विशेष : खट्टे मिठे यादों में ‘जिन्दगी’ का एक और साल हो गया ‘कम’ - Live Aaryaavart

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बुधवार, 1 जनवरी 2020

विशेष : खट्टे मिठे यादों में ‘जिन्दगी’ का एक और साल हो गया ‘कम’

एक लम्हा है जो बीतता नहीं है। और साल हैं ...कि लम्हों की तरह बीते जा रहे हैं। मतलब साफ है साल दर साल दर साल बीतते जाएंगे और एक दिन आप पाएंगे कि चंद लमहे कम पड़ गए हैं। शहर दर शहर दर शहर आप भटक लेंगे और एक दिन आप पाएंगे कि चंद कदम बाकी रह गए हैं। कितना ही जी लें, कितनी ही सदियों तक, एक दिन ऐसा आएगा, जब आप पाएंगे यह काफी नहीं था। जब आप पाएंगे कि उस सरहद के इस तरफ छूट गए हैं, जिसको लांघकर जाना था। और तब आप फिर लौट आएंगे, उन तमाम बचे हुए लमहों को जीने के लिए जो रह गए थे, वे तमाम बचे हुए मील चलने के लिए, जो छूट गए थे। हर शुरुआत एक नई शुरुआत होगी, कोई भी आखिरी कभी आखिरी नहीं होगा 
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फिरहाल, साल 2019 कुछ ही घंटों में खत्म होने वाला है। 2020 दस्तक देने वाला है। ऐसे में पुराने की चिंता छोड़ नए को नए सीरे से जीने की ओर आगे बढ़ना होगा। या यूं कहे सभी के जीवन में अवसर अवश्य आते हैं। मनुष्य को इन अवसरों पर चूकना नहीं चाहिए। यह अवसर उसकी पूरी जिंदगी को बदल सकते हैं। केवट ने भगवान श्रीराम के चरण छूने का अवसर नहीं खोया। परिणाम सबकों पता है। कहने का अभिप्राय यह है कि आज मानव समय पर चूक जाता है। जीव को केवट की तरह चतुराई रखनी चाहिए, क्योकि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता है। यदि केवट प्रभु राम का चरणामृत उस वक्त न ले पाता तो फिर शायद यह मौका उसे नहीं मिलता। कहा जा सकता है बीता हुआ दौर आगे की राह बताता है तो पिछले से सबक लेकर कुछ नया करने की जज्बा पैदा करता है।  देखा जाय तो हर गुजरा हुआ साल कई तरह के यादें दे जाता है। उन्ही में साल 2019 एक है कई चीजों के लिए याद रखी जाएगी। चाहे वो सर्वोच्च अदालत का फैसला हो, या नागरिकता संशोधन विधेयक, या देशहित में सरकार द्वारा लिए गए फैसले हो, प्याज की बढ़ती महंगाई सभी चैकाने वाले रहे। क्रिकेट के हिटमैन रोहित शर्मा रनों के मामलों में हिट रहे, तो विरोट कोहली और सनथ जयसूर्या का रिकार्ड तोड़ा। हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए ये साल अच्छा नहीं रहा। कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर आर्थिक सुस्ती का असर साफ दिखाई दिया। रियल एस्टेट से लेकर ऑटोमोबाइल जैसे अहम सेक्टरों पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिला। यह अलग बात है कि आने वाले नये साल में इन सेक्टर्स से बहुत उम्मीदें हैं। इस साल भी कई ऐसे बड़े राजनीतिक फैसले हुए जिसने सबको चैंका दिया। मोदी सरकार को इस साल सबसे ज्यादा जिस बड़े फैसले के लिए याद रखा जाएगा तो वह फैसला है अनुच्छेद 370 को खत्म करना। साल 2019 में कई हस्तियों ने अपनी प्रतिभा से देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया। राजनीति, खेल, शिक्षा और विज्ञान से जुड़ी इन हस्तियों ने अपने योगदान से सभी का दिल जीत लिया। 

