बिहार : नालंदा में नीतीश और मांझी की प्रतिष्ठा दाव पर - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 17 मई 2019

बिहार : नालंदा में नीतीश और मांझी की प्रतिष्ठा दाव पर

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पटना 16 मई, बिहार में इस बार के लोकसभा चुनाव में सातवें और अंतिम चरण में नालंदा सीट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की प्रतिष्ठा दांव पर है। बिहार में सातवें तथा अंतिम चरण के लिये 19 मई को नालंदा में मतदान होना है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा संसदीय सीट पर पूरे देश की नजरें टिकी हुयी है। इस बार सियासी लडाई काफी रोचक होगी। महागठबंधन की ओर से हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) की टिकट पर अशोक कुमार आजाद प्रत्याशी बनाये गये हैं वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के निवर्तमान सांसद कौशलेन्द्र कुमार को प्रत्याशी बनाया है। नालंदा की सियासी लड़ाई नीतीश बनाम मांझी की बन गयी है। नालंदा में मुद्दे की जगह जातीय गोलबंदी ही हावी दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा में काफी विकास के कार्य किये हैं । जदयू प्रत्याशी कौशलेन्द्र कुमार प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वोट मांग रहे हैं वहीं महागठबंधन उम्मीदवार अशोक कुमार आजाद जातियों को गोलबंद करने के साथ बेरोजगारी, नोटबंदी और राजग की ओर से पिछले चुनाव में किए गए वादे को पूरा नहीं किए जाने के मुद्दे को लेकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में लगे हैं। कुर्मी बहुल नालंदा लोकसभा सीट पर मुस्लिम और यादवों की भी अच्छी संख्या है। यादव, पासवान,कोईरी और मुस्लिम यहां के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, हालांकि इस बार यहां के युवा वोटर जात-पात नहीं विकास के नाम पर वोट करने की बात कह रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार के चुनाव में जदयू के कौशलेंद्र कुमार एवं महागठबंधन के अशोक कुमार आजाद के बीच सीधी टक्कर है लेकिन, पिछड़े वर्ग के वोटर तुरुप के पत्ते साबित हो सकते हैं। वे जिस करवट बैठें, उसका पलड़ा निश्चित रूप से भारी हो जाएगा। दोनो पार्टियां अतिपिछड़ी जातियों को गोलबंद करने में जुटी है। इस चुनाव में जातीय सेंधमारी होने का खतरा बना हुआ है । देखना दिलचस्प होगा कि हम प्रत्याशी अशोक कुमार आजाद जदयू के कौशलेंद्र कुमार का विजयरथ को रोक पाते हैं या जदयू का विजय का सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।

नालंदा विश्वविद्यालय की वजह से प्रसिद्ध इस सीट पर 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद भाजपा नीतीश के गढ़ में सेंध नहीं लगा सकी थी। पिछली बार राजग में हुई सीटों के बंटवारे में नालंदा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को मिली थी और पार्टी ने यहां से सत्यानंद शर्मा को टिकट दिया था। जदयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार ने उन्हें नौ हजार 627 मतो के अंतर से पराजित किया था। पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष रंजन सिन्हा तीसरे नंबर पर रहे। पिछली बार जदयू ने राजग से अलग होकर चुनाव लड़ा था। नालंदा लोकसभा क्षेत्र में नीतीश कुमार का दबदबा है और यही वजह है कि मोदी लहर के बावजूद जदयू पिछली बार भी यह सीट बचाने में कामयाब हो गई थी। वर्ष 1957 से अस्तित्व में आने के बाद लंबे समय तक नालंदा सीट कांग्रेसियों का गढ़ रहा। वर्ष 1957 के आम चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर कैलाशपति सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद 1962,1967 और वर्ष 1971 में लगातार तीन बार कांग्रेस की टिकट पर सिद्देश्वर प्रसाद निर्वाचित हुये। वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद बीरेंद्र प्रसाद ने भारतीय लोक दल (बीएलडी) की टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद वाम दल सशक्त हुआ। वर्ष 1980 और वर्ष 1984 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी विजय कुमार यादव ने जीत हासिल की। वर्ष 1989 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और राम स्वरूप प्रसाद ने सफलता हासिल की। वर्ष 1996 और 1998 में जार्ज फर्नांडीस समता पार्टी के टिकट पर और वर्ष 1999 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीते। 2004 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस सीट से जीतकर संसद पहुंचे। हालांकि 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में जदयू की टिकट पर रामस्वरूप प्रसाद सासंद चुने गये। वर्ष 2009 और 2014 में लगातार दो बार जदयू से कौशलेंद्र कुमार सासंद चुने गए। वर्ष 1999 से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनाव में जदयू ही यहां से जीत हासिल करती रही है। इस कारण नालंदा संसदीय क्षेत्र को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सुरक्षित दुर्ग माना जाता है। नालंदा संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की सात सीटें नालंदा, अस्थावां, हरनौत, इस्लामपुर, राजगीर(सु), बिहारशरीफ और हिलसा आती है। वर्ष 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में इन सात सीटों में से पांच पर जदयू और एक-एक सीटों पर भाजपा और राजद को जीत मिली। इनमें नालंदा से श्रवण कुमार (जदयू) ,अस्थावा से जीतेन्द्र कुमार (जदयू) ,हरनौत से हरि नारायण सिंह (जदयू) , इस्लामपुर से चंद्रसेन प्रसाद (जदयू) ,राजगीर (सु) से रवि ज्योति कुमार (जदयू) , बिहारशरीफ से डा.सुनील कुमार (भाजपा) और हिलसा से अतरी मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव (राजद) विधायक हैं। सतरहवें आम चुनाव (2019) में नालंदा संसदीय सीट से कुल 35 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें जदयू , हम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा), शिवसेना ,और 12 निर्दलीय समेत 35 उम्मीदवार शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 21 लाख 02 हजार मतदाता हैं। इनमें करीब 11 लाख 14 हजार पुरुष और नौ लाख 88 हजार महिला शामिल हैं जो 19 मई को होने वाले मतदान में 35 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

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