बिहार : 9 अगस्त को देशव्यापी जेल-भरो कार्यक्रम के तहत हजारों किसानों की गिरफ्तारी - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 9 अगस्त 2018

बिहार : 9 अगस्त को देशव्यापी जेल-भरो कार्यक्रम के तहत हजारों किसानों की गिरफ्तारी

  • किसानों के कर्ज मुक्ति, फसलों को लाभकारी मूल्य देने और भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने आदि मांगों को लेकर

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पटना (आर्यावर्त डेस्क) 9 अगस्त, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह ने बयान जारी करके कहा है कि साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के अवसर पर आज 9 अगस्त को अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से देशव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत बिहार में हजारों बटाईदारों व किसानों ने गिरफ्तारी दी है. राष्टपति और प्रधानमंत्री को जिलाधिकारी और अनुमंडलाधिकारी के माध्यम से किसानों की मांगों का मांग पत्र दिया. मांग पत्र में बटाईदारों समेत सभी किसानों के संपूर्ण कर्जे से मुक्ति, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के आधार पर फसलों का लाभकारी मूल्य देने, गरीबों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ने पर रोक लगाने, बंद पड़े नलकूपों को चालू करने, सिंचाई का समुचित प्रबंध करने, किसानों की आत्महत्या पर रोक लगाओ, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा की गारंटी देना आदि पर रोक लगाने आदि मांगो को लेकर पूरे राज्य में राष्टव्यापी आह्वान पर हजारों किसानों ने गिरफ्तारी दी. उन्होंने कहा कि दरभंगा, दाउदनगर, हाजीपुर, पूर्णिया, बेगुसराय, पटना के मसौढ़ी और पालीगंज, अरवल, भभुआ, सीवान, मोतिहारी, बेतिया, समस्तीपुर, जमुई, नालंदा, हिलसा आदि स्थानों पर किसान महासभा के नेताओं ने गिरफ्तारी दी. मुख्य नेताओं में औरंगाबाद के दाउदनगर में किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, वैशाली में राज्य अध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव, जहानाबाद में बिहार राज्य सचिव रामाधार सिंह, पूर्णिया में अविनाश पासवान व इसलामुद्दीन, सिवान में जयनाथ यादव, भोजपुर में विधायक सुदामा प्रसाद व चंद्रदीप सिंह, मसोढ़ी में उमेश सिंह व भगवान सिंह, हिलसा में मुनिलाल यादव, नवादा में किशोरी प्रसाद यादव, भागलपुर में विंदेश्वरी मंडल, दरभंगा में शिवन यादव, मोतिहारी में शंभू यादव आदि नेताओं के नेतृत्व में यह जेल भरो अभियान संगठित किया गया.

राजाराम सिंह ने कहा कि आज देश में कृषि संकट के कारण किसान आत्महत्याएं करने के लिए मजबूर हैं. मोदी राज में किसानों को छला गया. भाजपा की मोदी सरकार ने बटाईदारों सहित किसानों को न कर्ज मुक्त किया, न किसानों के फसलों का ड्योढ़ा मूल्य दिया. किसान लंबे समय से लड़ रहे हैं लेकिन केन्द्र व राज्य सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहे. उलटे कृषि योग्य जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है. बिहार सहित पूरे राज्य में सुखाड़ व बाढ़ की स्थिति है. आज के कार्यक्रम के जरिए हम एक बार फिर केंद्र सरकार को चेतावनी भेजते हैं. यदि वह हमारी मांगों पर अविलंब कार्रवाई नहीं करती तो हम और जोरदार आंदोलन करेंगे.
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