बिहार : घर में खेलने वाले खेल को बच्चे खेलते हैं आंगनबाड़ी केन्द्र में - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

बिहार : घर में खेलने वाले खेल को बच्चे खेलते हैं आंगनबाड़ी केन्द्र में

आंगनबाड़ी केन्द्र में खिलौना के अभाव में ईंट को बच्ची बनाकर खेलते हैं बच्चेबच्चों पर  केन्द्र की सेविका और सहायिका का ध्यान नहीं तो ध्यान किधर है?पटना के डीएम कुमार रवि साहब सुधार तो कीजिए
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आंगनबाड़ी केन्द्र में सरकार के द्वारा प्रदत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण बच्चे खेलते रहते हैं. उस तरह के खिलौने से खेलते हैं जो गांवघर में बच्चे खेलते हैं.इस तरह फर्क करना मुश्किल है कि घर है कि आंगनबाड़ी केन्द्र ? दर्जन भर छोटी लड़कियां हैं. तीन बच्चियों के हाथ में ईंट है.जो कपड़े से कमीज बनाकर बच्चे शरीर में पहनने हैं उससे ईंट को ढंक कर मासूम बच्ची की तरह बच्ची को टहलाकर खेल खेलती हैं. नौबतपुर, 12 जुलाई।  पटना जिले में है नौबतपुर. नौबतपुर ग्राम पंचायत को नौबतपुर  नगर पंचायत बना दिया है. इस नगर पंचायत के वार्ड नम्बर -8 में है वासुदेवापुरी मुसहरी. वार्ड नम्बर-8 की वार्ड पार्षद रीता देवी हैं. जो अपने कर्तव्य व अधिकार को पतिदेव के समक्ष गिरवी रख दी हैं. पतिदेव ही वार्ड को संभाले रहते हैं.परन्तु उनका ध्यान मुसहरी के सामने पूरब में मध्य विघालय की ओर जाता ही नहीं है. खैर, मध्य विघालय के द्वितीय तल पर है आंगनबाड़ी केन्द्र. इस केन्द्र में यहां के मुसहरी के महादलित मुसहर समुदाय के 10-11 बच्चे आते हैं. हालांकि आंगनबाड़ी केन्द्र में सरकार के द्वारा प्रदत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण बच्चे खेल खेल में कुछ सीख नहीं पाते  हैं. केंद्र में आए बच्चे उस तरह के खिलौने से खेलते हैं जो गांवघर में बच्चे खेलते हैं.इस तरह माहौल को देखकर फर्क करना मुश्किल है कि यह केंद्र है कि मुखिया जी का दलान.  आंगनबाड़ी केन्द्र में सरकार के द्वारा प्रदत  सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण बच्चे खेलते रहते हैं. उस तरह के खिलौने से खेलते हैं जो गांवघर में बच्चे खेलते हैं.इस तरह फर्क करना मुश्किल है कि घर है कि आंगनबाड़ी केन्द्र ? दर्जन भर छोटी लड़कियां हैं. तीन बच्चियों के हाथ में ईंट है.जो कपड़े से कमीज बनाकर बच्चे शरीर में पहनने हैं उससे ईंट को ढंक कर मासूम बच्ची की तरह बच्ची को टहलाकर खेल खेलती हैं. केन्द्र और राज्य सरकार का आदेश आंगनबाड़ी केन्द्र में

