बेगुसराय : स्वतंत्रता सेनानी सत्यनारायण प्रसाद जी नहीं रहे - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 18 सितंबर 2018

बेगुसराय : स्वतंत्रता सेनानी सत्यनारायण प्रसाद जी नहीं रहे

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बेगूसराय (अरुण शाण्डिल्य) सत्यनारायण प्रसाद अपने जीवन यात्रा के 96 वां वर्ष पूर्ण करते हुए मात्र शतक में 04 वर्ष कम पड़ गया और चलते-फिरते हो गये क्लीन बोल्ड।और इहलोक से परलोक के लिये किये प्रश्थान।सन 2018 में अपनी 73 वीं शादी की साल गिरह मनाते हुए 11 सितम्बर 2018 को अपनी अंतिम सांसे लेते हुए इस दुनियाँ से सदा के लिये विदा हो गए।और छोड़ गए अपने पीछे अपनी पत्नी के श्रीमती राधा देवी के साथ अपने तीन पुत्र उदय कुमार जो कि स्टेट ट्रांसपोर्ट से अवकाश प्राप्त हैं।द्वितीय पुत्र प्रकाश कुमार सिन्हा रंगकर्मी,समाजसेवी,कवि व पूर्व नगर पार्षद रह चुके,और इनकी धर्मपत्नि श्रीमति अर्चना देवी बेगूसराय नगर निगम की प्रभारी महापौर तथा प्रथम उपमहापौर,कनिष्क पुत्र दिलीप कुमार सिन्हा पूर्व लोक अदालत सदस्य वर्तमान में समाज सेवी,परिवार परामर्श केन्द्र सदस्य,रेलवे में जोनल कमिटी के सदस्य और मॉर्डन फर्नीचर प्रतिष्ठान के संचालक।और इन तीनो भाइयों के परिवारों के साथ अपनी तीन पुत्री अन्नपूर्णा,सम्पूर्णा और माला सिन्हा का पूरा परिवार।यूँ कह सकते हैं कि पूर्ण रूप से विकसित खुशहाल परिवारों को छोड़कर जाना कितना आनन्ददायी होता है।इनके पार्थिव शरीर को दिनांक 12 सितम्बर 2018 को मिथिला के पावन गंगातट सिमरिया धाम में अंतिम संस्कार किया गया।मुखाग्नि दिया इनका ज्येष्ठ पुत्र उदय कुमार ने और इस तरह सत्यनारायण प्रसाद की जीवन लीला अग्नि के सहयोग से पंचतत्वों में विलीन हुआ।सत्यनारायण प्रसाद प्रथम तो शिक्षक के रुप में कार्यरत थे आगे चलकर अपनी योग्यता के बलपर ब्लॉक में कार्यरत रहे और सी आई के पद पर कार्य करते हुए सन 1982 में अवकाश प्राप्त हुए।तारीफ की बात तो यह है कि अवकाश प्राप्ति के बाद इन्हीं का भ्रष्ट विभाग इनसे पेंशन के लिये कागजात आगे बढ़ाने के लिये रिश्वत की मांग की तो रिश्वत नहीं देने के कारण पेंशन से 2003 तक वंचित रहे।कारण यह था कि इन्होंने अपने कार्यकाल में कभी किसी से एक पैसा भी रिश्वत कभी नहीं लिया इसलिये इन्होंने पेंशन छोड़ देना उचित समझा न कि रिश्वत देना।बाद में इनका पुत्र सब जब इस लायक हुए तो काफी जद्दोजहद के बाद 2004 में पेंशन चालू करवाया फिर अवकाश प्राप्ति के 22 वर्षों बाद पेंशन के लाभ से लाभान्वित हुए।इनकी योगदान स्वतंत्रता सेनानी के रुप मे भी काफी सराहनीय मानी जाती है।इनकी ईमानदारी से प्रभावितं होलार ये तीनों भी भी पूर्ण ईमानदारी से अपने कार्यों से समाज को यथा स्थान,यथा संभव लाभान्वित करने में पीछे नहीं रहते हैं।यह सब अपने पितृ संस्कारों का प्रतिफल मानते हैं।जिनका एक नाती भी है विजय कुमार जो बंगाल पुलिस में थानाध्यक्ष है।ऐसे व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों के आत्मा को ही शान्ति और मोक्ष प्राप्त होता है।
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