शेल्टर होम की पीड़ित लड़कियों को न्याय मिले; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा दें - मीना तिवारी - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 8 मार्च 2019

शेल्टर होम की पीड़ित लड़कियों को न्याय मिले; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा दें - मीना तिवारी

युद्धोन्माद के खिलाफ और शेल्टर होम की पीड़ित लड़कियों के न्याय के लिए ‘महिला हड़ताल’पटना में बुद्धा स्मृति पार्क  कारगिल चैक तक निकला मार्चअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ऐपवा, आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ता पूरे बिहार में उतरे सड़कों पर
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08 मार्च, पटना। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा है कि विश्वयुद्ध के समय जब दुनिया युद्ध में झोंक दी गई थी, तब भी महिलाओं ने लड़ाई की बजाए रोटी की मांग की थी। आज फिर एक बार नरेंद्र मोदी युद्धोन्माद फैलाने में लगे हैं। मीना तिवारी ने आगे कहा कि हमारे ही घरों के बेटे, पति, पिता युद्ध के मैदान में उतरते हैं; सीमा पर लड़नेवाले किसान घरों के बेटे होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज एक बार फिर हम यह दुहराना चाहते हैं कि आज भी औरतें युद्ध के विरुद्ध अमन और शांति के पक्ष में हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में महिलाओं पर अन्याय व अत्याचार की घटनाओं और मुज़फ्फरपुर शेल्टर होम कांड में नीतीश को भी जांच के दायरे में लाने की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं। नैतिकता का यह तक़ाज़ा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा दें। शेल्टर होम की पीड़ित लड़कियों की यह पुकार है कि मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की लड़कियों को न्याय दिलाने तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित महिला हड़ताल में हजारों की तादाद में महिलाएं, छात्राएं अज पूरे बिहार में सड़क पर उतरी. पटना में सैकड़ों महिलाएं-छात्राएं बुद्धा स्मृति पार्क से कारगिल चैक तक मार्च निकाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ऐपवा द्वारा आयोजित महिला हड़ताल को आइसा तथा आरवाइए भी ने समर्थन दिया. साथ ही शहर की महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में हड़ताल में हिस्सा लिया. इसका नेतृत्व ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, प्रो. भारती एस कुमार, अनिता कुमारी, मधु, अनुराधा आदि महिला  नेताओं ने किया . हड़ताल के दौरान महिलाएं नीतीश कुमार के इस्तीफे, बिहार के सभी शेल्टर होम की जांच कराने, शेल्टर होम कांड की राजनीतिक संरक्षण की जांच कराने आदि की मांग कर रही थीं.

महिला हड़ताल में पटना के बुद्ध स्मृति पार्क से डाकबंगला चैराहा तथा फ्रेजर रोड के रास्ते जुलूस निकाला गया तथा कारगिल चैक पर सभा का आयोजन किया गया. सभा को कई महिला नेत्रियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया. मार्च का नेतृत्व ऐपवा सभा की शुरुआत में हिरावल की प्रीति प्रभा के नेतृत्व में नेहा, निक्की और पूनम ने गोरख पांडेय का मशहूर गीत ‘गुलमिया अब हम नाहीं बजइबो’ प्रस्तुत किया। ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि आज पूरे बिहार में महिलायें नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग पर सड़कों पर है. इसमें आशाकर्मियों व अन्य कामकाजी महिला. संगठनों की भी बड़ी भागीदारी है. एक तरफ जहां नीतीश शासन में बच्चियों का यौन शोषण रहा है, वहीं दूसरी ओर स्कीम वर्कर महिलाओं के साथ भी दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है. हड़ताल मे आशाकर्मियों, रसोइया, आंगनबाड़ी व पीएमसीएच की नर्सों ने भी हिस्सा लिया. अपने संबोधन में प्रो भारती एस कुमार ने कहा कि केंद्र और राज्य की वर्तमान सरकारों द्वारा महिलाओं के नाम पर सिर्फ राजनीति की जा रही है. दरअसल ये सरकारें समाज में महिलाओं को निचले स्तर पर धकेलने में लगी है. उनके पास महिलाओं के लिए किसी प्रकार का इज्जत और सम्मान नहीं है. ये महिलाओं को बराबरी पर नहीं देखना चाहती.

सभा को संबोधित करते हुए आईसा के राष्ट्रीय महासचिव संदीप सौरभ ने कहा कि इस सरकार में एक तरफ महिलाओं पर हिंसा और बलात्कार की घटनाएं बेतहाशा बढ़ रही है, नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है, महिलाओं के शिक्षा और स्वास्थ्य का इंतजाम नहीं है. दूसरी तरफ सरकार इनके नाम पर राजनीति करने में बड़ी बेशर्मी के साथ तल्लीन है.  अपने संबोधन में आरवाइए के राज्य सचिव सुधीर ने कहा कि ये शासक वर्ग महिलाओं के नाम पर राजनीति करने के साथ-साथ उनके घर के बेटे, भाई, पिता सैनिकों के के शहादत पर भी वोट बैंक की राजनीति कर रही है. हम मांग करते हैं कि सैनकों की शहादत पर राजनीति बंद हो. साथ ही बिहार की मासूम, गरीब-दलित, अनाथ बच्चियों पर अन्याय, बलात्कार और हिंसा के मामले में सरकार अपनी जबाबदेही लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना इस्तीफा दें. आंगनबाड़ी नेता गीता देवी ने भी सभा को संबोधित किया. इस अवसर पर अल्का वर्मा, ईज़ाद संस्था की शमीमा परवीन, विभा गुप्ता, माधुरी गुप्ता, पूनम कुमारी, प्राची वर्मा, रेखा मेहता, मधु मिश्रा, उर्मिला कर्ण, केडी विद्यार्थी, मंजु यादव, मीना देवी, रेखा देवी, साधुशरण, शशिरंजन, विकास यादव, नीतू, विद्या, नीलम देवी, आबदा ख़ातून, शिशि देवी आदि मौजूद थीं। पटना के अलावा भोजपुर, जहानाबाद, अरवल, दरभंगा आदि जिला केंद्रों पर भी हड़ताल आयोजित किया गया.

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