बिहार : एनआरसी और सीएए पर बंद के शक्ति प्रदर्शन में राजद बिग बॉस बनकर उभरा - Live Aaryaavart

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रविवार, 22 दिसंबर 2019

बिहार : एनआरसी और सीएए पर बंद के शक्ति प्रदर्शन में राजद बिग बॉस बनकर उभरा

राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के गैरहाजिर में बंद सफल करने में एमवाई समीकरण मजबूत हुआ। सैकड़ों की संख्या में अल्पसंख्यकों ने जुलूस निकाले।कुल मिलाकर राजद बिग बॉस बनकर उभरा है। 2020 बिहार चुनाव में राजद का महत्वपूर्ण योगदान व निर्णायक भूमिका में रहेगी।
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पटना, 22दिसम्बर। बी.जे.पी.के विरूद्ध गोलबद्ध होने वाली विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय व प्रादेशिक स्तर पर बिहार बंद कराये। इसमें बिहार में राजद अव्वल साबित हुआ। एनआरसी पर एमवाई समीकरण मजबूत हुआ है। कुर्जी में भाई धर्मेंद्र,मखदुमपुर में रामानंद यादव,दीघा में प्रो.सेवा यादव ने बंद को सफल करने में दिल जान से प्रयास किए जो सफल साबित हुआ।पग-पग टायर जलाकर और बांस बल्ले से रोड जाम किए।इमरजेंसी सेवा में लगे एम्बुलेंस को जाने दिए। लोग स्वेच्छा से दुकान बंद कर रखे।

एनआरसी का क्या मतलब है 
नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल (NRC Bill Meaning) एक रजिस्ट्रर है जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। बता दें कि एनआरसी की शुरुआत 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में असम में हुई थी। फिलहाल यह असम के अलावा किसी अन्य राज्य में लागू नहीं है।

एनआरसी में शामिल होने के लिए क्या जरूरी है 
एनआरसी के तहत भारत का नागरिक साबित करने के लिए किसी व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उसके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले भारत आ गए थे। बता दें कि अवैध बांग्लादेशियों को निकालने के लिए इसे पहले असम में लागू किया गया है। अगले संसद सत्र में इसे पूरे देश में लागू करने का बिल लाया जा सकता है।

एनआरसी के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत है 
भारत का वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, जन्म का सर्टिफिकेट, एलआईसी पॉलिसी, सिटिजनशिप सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया लाइसेंस या सर्टिफिकेट में से कोई एक होना चाहिए।

NRC में शामिल न होने वाले लोगों का क्या होगा? 
अगर कोई व्यक्ति एनआरसी में शामिल नहीं होता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में ले जाया जाएगा जैसा कि असम में किया गया है। इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी जहां के वो नागरिक हैं। अगर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों को दूसरे देशों की सरकार मान लेती है तो ऐसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा। नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का फुल फॉर्म Citizenship Amendment Act है। ये संसद में पास होने से पहले CAB यानी (Citizenship Amendment Bill) था। फिर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये बिल नागरिक संशोधन कानून (CAA, Citizenship Amendment Act) यानी एक्ट बन गया है। नागरिकता संशोधन कानून , 2019, अल्पसंख्यकों (गैर-मुस्लिम) के लिए भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है। इस कानून से भारत के किसी भी धर्म के शख्‍स की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। ये कानून सिर्फ पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान में रहने वाले शोषित लोगों को भारत की नागरिकता हासिल करने की राह आसान करता है। भारत के मुस्लिमों या किसी भी धर्म और समुदाय के लोगों की नागरिकता को इस कानून से खतरा नहीं

CAA में कौन से धर्म शामिल हैं?
CAA में छह गैर-मुस्लिम समुदायों - हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं। इन्हें भारतीय नागरिकता तब मिलेगी जब वे 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हों।

पिछली नागरिकता के मानदंड क्या थे?
इस संशोधन बिल के आने से पहले तक, भारतीय नागरिकता के पात्र होने के लिए भारत में 11 साल तक रहना अनिवार्य था। नए बिल में इस सीमा को घटाकर छह साल कर दिया गया है।

इसलिए हो रहा है प्रदर्शन
कानून में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाने की बात की गई है। हालांकि, इससे भारत में रह रहे मुस्लिमानों को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन उनका मानना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिम लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है। इसलिए ये धार्मिक भेदभाव वाला कानून है जो कि संविधान का उल्लंघन करता है।

इसलिए नहीं जोड़ा गया मुसलमानों को
गृहमंत्री अमित शाह ने बताया था कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश मुस्लिम देश हैं। वहां धर्म के नाम पर मुस्लिम उत्पीड़ित नहीं होते, इसलिए उन्हें इस एक्ट में शामिल नहीं किया गया है।

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