बेगूसराय : संस्कार ने 17 साल के बाद संस्कृति को बुलाया - Live Aaryaavart

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सोमवार, 13 मई 2019

बेगूसराय : संस्कार ने 17 साल के बाद संस्कृति को बुलाया

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बेगूसराय, कुमार प्रद्योत। भारतीय फिल्म उद्योग मुंबई में अभिनय के क्षेत्र में तेजी से उभरने वाला नाम है सुशांत सिंह राजपूत जो अभी अभिनय की दुनियां में अपना अस्तित्व तलाश रहे हैं। सुशांत सिंह राजपूत मूल रूप से पूर्णिया जिला के बड़हड़ा कोठी प्रखंड के मलडीहा गांव के निवासी हैं,इनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना में संपन्न हुई और उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चले गए शेष मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी इन्होंने दिल्ली में ही संपन्न की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने अपना रुख मुंबई की ओर किया और मुंबई में रहते हुए अभिनय में अपना कैरियर तलाशना शुरू किया एवं जल्द ही बॉलीवुड मुंबई में एक अभिनेता के रूप में खुद को स्थापित करने में सफल रहे। बहरहाल मैं आपको आगे बताता चलूं कि किसी ज़माने में किसी अपनों ने खगड़िया जिला के चौथम प्रखंड अंतर्गत बोरनय गांव के "विषहरी" स्थान में इनका मुंडन कबूल लिया होगा,यहाँ इनका ननिहाल भी है, उसी मुंडन संस्कार की वजह से सुशांत सिंह राजपूत विगत 2 दिनों से अपने गांव और ननिहाल में रह रहे हैं,जहां इनका मुंडन संस्कार होना है आज यानी 13 मई को। एक कला और संस्कृति के कलाकार को हमारे संस्कार ने 17 साल के बाद अपने गांव वापस आने पर मजबूर कर दिया जहां वर्षों से इनके बचपन की बिछड़ी हुई यादों के बीच जीने वाले परिजन,यार दोस्तों और गांव की मिट्टी को इनका इंतजार था। इनके आते ही इलाके में सनसनी फैल गई और इनके चाहने वाले धीरे-धीरे करके इनके आसपास इकट्ठा होने लगे और भीड़ बढ़ती गई जहां तक संभव हो सका इन्होंने अपने चाहने वालों को नाराज नहीं किया। अपने व्यस्ततम जिंदगी से अपने संस्कार के लिए,अपने परिजनों के लिए,अपने दोस्तों के लिए इन्होंने समय निकाला और मुंडन संस्कार को संपन्न करते हुए आज ही पटना से अपने गंतव्य की ओर लौट जाएंगे।इंसान चाहे कितनी भी ऊंचाई पर क्यों न चले जाए लेकिन अपनी संस्कृति और संस्कार को भूल पाना मुश्किल है खास करके उनके लिए जो अपने गांव की मिट्टी से जुड़े हुए हैं,अपनों से जुड़े हुए हैं,अपनों के प्यार से जुड़े हुए हैं।  जो अपनी संस्कृति और संस्कार से जुड़े रहते हैं उनके जीवन में सफलता हमेशा उनकी कदम चूमती है और वह मुकद्दर के बादशाह होते हैं।

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