बिहार : 23 जुलाई को 12 बजे से संयुक्त महिला संगठनों के द्वारा विधानसभा मार्च - Live Aaryaavart

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सोमवार, 22 जुलाई 2019

बिहार : 23 जुलाई को 12 बजे से संयुक्त महिला संगठनों के द्वारा विधानसभा मार्च

बिहार में महिलाओं के ऊपर अत्याचार- बलात्कार, बच्चियों का उत्पीडन - अपहरण , एसिड अटैक , मॉब लिंचिंग की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यहां तक की पुलिस में कार्यरत महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। स्नेहा काण्ड इसका ताजा उदाहरण है। 
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पटना,22 जुलाई। महिला संगठनों का मानना है कि बिहार में महिलाओं और बच्चियों के साथ लगातार हिंसा,बलात्कार और एसिड अटैक जैसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। यही नहीं बच्चियां और युवा लड़कियां गायब की जा रही हैं। ऐसे कई गंभीर मामले सामने आये है, पर सरकार और पुलिस प्रशासन का रवैया काफी निराशाजनक है। 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का नारा देने वाली सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बेटियां गायब हो रही हैं।बलात्कार का विरोध करने पर महिलाओं का बाल मुड़ाकर उन्हें घुमाने के कई मामला सामने आए हैं। पुलिस कांस्टेबुल स्नेहा मंडल हत्याकांड में अभी तक  कोई कार्रवाई नहीं हुई है। छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले न्यायालय तब को संज्ञान लेना पड़ा।आंकड़े बताते है कि देश में पिछले छह माह में 24 हजार बच्चियां बलात्कार की शिकार हुई हैं। पटना में भी लड़कियों की खरीद फरोख्त का मामला सामने आया है। पिछले दिनों पत्रकार नगर में एक लड़की गायब हुई जिसे हरियाणा के किसी गांव में बेच दिया था। इसके पहले पटना सिटी से दो लड़कियां गायब हुई, जिसमें एक को बरामद किया गया और दूसरी की हत्या कर दी गई। हाजीपुर के भगवानपुर में दुष्कर्म का विरोध कर रही महिला की बेटी का बाल मुड़वाकर उनको घुमाया गया। भागलपुर में एक लड़की को एसिड से नहला दिया गया, जिसकी बाद में मौत हो गई। सरकारी घोषणा के बावजूद लड़की का इलाज के लिए राशि नहीं भेजी गयी थी। अभी हाल में बांसघाट के पास से एक लड़की तन्बी नाम की 11साल की बच्ची गायब है। सभी बड़े पुलिस अधिकारियों के पास मामला भेज जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इतना ही नहीं सीएम नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के पावापुरी में एक दलित महिला द्वारा जबरन संबंध बनाये जाने का विरोध करने पर जिन्दा जलाने की शर्मनाक घटना हुई थी। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम समेत सभी बालिका गृह की जांच का काम ठीक से नहीं हो रहा है।सीबीआई अधिकारियों के बयान के आधार पर कार्रवाई करे। ऐसे तमाम जघन्य और हिंसक मामलों के खिलाफ महिला संगठन साथ-साथ हैं।

23 जुलाई को संयुक्त महिला संगठनों के विधानसभा मार्च 
पिछले दिनों बिहार में महिलाओं के ऊपर अत्याचार- बलात्कार, बच्चियों का उत्पीडन - अपहरण , एसिड अटैक , मॉब लिंचिंग की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यहां तक की पुलिस में कार्यरत महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। स्नेहा काण्ड इसका ताजा उदाहरण है। सरकारी कार्रवाई बिल्कुल नाकाफी है। इस स्थिति से हम बेहद आक्रोशित व चिन्तित हैं।
इसीलिए हमने विधानसभा के सामने प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है जिसमें विभिन्न महिला, छात्र. नौजवान व सांस्कृतिक संगठन व गणमान्य लोग भाग लेंगे। स्थान:-   रेडियो स्टेशन से,समय:-  12 बजे दिन से और तिथि:- 23 जुलाई 2019 है। इस बात की जानकारी मीना तिवारी -- ऐपवा  व निवेदिता झा -  बिहार महिला समाज ने दी हैं। उन्होंने कहा कि रामपरी -- ऐडवा,अनामिका--महिला सांस्कृतिक संगठन,कंचन--विमुक्ता, स्त्री मुक्ति संगठन, सिस्टर लीमा-- घरेलू महिला कामगार संगठन, सिस्टर लीना-- कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बख्तियारपुर, मोना -- नटमण्डल, समता-- कोरस, प्रीतिप्रभा-- हिरावल, श्वेत प्रीत-- इप्टा, सिस्टर स्मिता-- स्वाभिमान लोक सेवा संस्थान, कल्याणी-- जन जागरण शक्ति संगठन , विशाखा--रेनबो फाउण्डेशन इण्डिया, प्रियंका-- आइसा, भाग्य श्री- एआईएसएफ, प्रशान्ति--जेंडर एलाएंस,चन्द्र कांता, शशि यादव,आसमा खातून, तबस्सुम अली, सविता अली,सुधा अम्बष्ठ, अख्तरी बेगम,शाहिना, सुष्मिता, पूनम खातून, शाइस्ता अंजुम,सरोज चौबे आदि के द्वारा जन सम्पर्क अभियान चलाया जा रहा है।

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