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शनिवार, 9 मई 2020

गुजरात के मोरबी से जमशेदपुर वापस आए प्रवासी मजदूर, कहा- ठेकेदारों ने वसूले पैसे

लॉकडाउन में गुजरात के मोरबी में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर ट्रेन टाटानगर स्टेशन पहुंची. आने वाले सभी प्रवासी पश्चिम सिंहभूम जिला के थे. वहीं मजदूरों ने खुलासा किया है कि मोरबी में ट्रेन से आने के लिये सेठ-ठेकेदारों की ओर से उनसे टिकट के पैसे वसूले गए हैं. 
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जमशेदपुर (आर्यावर्त संवाददाता)  लॉकडाउन में गुजरात के मोरबी में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर ट्रेन टाटानगर स्टेशन पहुंची. आने वाले सभी प्रवासी पश्चिम सिंहभूम जिला के थे. पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने बताया कि सभी प्रवासियों का थर्मल स्क्रीनिंग कर उनके जिला भेजा जा रहा है जहां जिला प्रशासन की ओर से प्रवासियों को अनाज मुहैया कराई जाएगी. वहीं मजदूरों ने खुलासा किया है कि मोरबी में ट्रेन से आने के लिये सेठ-ठेकेदारों की ओर से उनसे टिकट के पैसे वसूले गए हैं. जमशेदपुर में दुसरे चरण में स्पेशल ट्रेन से गुजरात मोरबी से 1187 प्रवासी मजदूर टाटानगर स्टेशन पहुंचे. शाम 4 बजकर 10 मिनट पर ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंची. आने वाले सभी प्रवासी मजदूर पश्चिम सिंहभूम जिले के रहने वाले हैं. इधर ट्रेन के आने से पहले जिला प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई थी. ट्रेन से आए प्रवासियों का थर्मल स्क्रीनिंग कर उन्हे खाना का पैकेट पानी का बोतल दिया गया जिसके बाद सिविल डिफेंस के सदस्यों ने उन्हें उनके बस तक पहुंचाया. इस दौरान टाटानगर स्टेशन में पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त, एसएसपी के अलावा कई अधिकारी मेडिकल की टीम के सिविल सर्जन और चाईबासा डीसी भी मौजूद रहे. पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने बताया कि सभी प्रवासी मजदूर पश्चिम सिंहभूम जिले के हैं जिन्हें वहां की जिला प्रशासन की टीम अपनी निगरानी में लेकर वापस जाएगी. जिला प्रशासन की ओर से सभी प्रवासियों को अनाज मुहैया कराई जाएगी. सभी होम क्वॉरंटाइन में रहेंगे. वहीं सरकार की ओर से नई रोजगार योजना से प्रवासी मजदूरों को जोड़ा जाएगा. इधर गुजरात के मोरबी से आये प्रवासी मजदूरों में महिलाएं भी शामिल थी. मजदूरों ने खुलासा किया कि मोरबी से टाटा आने के लिये सेठ-ठेकेदारों ने उनसे टिकट के पैसे लिए हैं. किसी से 700, किसी से 800 और किसी से टिकट के 900 लिया गया है. उनसे जब पूछा गया कि सरकार फ्री मजदूरों को पहुंचा रही है. उन्होने बताया कि उन्हें बाहर जाने से रोका गया था. ऐसे में उन्हें टाटा आने के लिए पैसे देने पड़े. अब वो वापस मोरबी नही जाएंगे यहीं खेती करेंगे.

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