बिहार : "ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाओं को किताबों से जोड़ने का प्रयास " - Live Aaryaavart

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रविवार, 21 जुलाई 2019

बिहार : "ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाओं को किताबों से जोड़ने का प्रयास "

जिंदगी फाउंडेशन अनपढ़ लोगों के लिए काम कर रहा है। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को उन्हें मानक अध्ययन सामग्री प्रदान करने के लिए। यह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करता है।
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गोपालगंज (आर्यावर्त संवाददाता) । गांवों के लिए जिंदगी है पुस्तकालय । इसकी महता समझ ज़िन्दगी फाउंडेशन नामक संस्था ने  गांवघर में ही सृजन करने लगे हैं  पुस्तकालय। पुस्तकालय खोलो मुहिम में शानदार ढंग से चल रही है। उस के हाथ में है मुहिम जो बाल्यावस्था में किताब खरीदने के परेशान रहे।अपने अतीत का अंधकार से सबक लेकर वर्तमान को उजाला देने वाले शख्स का नाम है जयप्रकाश मिश्र। इसे व्यवस्थित ढंग से चलाने लिए एक संस्था ज़िन्दगी फ़ाउंडेशन  2014 में स्थापित किया गया, ज़िन्दगी फ़ाउंडेशन शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, कला और संस्कृति और बेसहारा देखभाल के क्षेत्रों में कार्यक्रमों का समर्थन करता है। इसका मिशन भारत में कई राज्यों के दूरदराज के क्षेत्रों में काम करना है। ज़िंदगी फाउंडेशन समाज के सभी वर्गों के साथ काम करने, अनंत देखभाल के साथ परियोजनाओं का चयन करने, और उन क्षेत्रों में काम करने में गर्व महसूस करता है जो पारंपरिक रूप से बड़े पैमाने पर समाज द्वारा अनदेखी की जाती हैं। शुरुआत में, ज़िंदगी फाउंडेशन ने बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम लागू किए। जरूरतमंद भारतीय वरिष्ठ नागरिकों की मदद करें।संगठन ने 500 वृद्ध व्यक्तियों की पहचान की है।महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण यह माइक्रो प्रोजेक्ट गरीबों को सिलाई कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है। परियोजना गोपालगंज में ग्रामीण क्षेत्रों के 75 से अधिक वंचित गरीब छात्रों को शैक्षिक सामान (वर्दी, स्कूल फीस, किताबें, स्वेटर, नोटबुक, पेन, पेंसिल, स्टेशनरी, आदि) प्रदान करेगी ताकि वे अपने शैक्षिक मानक विकसित करने में सक्षम हो सकें । यह परियोजना हाशिए के बच्चों को शिक्षित होने के बेहतर अवसर दिलाने और समाज के विकास में योगदान देने में मदद करेगी।पुरानी पठनीय पुस्तक, अध्ययन सामग्री जैसे कलम, पेंसिल, नोट बुक आदि ।कंप्यूटर, लैपटॉप।स्टेशनरी, किताबें, खेल, खिलौने, जूते, टिफिन बॉक्स, वर्दी जैसी स्कूल सामग्री।एक दिन एक अलग बनाओ। किसी भी नजदीकी गाँव, अनाथालय, स्कूल को समय दिया जा सकता है। इससे मन को खुशी मिलेगी। हमें इन जगहों को समझने का मौका मिलेगा।छोटे उपहार आप दान कर सकते हैं छोटा मीठा डिब्बा,कलर बुक्स, पेंसिल, स्केच बुक्स,पानी की बोतलें, छोटे प्लेट्स, मग छोटे बिस्कुट के पैकेट, टेट्रा पैक के जूस, सॉफ्ट टॉफी,खिलौने, बच्चों के कपड़े, स्टोरीबुक (नई या पुरानी लेकिन अच्छी स्थिति में)।अस्पताल में बच्चों के लिए समय बिताएं।यह, आम तौर पर, अस्पताल में किसी के लिए बहुत मज़ा नहीं है, लेकिन यह छोटे बच्चों पर विशेष रूप से कठिन है, क्योंकि वे अकेला, ऊब और डर महसूस करते हैं। आप विभिन्न अस्पतालों में भर्ती बच्चों को मुस्कुराहट फैलाने में हमारी टीम में शामिल हो सकते हैं। आपकी कहानी आपके साथ साझा करने में खुशी हो रही है। हमारी पूरी टीम गांव की है। गाँव में आज भी सुविधाओं का अभाव है। तब नौकरी छोड़ देनी चाहिए और समाज के लिए काम करना चाहिए।  राजन क्लेमेंट साह कहते है कि आज मेरे प्रिय मित्र जय प्रकाश मिश्र के साथ हैं। वे अपने संस्थान ‘ज़िन्दगी फाउंडेशन‘ के जरिये कबाड़ बन चुकी किताबों को नया रूप देकर जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचा रहे हैं. खुद ने मुफलिसी में बचपन बिताया और किताबों की तंगी हमेशा से रही तो भावी पीढ़ी को मुफ्त में किताबे उपलब्ध करवाना शुरू किया. कबाड़ से किताबों को निकालकर पुस्तकालय तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं जय प्रकाश मिश्र. जिंदगी फाउंडेशन के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय निर्माण के कार्य किए जा रहे हैं. जहाँ ग्रामीण क्षेत्र के उन प्रतिभाओं को किताबों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिन्हें सचमुच किताबों की बहुत जरूरत है!

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