यह साल देश की सर्वेच्च अदालत के उन फैसलों के लिए भी याद रखा जाएगा जिसने देश की स्थिति पर सबसे ज्यादा असर डाला और कई विवादास्पद मुद्दों को सुलझा दिया। अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला हो या तीन तलाक। सभी फैसलों ने देश को एक नई दिशा दी। दशकों पुराने भूमि विवाद को इस साल सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया। लगभग 40 दिन चली बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि का कब्जा सरकारी ट्रस्ट को दे दिया। कोर्ट के फैसले के मुताबित रामलला’ को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक दिया गया है। दूसरी तरफ, सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ ज़मीन का एक ’उपयुक्त’ प्लॉट दिया जाएगा। एक और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अब मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार के तहत आएगा। इस साल सबसे ज्यादा विवाद जिन मुद्दों पर हुआ उनमें राफेल विमान की खरीदारी महत्वपूर्ण मुद्दा रही। राहुल गांधी ने सरकार को कई बार इस मुद्दे को लेकर कटघरे में खड़ा किया। राफेल विमान का मुद्दा न सिर्फ देश बल्कि विदेश में भी छाया रहा। जब यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सरकार को वहां क्लीन चिट मिली। दरअसल कोर्ट ने राफेल विमान सौदे को लेकर दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। इससे डील में धांधली का आरोप लगा रहे विपक्ष, खासकर कांग्रेस को करारा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल कर्नाटक में मचे सियासी घमासान पर भी एक बड़ा फैसला सुनाया। फैसले में अयोग्य विधायक उपचुनाव में हिस्सा ले सकते हैं का आदेश दिया गया। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने के मामले में भी भी अहम् फैसला रहा कि फैसला आने तक हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वहां सरकार बनाने को लेकर सियासी उठापटक के बीच सुर्पीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मामले को सुलझाया। 

घटनाओं के मामले में बालाकोट एयर स्ट्राइक सबसे अधिक चैकाने वाला था। 25-26 फरवरी 2019 की रात भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इस हमले में कई आतंकी ठिकाने तबाह हुए और सैकड़ों आतंकी मारे गए। ये एक ऐसा मिशन था जिसके बारे में आखिरी लम्हों तक किसी को कोई खबर नहीं थी। हमले के बाद पूरी दुनिया को पता चला कि भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की है। यह स्ट्राइक 4 फरवरी को पाकिस्तान स्थिति जैश-ए-मोहम्मद ने कश्मीर के पुलवामा सेक्टर में सीआरपीएफ के जवानों के काफिले को निशाना बनाकर 40 जवानों के शहादत के बदले में की गयी। लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने वादा किया था कि वह अपनी मुस्लिम बहनों को न्याय दिलाएंगे और तीन तलाक पर उनकी सरकार कानून बनाएगी। मोदी सरकार ने अपना वादा पूरा किया। खासकर केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक नया इतिहास रच दिया। केंद्र ने जम्मू और कश्मीर को विभाजित करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम से दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का निर्माण किया। मोदी सरकार ने इस साल सरकारी बैंकों का विलय किया। 30 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने 10 सरकारी बैंकों के विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का एलान किया। 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे. अब केवल 12 सरकारी बैंक हैं। मोदी 2.0 ने एक और बड़ा फैसला जो लिया वो फैसला मोटर व्हीकल एक्ट लागू करना था। यह अलग बात है कि सरकार के नागरिकता संशोधन कानून को लेकर एक खास वर्ग में भ्रम के चलते हायतौबा मचा है। इस कानून के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी लोगों को आसानी से भारत की नागरिकता मिल सकेगी। इस कानून में मुस्लिमों का नाम नहीं होने से देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। 

अर्थव्यवस्था के लिहाज से वर्ष 2019 अच्छा नहीं रहा। हर सेक्टर में मायूसी का आलम छाया रहा। छोटे बड़े उद्योग भी अर्थव्यवस्था की सुस्ती से बुरी तरह से परेशान रहे। इस साल भी रियल एस्टेट में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। जैसा कि उम्मीद की जा रही थी कि वर्ष 2019 में रियल एस्टेट में कुछ सुधार हो सकता है। लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। बिल्डर, डेवलपर, रुके हुए प्रोजेक्ट और ग्राहकों की कमी से यह सेक्टर पूरे साल हांफता रहा है। धीमी अर्थवस्था के कारण देश में ऑटो सेक्टर रफ्तार नहीं पकड़ सका। ऑटो सेक्टर के लिए गुजरा साल अच्छा नहीं रहा। ऑटो कंपनियों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि त्यौहारी सीजन में ही इस सेक्टर में थोड़ी बढ़त देखी गई। टेलीकॉम सेक्टर के लिए साल 2019 बहुत बुरा रहा है। देश में एक समय वो भी था जब देश में 14 कंपनिया काम कर रही थी लेकिन आज देश में महज कुछ कंपनियां ही सेवाएं दे पा रही हैं। जिनमें बीएसएनएल सहित दो अन्य कंपनियां बुरे दौर से गुजर रही हैं। पूरे साल इस सेक्टर की चर्चा अर्थिक जगत में छाई रही। साल के अंत में सबसे ज्यादा प्याज ने परेशान किया। भारतीय बाजारों में प्याज की कीमतें 150 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचीं। प्याज की कीमतें बढ़ने से आम आदमी के भी आंसू निकल आए। सरकार को दूसरे देशों से प्याज मंगाना पड़ा। 

