बिहार : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जन-आवाम के लिए आंदोलन तीव्र करेगी। - Live Aaryaavart

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रविवार, 28 जुलाई 2019

बिहार : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जन-आवाम के लिए आंदोलन तीव्र करेगी।

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पटना, 28 जुलाई।  बिहार राज्य परिषद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक 26, 27 एवं 28 जुलाई, 2019 को केदार भवन, पटना में आज सम्पन्न हुई।  राष्ट्रीय सचिव का॰ अमरजीत कौर ने इस बैठक में राष्ट्रीय परिषद की 19, 20 एवं 21 जुलाई को चुनाव समीक्षा व आगामी कार्यक्रमों की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया व का॰ सत्य नारायण सिंह ने राज्य में पिछले कार्यों की समीक्षा और बिहार में लोकसभा चुनावों में विभिन्न पार्टियों की भूमिका तथा भाकपा प्रत्याषियों के लिए चुनाव प्रचार और नतीजों पर रिपोर्ट पेष की। साथी अमरजीत कौर ने अपने उदबोधन में 17वीं लोकसभा के नतीजों के चलते एक बार फिर मोदी के नेतृत्व में भाजपा की एनडीए सरकार के गठन को देष के प्रगतिषील आवाम, देष की धन संपदा, बहुलतावादी संस्कृति, विभिन्न आस्थाओं को मानने वालों की धर्मनिरपेक्षता के विचारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व विभिन्न राजनैतिक विचारों को रखने के अधिकार को एक बहुत बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आर.एस.एस.-बीजेपी की चुनावी रणनीति, अपार धन का प्रयोग, राष्ट्रवाद की भावनाओं को उभार कर तथा लोगों के भाईचारे को खतरे में डालकर ध्रुवीकरण के रास्ते नफरत के वातावरण को फैलाते हुए आगे बढ़ी। चुनावों में पुलवामा व बालाकोट की घटनाओं का जमकर वोट बटोरने के लिए इस्तेमाल किया गया। जहां एक तरफ बीजेपी ने 44 पार्टियों का गठबंधन किया वहीं विपक्षी पार्टियां देष में एक साथ आकर विकल्प देने में विफल रही। तीन चार राज्यों में ही गठबंधन बने और वो भी सबकों साथ लेकर नहीं, तथा जो बने भी तो एक साथ ठीक प्रचार भी नहीं कर सके। केवल तमिलनाडु ही एक मजबूत गठबंधन के चलते बीजेपी व उनके सहयोगियों को करारी षिकस्त दी जा सकी।

