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बुधवार, 18 दिसंबर 2019

बिहार : छात्र नेताओं पर से फर्जी मुकदमे वापस ले सरकार : माले

बिहार बंद के प्रचार को डिस्टर्ब करने की प्रशासन द्वारा कोशिश निंदनीय, कल के बिहार बंद को ऐतिहासिक बनाने की अपील
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पटना 18 दिसंबर (आर्यावर्त संवाददाता) भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने आइसा सहित कई छात्र संगठन के नेताओं पर थोपे गए फर्जी मुकदमे की कड़ी निंदा की है और इसे अविलंब वापस लेने की मांग की है. कहा कि नीतीश कुमार नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन को बलपूर्वक कुचल देना चाहते हैं. यही वजह है कि आज पटना में कारगिल चैक व अशोक राजपथ में धारा 144 लागू लगा दिया गया है. छात्रों को उपद्रवी कहकर प्रताड़ित किया जा रहा है. हाॅस्टलों में छापेमारी की जा रही है. जिस प्रकार से जामिया मिल्लिया इसलामिया में पुलिस ने दमन अभियान चलाया, नीतीश कुमार की पुलिस पटना विश्वविद्यालय में दमन अभियान चला रही है. सरकार की इन कार्रवाइयों से आंदोलन रूकने वाला नहीं है. उसी तरह, मसौढ़ी में वाम दलों द्वारा आहूत 19 दिसंबर के बिहार बंद का प्रचार कर रहे प्रचार वाहन को प्रशासन द्वारा डिस्टर्ब किया गया. यह बेहद निंदनीय है. प्रचार कर रहे माले के युवा नेता कमलेश कुमार, सीपीएम व सीपीआई के नेताओं को प्रशासन ने घंटों थाने में बैठाया रखा और प्रचार नहीं करने दिया. इन घटनाओं से पूरी तरह साबित होता है कि नीतीश कुमार आज पूरी तरह आरएसएस की गोद में जा बैठे हैं. माले राज्य सचिव ने आगे कहा कि कल का बिहार बंद ऐतिहासिक होने वाला है. कई संगठनों का समर्थन मिल रहा है. पूरे बिहार में हजारों लोग सड़क पर उतरेंगे. छात्र-युवा संगठनों के अलावा अन्य राजनीतिक पार्टियों ने भी बंद का समर्थन किया है. उन्होंने बिहार की आम जनता से अपील की है कि देश के संविधान को बचाने के खातिर चल रहे इस युद्ध में कल के बिहार बंद को अपना सक्रिरय समर्थन दें, ताकि फासीवादी मोदी सरकार पर लगाम लगाया जा सके.

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