क्रिकेट की दुनिया में हिटमैन के नाम से मशहूर रोहित शर्मा रनों के मामले में भी हिट साबित हुए है। इस साल में अगर उनके रिपोर्ट कार्ड पर एक नजर डाली जाए तो उन्होनें विरोट कोहली और सनथ जयसूर्या जैसे दिग्गजों को पीछे ही नहीं छोड़ा है बल्कि इनके रिकार्ड को भी तोड़ा है। वर्ष 2019 में रोहित शर्मा ने वन डे इंटरनेशनल में 1490 रन बनाए हैं। रनों के मामलों में रोहित शर्मा ने क्रिकेट के बादशाह विरोट कोहली को पीछे छोड़ दिया है। जिस तरह से रोहित ने अपने बल्ले से रनों को बारिश की है उसकी चर्चा क्रिकेट जगत में छा गई है। उनके इस प्रदर्शन से उनके प्रशंसक भी खुश हैं। वर्ष 2019 में रोहित ने 7 शतक और 6 अर्धशतक लगाते हुए 1490 रन बनाए हैं। रोहित ने इस साल वल्र्ड कप में 5 शतक जड़े थे। अपने शानदार प्रदर्शन के चलते रोहित शर्मा 2019 के क्रिकेट कैलेंडर ईयर में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में पहले नंबर पर पहुंच गए हैं। 1377 रन बनाकर विरोट कोहली इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। वेस्टइंडीज के बल्लेबाज शाई होप तीसरे नंबर पर हैं। होप ने वर्ष 2019 में 1345 रन जोड़ें हैं। 

वर्ष 2019 में कई ऐसी हस्तियां रही जो सुर्खियां बटोरने में सफल रहीं है. कई लोगों के लिए यह साल उपलब्धियों से भरा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में अपने दिए हुए योगदान के लिए ऐसी हस्तियों ने देश में ही नहीं दुनिया में भी नाम कमाया और वैश्विक फलक पर भारत का नाम भी रोशन किया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को इस साल भारत रत्न पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उनके दिए गए योगदान के लिए दिया गया। उनके साथ नानाजी देशमुख एवं भूपेन हजारिका को भी यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस साल का प्रतिष्ठित पुरस्कार फिलिप कोटलर पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतीक चिन्ह के साथ प्रधानमंत्री को एक प्रशस्तिपत्र प्रदान किया गया जिसमें उनके योगदान के बारे में बताया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री ने अथक ऊर्जा के साथ भारत की सेवा की है, साथ ही उनकी निःस्वार्थ सेवा की वजह से देश ने बेहतरीन आर्थिक, सामाजिक और प्रौद्योगिकीय विकास किया है। मोदी के नेतृत्व में भारत की पहचान अब नवाचार और मूल्यवर्धित विनिर्माण (मेक इन इंडिया) के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी, लेखांकन एवं वित्त जैसे पेशेवर सेवाओं के केन्द्र के रूप में उभरी है।

इसके अलावा भारत की प्रसिद्ध महिला मुक्काबाज मैरीकॉम, भारतीय वैज्ञानिक खुशबू मिर्जा भी सम्मानित हुई। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया। उनके साथ नोबेल प्राइज विजेताओं की सूची में उनकी पत्नी एस्थर डुफलो का भी नाम शामिल था। राजनीतिक क्षेत्र में तमाम झूठ फलाने के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। देखा जाए तो 2019 के आम चुनाव से करीब 5 माह पहले जनवरी 2019 में प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाते हुए कांग्रेस ने अचानक एक बम फोड़ा था, जिसे लोकसभा नतीजों ने एकदम फुस्स साबित कर दिया। कांग्रेस सबसे बड़े और अहम राज्य यूपी की 80 में से मात्र रायबरेली (सोनिया गांधी) की सीट पर सिमट कर रह गई। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस की परंगरागत सीट अमेठी को गंवा कर अपने समर्थकों के साथ-साथ प्रियंका गांधी को भी घोर निराशा से भर दिया। देश भर में कांग्रेस मात्र 52 सीटें जीत पाई (2014 में 44 सीटें थीं)। पू्र्वोत्तर के सात में से छह राज्यों में जहां कांग्रेस की तूती बोलती थी, वहां पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता जहाज छोड़कर भागने लगे! वह दौरदौरा ऐसा था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर बीजेपी दरवाजे खोल दे तो कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता बीजेपी में शामिल हो जाएंगे! बीजेपी के लिए मोदी को पीएम बनने की बात छोड़ दे तो कुछ खास नहीं रहा। मोदी-शाह की तूफानी रैलियों के बावजूद राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे बड़े और तेलंगाना तथा मिजोरम जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। आंध्र प्रदेश और सिक्किम में तो बीजेपी का खाता ही नहीं खुल सका था और महाराष्ट्र में वह विपक्ष में बैठने को मजबूर है। 


--सुरेश गांधी--

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