पूर्णिया : शहर को ODF करने को ले निगम पदाधिकारी हैं बेकरार, पार्षदों में मचा है रार - Live Aaryaavart

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बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

पूर्णिया : शहर को ODF करने को ले निगम पदाधिकारी हैं बेकरार, पार्षदों में मचा है रार

- नगर निगम परिसर नहीं हो सका ओडीएफ, शहर कैसे होगा शौचमुक्त : सरिता राय

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कुमार गौरव । पूर्णिया : एक ओर जहां नगर निगम द्वारा शहर को ओडीएफ घोषित कराने को ले एड़ी चोटी एक की जा रही है वहीं दूसरी ओर नगर निगम परिसर ही अबतक शौचमुक्त नहीं हो सका है। दरअसल बिहार सरकार द्वारा नगर निगम क्षेत्र को शौचमुक्त करने के लिए एक विहित प्रपत्र में प्रतिवेदन समर्पित करने को ले पार्षदों में रार मचा है। पार्षदों को प्रपत्र भरकर शौचमुक्त शहर बनाने को ले अनुशंसित करना है। जिस पर आपत्तियों का दौर तेज हो चुका है। इसी क्रम में वार्ड नंबर 22 की पार्षद सरिता राय समेत अन्य पार्षदों ने अपनी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन बिंदुओं पर विहित प्रपत्र मांगा है, पूर्णिया नगर निगम उस पर खड़ा नहीं उतरता है। पार्षद ने कहा कि नगर निगम परिसर में कर्मियों को शौच के लिए शौचालय तक मुहैया नहीं कराया गया है। इसके साथ ही उन्होंने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि नगर निगम क्षेत्र में 30 फीसदी आबादी गैर मजरूआ, खासमहल, बिहार सरकार, सड़क किनारे एवं अन्य सरकारी जमीनों पर बसी है। विहित प्रपत्र का जवाब देते हुए उन्होंने नगर निगम की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिह्न लगाया। सरिता राय ने नगर निगम पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि नगर निगम खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए क्रियाशील नहीं है। यही कारण है कि आज भी वार्ड के कई खुले मैदानों में एवं उसके इर्द गिर्द खुले में शौच किया जा रहा है और हमारे पदाधिकारी इन तमाम बातों से शायद कोई इत्तेफाक नहीं रखते। 

...आईएचएसडीपी योजना की निकली हवा : 
पार्षद ने कहा कि वर्ष 2013-14 में 1700 आवास आईएचएसडीपी योजना के तहत स्वीकृत हुआ था। जिसके तहत लाभुकों को आवास के साथ शौचालय निर्माण का भी प्रावधान था और निगम ने इसके लिए बकायदा 38 हजार 400 रूपए प्रति लाभुक आवंटन भी कराया था। लेकिन लाभुकों को शौचालय निर्माण की राशि आजतक प्राप्त नहीं हो पाई है। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय और यूरिनल का भी मुद्दा उठाया और कहा कि सार्वजनिक जगहों पर शौचालय नहीं बनाए जाने से निगम क्षेत्र शौच से मुक्त किस प्रकार घोषित किया जा सकता है। वार्ड पार्षद ने स्वच्छता अभियान में भी विसंगतियों को उजागर करते हुए कहा कि लाभुकों को शौचालय निर्माण के लिए पहली किस्त की राशि उपलब्ध कराई गई लेकिन दूसरी किस्त को कागजी प्रक्रिया के नाम पर लटका दिया गया है। उन्होंने सरकार द्वारा जारी पत्र को राजनीतिक फायदे के उद्देश्य से उठाया गया कदम करार दिया है। उन्होंने नगर आयुक्त विजय कुमार सिंह को पत्र के माध्यम से बताए गए मुद्दे पर बिंदुवार कार्रवाई करने की मांग की है। 

... शौचालय निर्माण के 2000 आवेदन धूल फांक रहे : 
पार्षद सरिता राय ने कहा कि एक वर्ष पूर्व नगर निगम के सभी 46 वार्डों में शिविर लगाकर 2000 आवेदनों को संरक्षित किए गए थे। शौचालय निर्माण को ले बाकायदा वाद्ययंत्र से प्रचार प्रसार भी कराया गया था लेकिन ये तमाम आवेदन आज निगम कार्यालय में धूल फांक रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछेक को छोड़ दें तो अधिकांश आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की प्रक्रिया पिछले दो तीन वर्षों से तो जारी है लेकिन इसे आजतक अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है। जिस कारण शहर के कई लाभुक खेत खलिहान, रेलवे लाइन व सड़क किनारे खुले में शौच को विवश हैं। ऐसे में शहर को ओडीएफ घोषित करने की कवायद बेमानी है। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र अंतर्गत बड़े बड़े माॅल व मार्केट का निर्माण हो रहा है। जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या महिला पुरूष खरीदारी को पहुंचते हैं। लेकिन इन मॉल या फिर मार्केट के इर्द गिर्द एक भी यूरिनल या फिर सार्वजनिक शौचालय के प्रबंध नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों का राजस्व देने वाला शहर का भट्‌ठा बाजार, खुश्कीबाग, कचहरी रोड, खीरू चौक समेत कई अन्य बाजार हैं लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं है। जो कि नगर निगम की कार्यशैली व विवशता को उजागर करने को काफी है। ऐसे में आेडीएफ की परिकल्पना कैसे और क्यों की गई है ? 

...इन बिंदुओं पर उठ रहे सवाल : 
- प्रपत्र के क्रम संख्या (ख) खासमहल, बिहार सरकार, हिंद केसरी, पथ निर्माण विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं अनाबाद प्रकृति की जमीन पर फूस, टाटी एवं टीन का घर बनाकर वहां निवास कर रहे लोगों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो वैसे लोग किस आधार पर शौचालय की सुविधा से आच्छादित हैं 
- क्रम संख्या (ग) के संदर्भ में पार्षद का कहना है कि नगर निगम पूर्णिया के द्वारा शौचालय या यूरिनल का निर्माण किया ही नहीं गया है तो उसे किलोमीटर के दायरे में लाया जाना है अपनेआप में बड़ा सवाल है 
- क्रम संख्या (घ) के संदर्भ में सवाल उठाया गया है कि वार्ड 22 के व्यावसायिक क्षेत्र के एक किलोमीटर के दायरे में निगम द्वारा निर्मित एक भी शौचालय उपलब्ध नहीं है 
- क्रम संख्या (च) के संदर्भ में कहा गया कि नगर निगम पूर्णिया के द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह जो वार्ड 22 में कार्यरत है उसके कार्यक्रमों की कोई भी जानकारी निगम द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जाती है। न ही समूह की बैठक में वार्ड पार्षद या स्थानीय लोगों को आमंत्रित किया जाता है 

...सीएम व मंत्री को भेजी गई हैं आपत्ति की कॉपी : 
पार्षद सरिता राय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जहां कई सवाल दागे हैं वहीं समुचित कार्रवाई के लिए उन्होंने अपने आवेदन को सीएम नीतीश कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुरेश शर्मा, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव व प्रमंडलीय आयुक्त को भी प्रेषित किया है। उन्होंने इस दिशा में समुचित कार्रवाई की भी मांग की है। ताकि शहर के आम आवाम को सुविधाएं नसीब हो सके।

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