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रविवार, 1 सितंबर 2019

पूर्णिया : मारवाड़ी समाज की 50 महिलाओं अंगदान को निकाली रैली, सीएस को सौंपा ज्ञापन

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पूर्णिया (आर्यावर्त संवाददाता) : अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन पूर्णिया शाखा के द्वारा 31 अगस्त की सुबह 10 बजे अंगदान को ले जागरूकता रैली निकाली गई। जागरूकता रैली स्टेशन क्लब दुर्गा मंदिर से शुरू होकर सदर अस्पताल तक गई। जिसकी शुरुआत जिला परिषद अध्यक्ष क्रांति देवी ने की। रैली में समाजसेवी सह वार्ड पार्षद सरिता राय, रोटरी क्लब के सदस्य व बिहार नेत्रदान प्रमुख कांता अग्रवाल व समिति प्रमुख नीतु मोदी ने सहयोग किया। अंगदान जागरूकता रैली के सदस्यों ने अंगदान महादान की आवाज बुलंद की। सिविल सर्जन डॉ मधुसूदन प्रसाद से मिल कर अंग दान में अपना योगदान देने का आग्रह किया। रैली के संचालक डॉ निशा प्रकाश व सम्मेलन के अन्य सदस्यों ने 50 लोगों द्वारा मरणोपरांत अपना अंगदान करने की सहमति दी। सीएस ने कहा कि अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन द्वारा चलाए गए अंगदान जागरूकता अभियान काफी सराहनीय है। अभियान के लिए महिलाओं की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। पुरूष की तुलना में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निर्वाह कर रही हैं और योगदान दे रही हैं। सीएस ने कहा कि रैली में 50 महिलाओं ने अपने अंगदान देने की मंजूरी दी है। यह काफी सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करना भी अंगदान है और वर्तमान समय में रक्त की भारी कमी है। खासकर थैलेसीमिया के मरीजों को समय पर ब्लड नहीं मिल रहा है। यदि हर व्यक्ति वर्ष में एक बार भी अपना रक्तदान करें तो रक्त की कमी की समस्या नहीं होगी। मधुसूदन ने कहा कि जिस तरह महिलाएं अंगदान के लिए आगे बढ़ रही हैं उसी तरह पुरूष को भी इस अभियान में आगे बढ़ने की जरूरत है। शरीर का काेई भी हिस्सा दूसरों का काम आ सकता है। खासकर आंख, किडनी, हार्ट, गुर्दा एवं शरीर का अन्य हिस्सों को मरणोपरांत आसानी से दान किया जा सकता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। डॉ एसके वर्मा ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा 8 सितंबर तक नेत्रदान के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है। अभियान के तहत लोगों को मरणोपरांत या अपने जीवन काल में नेत्रदान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डॉ निशा प्रकाश ने कहा कि मरणोपरांत लोग अपने शरीर को जला देते है या दफन कर देते हैं जो किसी काम का नहीं आता है। मनुष्य के शरीर में कई ऐसे अंग है जो दूसरों को नया जीवन प्रदान कर सकता है। लोग अपने जीवनकाल में शरीर का कोई अंग प्रदान भले ही न करें लेकिन मरणोपरांत अंगदान जरूर करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव और समस्या का समाधान हो सकता है। निशा ने कहा कि अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के तत्वावधान में इस तरह का कई अभियान चलाया गया है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। निशा ने कहा कि इस नेक काम में पुरूष को भी बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी दिखाने की जरूरत है।

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