एक भवन जो 63 वर्गमीटर/650 वर्ग फूट से कम न हो तथा कमरे XX3 वर्गमीटर के होने चाहिए. बरामदा 6X1.5 वर्गमीटर होना चाहिए तथा वह बाधामुक्त होना चाहिए। खेल का मैदान, खेल सामग्री तथा बाल हितैषी खिलौने. साफ – सफाई, जल और स्वच्छता सुविधाएँ.  साफ और स्वच्छ रसोईघर – रसोई और स्टोर 6X3 वर्गमीटर होने चाहिए. बाल - हितैषी शौचालय – 2 होने चाहिए (2X3 वर्गमीटर)पहुँच के लिए ढलावदार सुविधाएँ. मजबूत तथा रिसावमुक्त छत वाला भवन.मजबूत खिड़कियाँ और दरवाजे.विद्युत कनेक्शन और सुविधा.फर्नीचर, पंखे, विस्तर. आंगनबाड़ी केन्द्रों में पहुंचने वाले बच्चे 3 साल से बगैर खिलौना खेल रहे हैं.पुराने टूटे फूटे खिलौने जो वर्षों पहले दिए गए थे वे केन्द्रों में जरूर दिख रहे हैं पर नए खिलौने कहां हैं, कब बंटेंगे कोई कुछ नहीं बता पा रहा है.  6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से उनके स्वास्थ्य व शिक्षा की सुविधा है. बच्चों की उम्र के लिहाज से उन्हें खेलने के लिए खिलौने भी उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान योजना में है.जो प्रति वर्ष आंगनबाड़ी केन्द्रों को दिए जाने हैं.जिले में संचालित 2265 आंगनबाड़ी केन्द्रों में कहीं भी कोई खिलौना तीन साल के दौरान नहीं पहुंच पाया है. योजना के अनुसार प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र में लगभग 1000 रुपए तक के खिलौने वितरण किए जाने हैं.खिलौना वितरण के लिए केन्द्र सरकार ने जिला महिला एवं बाल विकास विभाग को राशि का भी आबंटन करता है, बकायदा बाल्यावस्था की विभिन्न अवस्थाओं पर बच्चों की आवश्यकताओं की पहचान करने के लिए ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका के विषय में जानने के पश्चात् अब हम आंगनवाड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानेंगे, जो वह बच्चों , विशेष रूप से निर्धन और निम्न आय वर्ग की परिवारों में बच्चों के स्वास्थय और विकास के लिए निभा सकती है.

शिशुओं के प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर स्वास्थय, बाल पोषण विद्यालय शिक्षा तथा बच्चों के टीकाकरण में आंगनवाड़ी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. आंगनवाड़ी छोटे बच्चों की पोषण, स्वास्थय और शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवाएँ के कार्यक्रम के रूप में ग्राम स्तर पर सरकार द्वारा समर्थित एक केंद्र है. आंगनवाड़ी 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों, किशोर युवतियों, गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है. प्रत्येक आंगनवाड़ी लगभग 400-800 लोगों की जनसंख्या पर बनाई जाती है। जनसंख्या के आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक अथवा एक से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र हो सकते हैं। आंगनवाड़ी कायर्कर्त्ता तथा सहायिक आंगनवाड़ी केंद्र को चलाते हैं तथा स्वास्थय, शिक्षा, ग्रामीण विकास और अन्य विभागों के पधाधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए आईसीडीएस का क्रियान्वयन करते हैं. प्रत्येक 25 आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं के लिए एक आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक नियुक्त होती है जिसे मुख्य सेविका कहा जाता है, और जो आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता व सहायिका को कार्य के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करती है. आंगनवाड़ी छोटे बच्चों की आवश्यकताओं तथा देखभाल के बारे में जागरूकता फ़ैलाने का केंद्र भी हो।छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की टीकाकरण समस्त गर्भवती स्त्रियों के लिए प्रसव पूर्व देखभाल और टीकाकरण छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अनुपूरक पोषण गर्भवती और शिशुओं की देखभाल करने वाली स्त्रियों को अनूपूरक पोषण 15-45 वर्ष के आयु वर्ग की सभी महिलाओं के लिए पोषण और स्वास्थय शिक्षा गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्वक देखभाल तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल नए जन्मे शिशुओं तथा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल कुपोषण अथवा बीमारी के गंभीर मामलों को अस्पतालों, समुदाय स्वास्थय केन्द्रों अथवा जिला अस्पतालों (पोषण पुनर्वास केंद्र/नवजात शिशु गहन देखरेख यूनिट) को भेजना. 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों को अनौपचारिक विद्यालयपूर्व शिक्षा प्रदान करना.

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