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रविवार, 24 फ़रवरी 2019

काॅग्रेस व झारखण्ड नामधारी पार्टियों ने आदिवासियों को हमेषा छलने का ही काम कियाः रघुवर दास

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) 70 वर्षों तक देश की संस्कृति व संप्रभूता से खिलवाड़ करती रही काॅग्रेस व उसकी पिछलग्गु झारखण्ड नामधारी पार्टियों ने राज्य अलग होने के बाद से साढ़े चार वर्ष पूर्व तक संवारती रही सिर्फ अपना चेहरा। आदिवासियों के लिये उनके दिल में कोई जगह नहीं थी। आदिवासियों की भाषा, लिपि व संस्कृति से खिलवाड़ किया जाता रहा। वर्ष 1998 मंे पहली मर्तबा केन्द्र में वाजपेयी जी की सरकार ने आदिवासियों को सम्मान देने का काम किया। जिस आदिवासी समाज ने देश के लिये कुर्बानियाँ दी उन शहीदों को कभी सम्मान देने का कोई काम नहीं किया गया। इस देश में पहली बार केन्द्र की मोदी सरकार ने राज्य को 25 करोड़ रुपये का आवंटन सिर्फ व सिर्फ झारखण्ड के वीर शहीदों के लिये संग्रहालय निर्माण कार्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता दिखलायी गई। पहली मर्तबा लाल किले के प्राचीर से पीएम मोदी ने देश को बिरसा मुण्डा से अवगत कराया। शहीदों के लिये स्मारक निमार्ण की दिशा में पहल प्रारंभ की गई। आदिवासी संताल भाषा आॅल चिकि लिपि शिक्षा अभियान सेवा ट्रस्ट के वैनर तले इंडोर स्टेडियम, दुमका मंे आयोजित मुख्यमंत्री का स्वागत समारोह-सह- आॅल चिकि प्रमण्डलीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उपरोक्त बातें कही।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब-जब केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी, आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में आदिवासी नेता करिया मुण्डा को देश के सर्वोच्च पंचायत लोस का उप सभापति प्रथम मर्तबा बनाया गया। उन्होंने कहा संताल भाषा को आठवीं अनुसूची में लाने का कार्य भी भाजपा के नेतृत्व में बनी सरकार ने किया। झारखण्ड के आदिवासी नेता संताल लिपि और संस्कृति को खत्म कर देना चाहते हैं। आदिवासियों की अपनी लिपि, अपनी भाषा ही नहीं रहेगी तो फिर उनकी संस्कृति कैसे बची रह सकती है। उन्होंने कहा सिदो कान्हू, चांद भैरव व फूलो झानों की शक्तियों को खत्म करने का कुचक्र रचा गया। विदेशी ताकतों ने संताल संस्कृति को तोड़ने का काम किया। सरकार ने धर्मांतरण का कानून बनाकर वैसे संस्थाओं को खबरदार करने का काम किया जो धर्म का नंगा नाच खेल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा एक धार्मिक संगठन द्वारा आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था जिसे शिकारीपाड़ा की जनता ने नेस्तनाबूद कर दिया। खुली चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा यदि बलपूर्वक धार्मिक अंधविश्वास लादने का प्रयास आदिवासियों के बीच किया गया तो उसकी खैर नहीं। कहीं भी यदि ऐसा देखा जाता है तो इसकी सूचना सीधे जिला व पुलिस प्रशासन को दंें। होटवार जेल उनके लिये ही बनाए गए हैं। वे जेल भी जाऐंगे और एक लाख का जुर्माना भी भरेंगे। इस अवसर पर सूबे की समाज कल्याण मंत्री डाॅ लुईस मराण्डी ने कहा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, काॅग्रेस व अन्य दल संताल परगना को राजनीतिक चारागाह की तरह देखते हैं। वोट मिल गया फिर आदिवासियों से उनका कोई लेना-देना नहीं रह जाता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भाजपा संताल परगना प्रमण्डलीय सह प्रभारी रमेश हांसदा, आदिवासी संताल भाषा आॅल चिकि लिपि शिक्षा अभियान सेवा ट्रस्ट के आनन्द मुर्मू, बाबूधन सोरेन, कृला बेसरा, कामेश्वर हांसदा, रवि लाल कोल, हीरा लाल कोल, चुड़ली मुर्मू, प्रमीला हेम्ब्रम, सकोदी बास्की, वसंती हेम्ब्रम व प्यारी हेम्ब्रम को इस आयोजन के लिये बधाई दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कक्षा एक से कक्षा पाँच तक आॅल चिकि भाषा में पढ़ाई प्रारंभ कर दी गई है। इाईयर एजुकेशन में भी आॅल चिकि को लाने का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने कहा झामुमों नेता हेमंत सोरेने सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। वे क्या जानें आदिवासियों का दर्द। खुद के बारे में कहा कि उनके पिता एक मामूली मजदूर थे। उन्होंने खुद मजदूरी की है। जेपी आन्दोलन में कूदने के बाद उन्होंने राजनीति में मेहनत कर इस स्थान को प्राप्त किया है। मजदूरों, गरीबांे की बात वे जितना जान सकते हैं हेमन्त कभी नहीं जान सकते। हेमन्त पर पलटवार करते हुए कहा कि आदिवासियों के बीच भाजपा के विरुद्ध झूठा प्रोपगंेडा फैलाया जा रहा है। भाजपा आदिवासियों की जमीन को हड़प लेगी। इन साढ़े चार वर्षों में कोई कह दे कि एक इंच भी जमीन किसी की हड़पी गई हो। 

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