रामलीला मैदान से भाजपा का चुनावी शंखनाद - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 12 जनवरी 2019

रामलीला मैदान से भाजपा का चुनावी शंखनाद

bjp-s-kicked-off-election-compaign-from-ramleela-maidan
नयी दिल्ली, 11 जनवरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन शुक्रवार को 2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका, जहाँ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने विजय का विश्वास जताते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि मतगणना तक आराम करने का समय नहीं है।  श्री शाह ने दो-दिवसीय अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में इस चुनाव को युद्ध की संज्ञा देते हुए कहा कि यह देश के भविष्य के लिए पानीपत के युद्ध जितना महत्त्वपूर्ण है, जिसमें हार के बाद देश को 200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह ‘मोदी’ बनाम ‘अन्य सभी’ की लड़ाई है। जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है और भाजपा की विजय निश्चित है। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला तथा कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से मोदी सरकार के काम की तुलना करते हुए उसकी उपलब्धियाँ गिनाई। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “2019 का चुनाव भारत के विकास एवं पार्टी के विस्तार के स्थायित्व का चुनाव है। विजय हमारी निश्चित है। जनता मोदी जी के साथ चट्टान बनकर खड़ी है। मोदी जी देश ही नहीं, दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। ...आज से मतगणना तक हमारे लिए विराम का समय नहीं है।”  उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव अनोखा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 35 दल मिलकर लड़ेंगेे, वहीं दूसरी ओर स्वार्थ के आधार पर बना बेमेल गठबंधन रहेगा जिसका न नेता है और न ही नीति। उन्होंने कहा कि कुछ युद्ध ऐसे होते हैं जो सदियों तक अपना असर छोड़कर जाते हैं। यह चुनाव भी वैसा ही युद्ध है। यह विचारधारा का युद्ध है।  श्री शाह ने मराठा साम्राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय अफगानिस्तान से कर्नाटक तक और गुजरात से ओडिशा तक पेशवा का साम्राज्य था, लेकिन 130 युद्ध जीतने वाले मराठा केवल पानीपत की तीसरी लड़ाई हारे तो 200 साल की गुलामी झेलनी पड़ी।
एक टिप्पणी भेजें
Loading...