बिहार : बिहार बंद की सफलता पर भाकपा-माले ने दी बिहार की जनता को बधाई. - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 2 अगस्त 2018

बिहार : बिहार बंद की सफलता पर भाकपा-माले ने दी बिहार की जनता को बधाई.

  • केंद्र सरकार द्वारा संचालित स्वाधार गृहों की हालत भी दयनीय. मुजफ्फरपुर स्वाधार गृह मामले में केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी इस्तीफा दें.
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पटना (आर्यावर्त डेस्क) 2 अगस्त, वाम दलों द्वारा आहूत आज के बिहार बंद की ऐतिहासिक सफलता पर भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बिहार की जनता को बधाई दी है. उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा है कि बिहार में मुजफ्फरपुर सहित अन्य बालिका, अल्पावास, स्वाधार गृहों में बर्बर किस्म के यौन उत्पीड़न व बर्बरता के खिलाफ आज पूरा बिहार सड़कों पर था. महिलाओं व दलितों पर हो रही इस हिंसा को अब हम सहन नहीं करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नियंत्रण में चलने वाली बालिका गृहों के बाद अब केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत चल रहे स्वाधार गृहों की हकीकत भी सामने आ रही है. भाजपा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है लेकिन कहीं बलात्कारियो के पक्ष में तिरंगा जुलूस निकालती है और सरकारी योजनाओं को महिलाओं के साथ बलात्कार व यौन उत्पीड़न की योजनाओं में तब्दील कर दे रही है. जिस मुजफ्फरपुर में बर्बर बालिका गृह उत्पीड़न कांड घटित हुआ, उसी शहर के स्वाधार गृह में भी ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है. स्वाधार की योजना पूरी तरह भारत सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय के अधीन चलता है. वहां रहने वाली 11 महिलाएं लापता हैं. उनका क्या हुआ किसी को पता नहीं. 2015 में मोदी सरकार ने स्वाधार गृह का टेंडर ब्रजेश ठाकुर को ही दिया था जो बालिका गृह का भी संचालक था. उन्होंने कहा कि केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने 26 जुलाई 2018 को मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड पर बयान दिया था कि कमजोर कानून के कारण ऐसी घटना हुई. उन्होंने यहां तक कहा था कि संांसद अपने इलाके का दौरा करें और बालगृहों व सुधार गृहों से मंत्रालय को अवगत कराएं, अब उनके खुद मंत्रालय में इस तरह की घटनाएं उजागर हो रही हैं. तब उनको अपने पद पर बने रहने का कोई भी अधिकार नहीं है.

मुजफ्फरपुर स्वाधार गृह में 20 मार्च को स्टेट सोशल वेलफेयर की जांच रिपोर्ट ने 11 महिलाएं थीं, लेकिन 9 जून को जब वह टीम दुबारा पहुंची तब मुजफ्फरपुर स्वाधार गृह में ताला लटका पाया गया और कोई भी महिला वहां नहीं थी. 9 जून को महिलाओं के गायब होने की सूचना के बाद भी 29 जुलाई तक इस मामले में कोई एफआईआर तक दर्ज तक न हो सकी. ऐसे में स्वभाविक सवाल उठता है कि आखिर 2 महीने तक केंद्र सरकार कौन सी माॅनिटरिंग कर रही थी कि उसे महिलाओं के गायब होने की खबर तक नहीं मिली. आगे कहा कि महिलाओं के ‘सम्मानजनक जीवन’ के नाम पर चलाई गई यह योजना भी महिलाओं पर दमन-अत्याचार का जरिया बन गया है. दरअसल, केंद्र व राज्य सरकार के संरक्षण में आज सभी बालिका गृहों, अल्पावास गृहों, स्वाधार गृहों आदि को बलात्कार व यौन उत्पीड़न का केंद्र स्थल बना दिया गया है. इसलिए मुजफ्फरपुर स्वाधार गृह मामले में हम केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और बिहार के भाजपा कोटे के मंत्री सुरेश शर्मा के इस्तीफे की मांग करते हैं. बालिका गृहों, अल्पावासों, स्वाधार गृहों आदि को भाजपा-नीतीश सरकार द्वारा बलात्कार व यौन उत्पीड़न का केंद्र बनाने के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. यह स्वागतयोग्य कदम है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. हमारी मांग है कि इन सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष निर्देशन में सीबीआई जांच होनी चाहिए.
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