बिहार : पीएचसी में सेवारत महादलित परिवार को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलता - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

बिहार : पीएचसी में सेवारत महादलित परिवार को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलता

  • 40 साल से स्वीपर के पद पर क्रियाशील लक्ष्मी देवी को स्थायी नहीं किया
  • दिवा में काम करने पर तीन हजार व रात्रि में करने वाली को ढाई हजार रू.मासिक वेतन
  • न वर्तमान और न ही भविष्य उज्जवल है मां,बेटा और पुतौहू की
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समेली। कटिहार जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,समेली में महादलित डोम समुदाय के साथ अन्याय हो रहा है। यहां पर एक ही परिवार के तीन व्यक्ति स्वीपर पद पर कार्यरत हैं। दुर्भाग्य है कि इन तीनों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही है। जिसके कारण इनका न वर्तमान और न ही भविष्य उज्जवल व सुरक्षित है। बताते चले कि इस पीएचसी में कार्यरत अन्य स्वास्थ्यकर्मी स्थायी हैं और मोटी रकम का भोग ले रहे हैं।मगर इन तीनों महादलितों को  सातवां  वेतनमान नहीं पर न्यूनतम मजदूरी भी देय नहीं है। जिसके कारण सुपर से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं महादलित परिवार ।

लक्ष्मी देवी को लक्ष्मी देवता की तलाश
पी.एच.सी. में अव्वल लक्ष्मी देवी स्वीपर का कार्य करती हैं।इसके बाद लक्ष्मी का बेटा संजय मेहतर कार्य शुरू किए। आठवी कक्षा तक संजय पढ़े हैं। इनकी पत्नी नीलम देवी भी कार्यरत हैं। नीलम नौवी कक्षा तक पढ़ी हैं। दोनों के पांच संतान हैं।सभी अध्ययनरत हैं।कोई भी मैट्रिक उर्तीण नहीं हैं।

पीएचसी में 25 साल बेगारी की हैं लक्ष्मी देवी 
अपनी मां लक्ष्मी देवी के बारे में संजय मेहतर कहते है कि मां साठ साल की हो गयी हैं। इन साठ सालों में मां 25 साल बेगारी की हैं। डाक्टर लोग पांच-दस रूपए दे देते थे।इसी में स्वीपर का कार्य निकाल लेते थे। काफी प्रयास करने के बाद 1500 रू.पगाढ़ मिला। अभी 3000 रू.मिल रहा है। लगातार 40 साल से कार्य कर रही हैं। मां को स्थायी नहीं किया गया।अब तो रिटायर की दहलीज पर हैं। संजय ने सीएम नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि जिस प्रकार से अन्य पीएचसी के स्वीपर को वेतनादि की सुविधा दी जाती है उसी तर्ज पर लक्ष्मी देवी को वेतनमान आदि देकर रिटायर किया जाए। हां अभी टायड नहीं हैं कि रिटायर कर दी जाए।अगर कानून सम्मत व्यवहार करना है तो कानून सम्मत वेतनादि देकर विदा किया जाएं। लक्ष्मी देवी के पुत्र संजय को 3000 और पुत्रवधू नीलम देवी को 2500 रू.मिलता है दिवाकाल में काम करने पर संजय मेहतर को 3000 और रात्रिकाल में काम करने पर नीलम देवी को 2500 रू.मासिक वेतन मिलता है।इससे महादलित परिवार क्षुब्ध हैं।

एक बांस के बदले एक सूप देते हैं 
इस समय न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने वाला परिवार महाछठ पर्व के अवसर पर व्यवहार होने वाला सूप तैयार कर रहा है। बांस की किल्लत है। उनको एक बांस के बदले में बांस मालिक को एक सूप देना पड़ता है।अभी तक यह परिवार 250 सूप तैयार कर लिया है। शुरूआती दौर में एक सूप को 50 रू.में बेचा। अब 100 रू.में बेच रहा है। इस पर संजय मेहतर कहते हैं कि डोम महाराज की सूप और मुसलमानों का चूल्हा महत्वपूर्ण स्थान रखता है।कीमत मायने नहीं रखता है।हमलोग मजदूरी लेते हैं। पर्व निकट आने पर सूप की कीमत बढ़ भी सकती है।वार्ता के ही क्रम में पीएचसी की ए एन एम दीदी ने तीस सूप देने का ऑडर दे दी।

पीएचसी के सामने झोपड़ी बनाकर रहते थे महादलित परिवार 
हमलोग रहने लायक झोपड़ी बनाकर रहते थे। आफत का एक दिन बनकर आया। संजय कहते है कि 2016 में सड़क दुर्घटना में एक बच्चा घायल हो गया। उसे उठाकर पीएचसी लाया गया। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गयी। परिजन सड़क हादसा और बेहतर इलाज नहीं होने का आरोप लगाकर जेनरेटर घर व अन्य जगहों  में आग लगा दी।जेनरेटर में आग लगने से तेल बहकर झोपड़ी तक आ गयी। उसी राह से आग भी आ गयी।देखते ही देखते तिनका जोड़जोड़ कर निर्माण झोपड़ी धू-धूकर जल गयी। करीब 50 हजार रू.की झोपड़ी जलकर राख हो गयी।नकद 27,500 रू. व 25 भर चांदी भस्म हो गया। राहत व मुआवजा देने का आवेदन समेली प्रखंड के नाम बीडीओ साहब को दिया गया।आवेदन फेंक दिए बीडीओ साहब।सड़क के किनारे रहते हो और सरकारी नौकरी करते हो।किस बात की राहत व मुआवजा?
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