      का॰ कौर ने कहा कि सरकार के पहले बजट ने ही सरकार के रूख को स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने पहले कार्यकाल से भी कहीं ज्यादा रफ्तार से देष के सार्वजनिक उद्यमों को निजी हाथों में बेचेगी, देष में पिछले पंाच वर्षों में बाहरी कर्ज बढ़ गया और उसमें और इजाफा होगा। विदेषी कारपोरेट कम्पनियों व देष की निजी कम्पनियों को टैक्स माफी, तथा बिजनेस में इन्कवारी व जाँच के बिना, इन्सपैकषन से पूरी छूट देते हुए उनकी लूट बढ़ाने का रास्ता साफ कर रही है। षिक्षा के व्यापारीकरण व साम्प्रदायीकरण की ओर बढ़ा जाएगा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को कमजोर किया जाएगा। बजट की दिषा है कि सार्वजनिक बैंकों का विलय तथा सरकारी बचत योजनाओं में 100 फीसदी विदेषी पूंजी इंटरमीडियरीज के नाम पर लाई जा रही है, वहीं श्रमिकों के 44 केन्द्रीय कानूनों को 4 कोड में बदलने की घोषणा कर दी गई और 2 कोड पार्लियामेंट में पेष भी कर दिए गए। 100 लाख करोड़ की इफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की घोषणा से देषी-विदेषी ब्लिडर लाॅबी के मुनाफे के रास्ते खोले गए है, रेलवे का कार्पोपरेटाईजेषन, डिफेंस की आर्डिनेस फैक्ट्रियों का निजीकरण सब तेज रफ्तार से आगे बढ़ाया जा रहा है। पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए और मजदूरों की वेतन को राष्ट्रीय स्तर पर निचले स्तर पर लाने के लिए मजदूरों की 18000 रूपये न्यूनतम वेतन की मांग की जगह केवल 4620 रूपये पर लाया जा रहा है। सरकार के बैठने के बाद भीड़तंत्र के द्वारा हत्याओं का दौर तेज हो गया है तथा हिन्दु-मुस्लिमान विवाद को बढ़ाने का षड़यंत्र करने वालों को संरक्षण तेज हो गया है। अपने को जवाबदेही  से बचाने के लिए सरकार ने सूचना के अधिकार कानून में संषोधन कर उसे कमजोर कर दिया और दूसरी तरफ यू.ए.पी.ए. तथा एन.आई.ए. के कानूनों में संषोधन कर इस कानून को मानव अधिकारों के हनन के लिए और आसान कर दिया है ताकि विरोधियों के ऊपर शक की बिना पर भी आतंकी घोषित कर कार्यवाही की जा सके। जनवाद पर खतरा है, संविधान पर खतरा है, देष की सैकड़ों बरसों की भाईचारे की गंगा-जमुनी तहजीब को खतरा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस सबका मुकाबला करने के लिए मुस्तैद है और उसके लिए व्यापाक एकता के रास्तों पर भी चलेगी।  रोजगार, षिक्षा, स्वास्थ्य, जन सुविधाऐं, जल-जंगल जमीन के प्रष्न संघर्षों के लिए प्रमुख रहेंगे। नई षिक्षा नीति के खतरों से आगाह करते हुए इस पर निर्मित हो रहे षिक्षकों व विद्यार्थियों के संयुक्त आंदोलनों को समर्थन दिया जाएगा। श्रम संगठनों द्वारा 2 अगस्त को देषव्यापी विरोध दिवस का भी राज्य परिषद ने समर्थन किया।  रेलवे व डिफेंस क्षेत्र के निजीकरण के विरूद्ध चल रहे आंदोलनों को समर्थन प्रेषित किया गया। किसानों के भूमि सुरक्षा, कर्जा माफी व फसल के वाजिब दाम के संघर्ष बढ़ाऐ जाएगें तो वहीं भूमिहीनों को सरकार के पास फाजिल जमीन बंटवाने का आंदोलन भी चलाया जाएगा। बुद्धिजीवियों, लेखकों रंगकर्मियों, पत्रकारों की स्वतंत्र सोच पर प्रहार के घिनौने कृत्यों का विरोध तथा उनको न्याय मिलने के प्रष्न भी मुखरित रहेंगे। राज्य सचिव की रिपोर्ट पर 31 साथियों ने अपने विचार रखे। कुछ प्रस्ताव भी पारित किए गए:- जिनमें बढ़ते अपराधों पर रोक, बाढ़ और सूखा के गहन प्रष्न पर प्रभावित लोगों के लिए मदद, बिहार राज्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की 80वीं सालगिह कार्यक्रमों का आयोजन प्रमुख है। राज्य सचिव ने कहा कि छात्र-युवा साथियों के षिक्षा व रोजगार प्रष्नों पर आंदोलनों में उनकी लामबंदी को मजबूती देने का काम भी किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त जो अंग्रेजों भारत छोड़ो दिवस है, उस दिन पूरे प्रदेष में जन-आवाम कि समस्याओं पर आक्रोष प्रदर्षन किये जायेंगे। 16 अगस्त से पूरा सप्ताह जनसमस्याओं को लेकर पदयात्रा आयोजित की जायेगी। बिहार विधान सभा व विधान परिषद (स्नातक व षिक्षक) के आगामी चुनावों एवं बिहार विधान सभा के उप चुनाव पर भी चर्चा की गयी।

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