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गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

बिहार : IGIMS में एक चिकित्सक के द्वारा मेल नर्स को थप्पड़, 4 घंटे काम रूका

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पटना,22 अप्रैल। शेखपुरा में है इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान। इस संस्थान में सदैव कुछ-कुछ मसले को लेकर विवाद होते रहता है। कभी मरीजों की सेवा करने वालों के साथ तो कभी नर्स और चिकित्सकों के बीच नोंकझोंक होते ही रहता है। उसी तरह आज भी हुआ। एक ओर केंद्र सरकार के द्वारा कोरोना वाॅरियर्स को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अध्यादेश लाया जा रहा था, तो दूसरी ओर आपस में ही इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान के कोरोना वाॅरियर्स भीड़ गये। हुआ यह कि एक वार्ड में मेल नर्स सार्थक मिश्रा कार्यशील था। इतने में ही एक व्यक्ति आता है और मेल नर्स से कहता है कि हाथ में पहने के लिए ग्लब्स दो। दोनों शख्स दोनों से अनजान थे। बताते चले कि निहाल सिंह गुर्जर नामक मेल नर्स ने आदरपूर्ण पूछा कि क्या आप संस्थान का कर्मी हैंध् इतना कहना था कि खुद को चिकित्सक मानने वाले शख्स ने मेल नर्स पर एक थप्पर रसीद कर दिया। बाद में पता चला कि वह शख्स डाक्टर सार्थक मिश्रा था। फिर क्या था मेल और फिमेल नर्स बेमियादी हड़ताल पर चले गये। इसके बाद भत्र्ती मरीज अपने हाल पर आ गये। करीब 4 घंटे तक बीच-बचाव करने तथा संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक मनीष मंडल के हस्तक्षेप करके कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन देने के बाद ही मेल और फिमेल नर्स सेवाकार्य में शामिल हुए। गौरतलब है कि चिकित्सक परिचय पत्र विहिन था और न ही ड्र्ेस में ही था। और वह बिना परिचय दिए ही ग्लब्स देने की मांग करने लगा। यह जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति ग्लब्स की मांग करता है तो उससे पूछना ही पड़ता है कि आप संस्थान के कर्मी हैं क्याध् यह सवाल करने का मतलब नहीं कि आप किसी को थप्पर मार दीजिएगा। इस ओर संस्थान को ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि गलतफहमी का मौका नहीं बने।

डॉक्टरों पर हमला करने वालों की अब नहीं खैर नहीं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश पास करने में सफल हो गए। अध्यादेश में 7 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान है।कोरोना वॉरियर्स पर हो रहे हमले को लेकर मोदी सरकार सख्त हो गई है। बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कोरोना वॉरियर्स और हेल्थ वर्कस की सुरक्षा को लेकर नए अध्यादेश लाया गया. मोदी सरकार ने कहा कि देश में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कई जगह डॉक्टरों के खिलाफ हमले की जानकारी आ रही हैं। सरकार इन्हें बर्दाश्त नहीं करेगी. सरकार इसके लिए एक अध्यादेश लाई है। इसके तहत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

आइए जानते हैं अध्यादेश के बारे में
- सरकार की ओर से महामारी रोग अधिनियम में संशोधन के लिए नया अध्यादेश लाया गया है।
- अब कोरोना वॉरियर्स पर का हमला गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा।
- इस पूरे मामले की 30 दिनों में जांच पूरी होगी और एक साल में फैसला आएगा।
- हमले के मामले में 3 महीने से 5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
- कोरोना कमांडोज का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
- घटना की गंभीरता के आधार पर 50, 000 से 2 लाख तक का जुर्माना लगेगा।
- गंभीर मामले में 6 महीने से 7 साल तक की कैद की सजा सुनाई जा सकती है।
- गंभीर मामले में 1 लाख से 7 लाख तक जुर्माने का प्रावधान होगा.
- कोरोना वॉरियर्स के वाहन और क्लिनिक के नुकसान के मामले में आरोपियों से मुआवजे के रूप में बाजार मूल्य की दोगुनी दर ली जाएगी।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। अमित शाह ने डॉक्टरों को भरोसा दिलाया था कि उनके खिलाफ कोई हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार उनके साथ है। इसके बाद सरकार की ओर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून बनाने का फैसला किया गया। इसके साथ ही आज आईएमए द्वारा घोषित रात को मोमबती जलाने और कल काला बिल्ला लगाकर काम करने का आंदोलन रद्द कर दिया गया।

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