बिहार : आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने की योजना है : उपाध्यक्ष - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 14 जनवरी 2020

बिहार : आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने की योजना है : उपाध्यक्ष

एकता परिषद बिहार का मानना है कि सरकार के पास आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने की योजना है।मगर नौकरशाह उसका उपयोग ही नहीं करते हैं
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पटना (आर्यावर्त संवाददाता) । बिहार में एकता परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी के नेतृत्व में एकता परिषद बिहार संचालित है।इनके साथ महिला नेत्री मंजू डुंगडुंग मिलकर  जल,जंगल और जमीन का आंदोलन संचालित होता है। पिछले दिनों दानापुर,बिहटा,कोईलवर आदि प्रखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन कर मांग पूर्ण करने का आग्रह किया गया।भूमि समस्याओं के हल करने के  सिलसिले में सरकार भूमिहीनों को 10 डिसमिल जमीन दें। एकता परिषद बिहार के नेतृत्व में दानापुर, बिहटा, कोईलवर आदि की सैकड़ों भूमिहीन महिलाएं अपनी लंबित मांग को लेकर सड़क पर उतरी । महिलाएं गांव- गांव से पहुंचकर निश्चित जगह में पहुंचती हैं।यहां से महिलाओं का यह जत्था शहर के विभिन्न मार्ग से नारा बुलंद करके गुजरकर प्रदर्शन स्थल प्रखंड मुख्यालय पहुंचते हैं। मौके पर एकता परिषद के नेता लोगों को सम्बोधित करते हैं। अपने आंदोलन के बारे में बताते हैं। जल,जंगल और जमीन से जुड़ी समस्याओं का जिक्र करते हैं।केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा धरती पर आने और चले जाने के बाद भी कल्याण व विकास की योजना संचालित है। आपदा और पुनर्वास करने की योजना है।आवासीय भूमिहीनों को खरीदकर जमीन देने का प्रावधान है। मगर पद से चिपके अधिकारी-पदाधिकारी काम करते ही नहीं है।इसके आलोक में  2007 में जनादेश, 2012 में जन सत्याग्रह और 2018 में जनांदोलन में शामिल होकर सत्याग्रह पदयात्रा की गयी।इसका भी सरकार पर प्रभाव नहीं पड़ा।2007 में जनादेश 2007 में 25 हजार वंचित समुदाय के लोग ग्वालियर से दिल्ली तक पदयात्रा सत्याग्रह किये। इस सत्याग्रह के बाद राष्ट्रीय भूमि सुधार आयोग और राष्ट्रीय भूमि सुधार समिति बनायी गयी। जो कागज में ही सिमटकर रह गयी। नेता आगे कहते हैं कि 2012 में जन सत्याग्रह में एक लाख से अधिक वंचित समुदाय ग्वालियर से दिल्ली तक बढ़कर चलने लगे। मोहब्बत की नगरी आगरा से आगे पदयात्रियों को नहीं बढ़ने देने का मन बनाने वालों से द्विपक्षीय समझौता करने पर सरकार मजबूर हुई।2018 में जनांदोलन 2018 में 75 हजार लोग ग्वालियर से दिल्ली की ओर कूच किए. मुरैना में स्थगित कर दिया गया। लोकसभा की अधिसूचना जारी कर दी गयी।ऐतिहासिक तीनों पदयात्रा सत्याग्रह के महानायक राजगोपाल पी व्ही राजाजी थे। बताया गया कि लंबे समय से आवसीय भूमिहीन एवं वासभूमि के लाभार्थियों को उनका लाभ नहीं मिल सका है।सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भी निष्पादन सही से नहीं हो रहा है।इसके लिये पहले भी कई बार जनांदोलन चलाया जा चुका है। सरकार ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।लेकिन मामला जस का तस है।इसको लेकर लोगों में आक्रोश व असंतुष्टि है।अपना विरोध जताने के लिये ही सैकड़ों महिलाएं आंदोलन करने पर मजबूर हो गयी है। महिलाओं के समर्थन में पहुंचे मजदूरों के नेता सहदेव राय व टुनटुन कुमार ने कहा कि सरकार को गरीबों के इस आवश्यक मांग को जल्द पूरा करना चाहिए।नरेश मांझी ने अभिमंयु नगर,दानापुर में महादलितों को जमीन मिली है पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है।कागजात नष्ट होने लगा है। वहीं टेसलाल वर्मा नगर के लोगों को रेलवे परियोजना से विस्थापित होना पड़ा है पर विस्थापितों को पुनर्वास नहीं किया जा रहा है। सीओ की अनुपस्थिति के कारण अपना ज्ञापन बीडीओ को सौंपा गया।परिषद के जिला संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी ने बताया कि सीओ की अनुपस्थिति के कारण प्रदर्शन समाप्त कर हमने बीडीओ को अपने संघ का ज्ञापन सौंपा है।साथ ही जल्द इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।इस अवसर पर एकता परिषद के प्रखंड समन्यवक राजकुमार के साथ काफी संख्या में सदस्य व महिलाएं मौजूद थी।

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