हम खेतिहर भूमिहीनों को सरकार ने जीविकोपार्जन  करने के लिए एक-एक एकड़ जमीन 60 लोगों को दी है. दुर्भाग्य से अनुसूचित जन जाति के संथाल लोग तीर-धनुष के बल पर कब्जा जमा रखे हैं. मामला 25 साल से कोर्ट में विचाराधीन है और हमलोग मालगुजारी देकर कागजात और रसीद जन्नत से रखे हैं. यहां पर गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति के कार्यकर्ता कम्युनिटी बेस ऑगनाइजेशन (सी. .बी.ओ.) गठन करने गये थे.वार्ड सदस्य बिसो ऋषि से मिले.उन्होंने  एक भवन की छत पर बैठक करवाने का निर्णय लिया.बैठक शुरू होने के पहले कार्यकर्ता ने अपना नाम और पता बताया.इस समय समेली प्रखंड के डूमर पंचायत में रहने वाले  नरेश नारायण सिन्हा के मकान में प्रगति ग्रामीण विकास समिति का कार्यालय है.हम लोग ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कार्यशील हैं.और तो और लोगों के आय में वृद्धि हो. जल,जंगल और जमीन जनता के अधीन ही रहे.

बैठक शुरु हुई. कार्यकर्ता ने कहा कि अन्य जगहों की तरह ही शायद बड़ी मुसहरी में भी सरकार के द्वारा जमीन मिली होगी? मनरेगा से काम मिलता होगा.आप लोग खुशी से रहते होंगे? कहा गया कि सरकार के द्वारा 60 लोगों को 1-1 एकड़ जमीन मिली है.खेती कर परिवार का लालन-पालन करने के लिये. उस समय लाल कार्ड के माध्यम से जमीन दी जाती थी. दुर्भाग्य से अनुसूचित जन जाति  (संथाल) लोगों का कब्जा है. लोगों को संगठित करने के उद्देश्य से एक व्यक्ति आया था.उसने बैठक करवायी.इसके बाद नक्सली गतिविधि करने लगा. लोगों को मोहित और जागरूक करने के लिए क्रांतिकारी गीत गाने लगा. उसने संथालियों से अपनी जमीन लेने को उकसाने लगा.उस नक्सली के मार्गदर्शन में जमीन पर चढ़ाई करने गये. संथाली लोग तीर -धनुष से वार करने लगे.इसमें कमलेश्वरी ऋषि मारा गया.  इसके बाद बैठक से लोग उठने लगे. लोगों को समझाने के बाद ही लोग मान गये.विभिन्न मुसहरी का नाम लिया. मोबाइल की तस्वीर दिखायी. गांधी,विनोबा,जयप्रकाश के मार्ग पर चलने वाली संगठनों के बारे में बताया.2007 में जनादेश और 2012 में जन सत्याग्रह में पदयात्रा किये.आवासीय भूमिहीनों को भूमि देने के कानून बने. इतना कहने के बाद मुसहरी के सम्मानित व्यक्ति मौजी ऋषि (69 वर्ष) की पहलकदमी पर लोग बैठक में शामिल. मौजी ऋषि ने कहा कि हमलोग 25 साल से 1 एकड़ जमीन का मालगुजारी देते हैं.सबके पास रसीद है.केस किया गया है.मामला कोर्ट में है. उसके बाद मौजी ऋषि की अध्यक्षता उत्थान मंच नामक सीबीओ का गठन किया गया. अध्यक्ष मौजी ऋषि, सचिव गीता देवी और कोषाध्यक्ष सरिता देवी हैं. सदस्य रामू कुमार,युगल ऋषि,किशन कुमार,राधे ऋषि, शिवमाला देवी, पनिया देवी, बाबूलाल ऋषि, सुरोमणि देवी, बालेश्वर ऋषि,सुबोध पासवान और गौतम ऋषि.
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