भदोही : स्वामी सरनानंद के दर्शन को उमड़ा आस्थावानों का शैलाब - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

रविवार, 28 अप्रैल 2019

भदोही : स्वामी सरनानंद के दर्शन को उमड़ा आस्थावानों का शैलाब

एक सच्चा संत ही शिष्य को गुरु से मिला सकता है: स्वामी सरनानंद भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया 
swami-sahjanand-in-bhadohi
भदोही (सुरेश गांधी) । शहर के नयी बाजार मथु(रापुर स्थित कालीन निर्यातक रामचंन्द्र यादव के परिसर में आयोजित ‘सद्गुरु दर्शन‘ में गढवाघाट के स्वामी सरनानंद जी महराज का बड़ी संख्या में आस्थावानों ने शीश नवाकर पूजन किया। स्वामी जी ने भक्तों को दिल खोलकर हर क्षेत्र में तरक्की व मंगल कामना का आर्शीवाद दिया। इस दौरान विभिन्न गायकों ने भजन संकीर्तन करके समारोह को न सिर्फ भक्तिभाव से सराबोर किया, बल्कि ज्ञद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। स्वामी जी की मंगल आरती कालीन निर्यातक रामचंद्र यादव ने की। अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।  सद्गुरु दर्शन के दौरान स्वामी सरनानंद ने कहा कि एक सच्चा संत ही अपने शिष्यों को गुरु से मिला सकता है। क्योंकि गुरु के बिना किसी भी शिष्ट की गति नहीं हो सकती। इसलिए शिष्यों को गुरु से कभी भी विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन सुख-दुख का सुमेल है। घर-घर में समस्याएं हैं। सुख तो सत्संग में ही मिलता है। “मस्ती के लुटे खजाने सतगुरु के दरबार में, क्यों खुशी ढूंढता पगले तू नश्वर संसार में। सत्संग में आकर आत्मबल बढ़ता है। संत रास्ता बताते हैं और सावधान भी करते हैं। यह शरीर तो नश्वर है मिटने वाला है। संतों की बाणी न जाने कब आपका उद्धार कर दे। इसलिए सत्संग में आओ और आनंद लेते रहो।  स्वामीजी ने बताया कि सारा जग परमात्मा के कारण ही है। जहां वास्तव आनंद शांति होती है, वहां हम पहुंच ही नहीं पाते। स्वामीजी ने कहा कि प्रतिभा व्यक्ति के अंदर छिपी होती है। जरूरत है उसे पहचाने की। विरासत में संपत्ति तो मिल सकती है, प्रतिभा नहीं। हमें अपना चिंतन उत्कृष्ट रखना है। जिससे समय में हम आदर्श उपस्थित कर सकें। उन्होंने कहा कि ’जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’। संसार का कोई भी रिश्ता हमारे इतना करीब नहीं जितना ईश्वर से हमारा है। कहा कि यदि समभाव से देखा जाये तो ईश्वर ही हमारे सर्वाधिक करीब हैं। तभी तो यजुर्वेद में कहा गया है विश्वानिदेव अर्थात ईश्वर सब आचार विचारों को जानने वाला है। वेदों की वाणी में ऊं विश्वानि देव सविदुरितानि परासुव यद्रभ्रंद तन्नासुव हे सब कुछ जानने वाले ईश्वर हमारी बुराईयों को दूर कर हमें सन्मार्ग पर चलाईये। इस मौके पर आश्रम के अनुयायियों सहित कालीन निर्यातक उमेश गुप्ता, श्यामनारायण यादव, दिलीप जायसवाल, रतन यादव, राजीव गुप्ता, विनय उमरवैश्य, सुरेन्द्र यादव, अधिवक्ता तेजबहादुर यादव, रामसहाय जायसवाल आदि मौजूद रहे। अंत में सद्गुरु दर्शन कार्यक्रम की सफलता के लिए रामचंद्र यादव के छोटे पुत्र विधान चंद्र यादव ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। 

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...