पूर्णिया : बिग कंट्रोवर्सी, डस्टबिन खरीद मामला... - Live Aaryaavart

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शनिवार, 25 मई 2019

पूर्णिया : बिग कंट्रोवर्सी, डस्टबिन खरीद मामला...

नगर निगम में बढ़ गई राजनीतिक रस्साकसी : मेयर ने कहा विभागीय आदेश पर हर हाल में 30 जून तक बांटा जाएगा डस्टबिन तो डिप्टी मेयर ने कहा हो उच्च स्तरीय जांच 
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कुमार गौरव । पूर्णिया : नगर निगम पूर्णिया के सभागार में मेयर सविता देवी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम (एनजीटी) की बैठक सोमवार को काफी गहमा गहमी भरे माहौल में हुई। जिसमें डिप्टी मेयर विभा कुमारी ने नगर निगम की कार्यशैली पर ताबड़तोड़ सवालों का बौछार कर निगम के अराजक माहौल को पटरी पर लाने का आग्रह मेयर व नगर आयुक्त विजय कुमार सिंह से किया। इस बैठक में डिप्टी मेयर का मुखर होना कोई अचानक नहीं था बल्कि उनके कार्यकाल में जिस डस्टबिन की निविदा (टेंडर) को घोटाला बताया गया था उसी मामले में अब नया मोड़ आ गया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर मामले को तूल दे दिया है कि आखिर किस कारण से उनके कार्यकाल में खरीदे गए 70 हजार डस्टबिन को बेकार व दोयम दर्जे का करार दिया गया था और यदि सबकुछ साफ नहीं हुआ तो उन्होंने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने की बात कही है। लिहाजा, पर्दा उठना अभी बाकी है लेकिन पर्दे के पीछे जो खेल चल रहा है उसमें राजनीतिक रस्साकसी के सिवाय कुछ भी फिलहाल नजर नहीं आता है। हालांकि डिप्टी मेयर ने पलटवार किया है और मेयर के कार्यकाल में ही डस्टबिन घोटाले को अंजाम देने के आरोप मढ़े जा रहे हैं। जिससे नगर निगम में राजनीतिक उबाल की संभावना के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं इस पूरे मामले में मेयर सविता देवी ने अपना पक्ष रखते हुए इसे महज राजनीतिक स्टंट करार दिया है। उनका कहना है कि जब पूर्व मेयर के कार्यकाल में डस्टबिन के टेंडर हुए और खरीदारी तक हुई तो इसमें मेरी संलिप्तता कहां है। मैंने तो बस विभागीय आदेश का अनुसरण किया है और 30 जून तक हर हाल में घर घर डस्टबिन बांटने को लेकर बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि क्रय समिति के सदस्य के तौर पर पूर्व मेयर बाकायदा दल में शामिल थी। ऐसे में उन पर अब आरोप मढ़ा जाना न्यायसंगत नहीं है। बता दें कि डस्टबिन की खरीदारी को लेकर 10 फरवरी 2018 को निविदा प्रकाशित की गई थी। जिसमें टेंडर करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी से बढ़ाकर 06 मार्च 2018 कर दी गई थी। 

...डिप्टी मेयर ने बैठक पर ही उठाया सवाल : 
डिप्टी मेयर विभा कुमारी ने ज्ञापांक 393 दिनांक 17 मई 2019 से संबंधित पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यह बोर्ड की बैठक है या अनौपचारिक बैठक है। यदि यह बोर्ड की बैठक है तो सर्वप्रथम यह बताने का कष्ट करें कि क्या वित्तीय वर्ष 2019-20 का बजट पारित है या नहीं। अगर नहीं है तो पहले बजट की बैठक होनी चाहिए थी न कि ठोस अवशिष्ट से संबंधित। अगर यह बोर्ड की बैठक है तो पूर्व की बोर्ड की बैठकों का क्रियान्वयन से संबंधित छायाप्रति संलग्न क्यों नहीं है। यही नहीं उन्होंने कहा कि क्या सभी 46 वार्डों में डोर टू डोर कचरा का संग्रहण नहीं हो रहा है। ऐसी सूरत में हर घर सूखा और गीला कचरा डस्टबिन वितरण किस आधार पर किया जा सकता है। डोर टू डोर कचरा का संग्रहण कर इसका भंडारण कहां होगा। 

...डिप्टी मेयर के इन सवालों पर गरमाया है निगम का माहौल : 
- नगर निगम पूर्णिया के भंडार में संग्रहित जो 4 तरह के डस्टबिन क्रमशः 240 लीटर, 1100 लीटर व 10-20 लीटर का है। जिसके पृथककरण की बात हो रही है उसके संदर्भ में वितरण के लिए पत्र में आखिर उल्लेख क्यों नहीं है ? 
- 1100 लीटर का ग्लोबनाइज्ड डस्टबिन जो शहर में कई जगहों पर दिखाई पड़ रहा है वह बिना बोर्ड की बैठक के कैसे वितरित हो गया और जब वितरण हो गया तो 10-10 लीटर वाले हरे नीले रंग के डस्टबिन को वितरण के लिए आखिर क्यों बोर्ड की बैठक आहूत की गई है? यह किसी खास दिशा और दशा को प्रभावित करने का संकेत तो नहीं ? 
- 1100 लीटर का ग्लोबनाइज्ड डस्टबिन जो वितरण किया गया है उसकी जांच क्यों नहीं की गई? 
- बिना किसी बैठक के पूर्व से आपूर्ति की गई डस्टबिन की कुछ राशि भुगतान कर दिया गया है और 1100 लीटर का डस्टबिन खास जगहों पर लगाया जाना और डस्टबिन से संबंधित भुगतान करना डस्टबिन घोटाले को स्पष्ट रूप से साबित नहीं करता है, तकनीकी विषेषज्ञों से इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? 
- डिप्टी मेयर ने कहा कि मेरे मेयर रहते हुए डस्टबिन महाघोटाला होने का आरोप मढ़ा गया था। जिसमें नगर आयुक्त, मेयर एवं पूर्व डिप्टी मेयर ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि डस्टबिन निविदा में मैंने महाघोटाला किया है। डिप्टी मेयर ने पूछा कि डस्टबिन महाघोटाला मेरे कार्यकाल में हुआ था तो वैसे सभी डस्टबिन को वापस क्यों नहीं किया गया? 
- जबकि नियमतः आपूर्ति किए गए डस्टबिन की गुणवत्ता की जांच के उपरांत ही भुगतान किया जाना था और मेरे कार्यकाल में डस्टबिन आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान नहीं किया गया था। आखिर जांच से पूर्व ही बोर्ड के पदाधिकारी एवं कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा किस आधार पर मेरे कार्यकाल के बोर्ड को डस्टबिन महाघोटाला का आरोपी बना दिया गया?
- 1100 लीटर के डस्टबिन की जांच तकनीकी विशेषज्ञों से क्यों नहीं कराई गई और बिना किसी बोर्ड की सहमति के किस आधार पर सिर्फ 1100 लीटर वाले डस्टबिन का वितरण किया गया? 

...30 जून तक सभी घरों में कर दिया जाएगा डस्टबिन का वितरण : 
शहर में कचरा निस्तारण के लिए पूर्व मेयर के कार्यकाल में ही डस्टबिन की खरीदारी हुई थी। इसे लेकर मेरे ऊपर जो भी आरोप मढ़े जा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं। विभागीय आदेश पर हर हाल में 30 जून तक सभी 35 हजार घरों में 70 हजार डस्टबिन का वितरण कर दिया जाएगा।  : सविता देवी, मेयर, नगर निगम पूर्णिया।

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