झाबुआ (मध्यप्रदेश) की खबर 24 जुलाई - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

झाबुआ (मध्यप्रदेश) की खबर 24 जुलाई

चन्द्रषेखर ने   13 साल की उम्र में खाए 15 कोड़े, फिर कहलाए आजाद- सांसद गुमानसिंह डामोर
  • चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई थी कि चाहें कुछ भी हो जाए लेकिन वह जिंदा अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे- लक्ष्मणसिंह नायक ,
  • आजाद जयन्ती पर भाजपा ने किया आजाद को स्मरण अर्पित की पुष्पाजंलि
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झाबुआ । अमर शहीद चन्द्रशेखर आजार की 114 वीं जन्म जयंती पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा देश के सपूत को स्मरण कर उन्हे पुष्पांजलि अर्पित की गई । स्थानीय आजाद चैक स्थित आजाद प्रतिमा पर प्रातः 9 बजेे सांसद गुमानसिंह डामोर केे मुख्य आतिथ्य तथा जिला भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह नायक के विशेष आतिथ्य में  आजाद प्रतिमा का पुष्पमालायें पहिना कर उन्हे स्मरण कर उनके पद चिन्हो पर चलने का संकल्प लिया गया । इस अवसर पर  सांसद गुमानसिंह डामोर ने आजाद के जीवन वृत पर संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए लोहा लेने वाले चंद्रशेखर का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिसे के भाबरा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी जबकि माता का नाम जगरानी देवी था। गांव के ही स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद वे अध्ययन के लिए वाराणसी की ओर चले गए। वहां वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित हुए और असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। चंद्रशेखर इस दुनिया में महज 24 साल ही बिता पाए लेकिन उनसे और उनके साथी क्रातिकारियों से अंग्रेज खौफ खाया करते थे। श्री डामार ने कहा कि उन्होने 13 साल की उम्र में खाए 15 कोड़े, फिर कहलाए आजाद । वर्ष 1921 में महज 13 साल की उम्र के चंद्रशेखर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह संस्कृत कॉलेज के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। चंद्रशेखर को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उन्हें मजिस्ट्रेट के पास लेकर गई। वहां जब मजिस्ट्रेट ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने कहा आजाद, जब उनके पिता का नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा स्वाधीनता। इसके बाद उनसे उनके घर का पता भी पूछा गया। श्री डामोर ने कहा कि चंद्रशेखर ने पूरी निडरता के साथ जवाब देते हुए कहां जेल। उनकी तरफ से ऐसे जवाब सुनकर मजिस्ट्रेट गुस्से में आ गया और उन्हें 15 कोड़े मारने की सजा दी गई। छोटा बालक होकर इतनी बड़ी सजा मिलने के बाद भी वह डरे नहीं। कोड़े पड़ने से उनकी कमर लहू लूहान हो चुकी थी। जब भी उन्हें कोड़ा पड़ता तो वह महात्मा गांधी की जय बोलते। उसी दिन से उनके नाम के आगे आजाद जुड़ गया। इस अवसर पर जिला भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह नायक ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई थी कि चाहें कुछ भी हो जाए लेकिन वह जिंदा अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे। इसलिए जब 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में उन्हें चारों तरफ से घेर लिया था तो उन्होंने अकेले ही ब्रिटिश सैनिकों से मुकाबला किया। जब उनकी रिवाल्वर में आखिरी गोली बची तो उन्होंने खुद पर ही गोली चला दी, जिससे वह जिंदा न पकड़े जाएं। आजाद को डर था कि अगर वह जिंदा पकड़े गए तो अंग्रेजी हुकूमत को जड़ से मिटाने का उनका सपना अधूरा रह जाएगा। दरअसल आजाद अल्फ्रेड पार्क में भगत सिंह को जेल से निकालने समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने साथियों के साथ बैठक कर रहे थे लेकिन तभी उन्हें खबर लगी कि अंग्रेजों ने पार्क को चारों तरफ से घेर लिया है। आजाद ने अंग्रेजों से अकेले ही मुकाबला करते हुए अपने साथियों को पार्क से बाहर निकाल दिया, जिससे भारत की आजादी के लिए बनाई उनकी योजनाओं पर कोई प्रभाव न पड़े। जब उनकी रिवाल्वर में आखिरी गोली बची तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथ आने की वजाय खुद के जीवन को खत्म करना चुना और उस आखिरी गोली से अपना जीवन खत्म कर दिया।  इस अवसर पर बडी संख्या में नगर मंडल एवं जिला भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे । सांसद गुमानसिंह डामोेर एवं जिला भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह नायक ने आजाद की जन्म भूमि भाबरा भी पहूंच कर  आजाद स्मृति मंदिर मे जाकर नमन किया तथा श्रद्धासुमन अर्पित किये । आजाद के 114 वें जन्म दिवस पर इनके साथ श्रीमती सुरज डामोर,, जोबट के पूर्व विधायक माधोसिंह डावर, जिला पंचायत अध्यक्षा आलीराजपुर अनिता चैहान, नगर पंचायत भाबर की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला डावर, जिला महामंत्री अजय जायसवाल, भूपेश सिंगोड, अर्पित कटकानी सहित बडी संख्या में लोगों ने आजाद को नमन किया तथा उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित किये ।

देश की आजादी को अक्षम बनाये रखने के लिए आज भी आजाद की बलिदानी पंरपरा की आवश्यकता है,दौलत भावसार

झाबुआ । भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यकरणी सदस्य पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ट नेता दौलत भावसार ने शहिद सिरोमणी चंद्रशेखर आजाद की 114 वीं जयती पर उनका पूणग् स्मरण करते हुए श्रंद्वाजली अर्पित करते हुए कहा की देश की एकता अंख्डता को अक्षून बनाये रखने के लिए आज भी आजाद कि बलिदानी पंरपरा की आवश्यकता भारत देश को है । कांतिकारी आजाद के कार्य को लेकर पूरे देश व प्रदेश एंव जिले में राष्ट्र विरोधी ताकतो के खिलाफ हर राष्ट्र भक्त में वेचारित क्रांती का शंध नाद आजाद के क्रांतीकारी कार्य के भाती निरंतर प्रवा होना चाहिए। तभी आजाद के क्रांतीकारी कार्य और उनके बलिदान के प्रति हमारी सच्ची श्रंद्वाजली होगी यह उदगार आजाद की पूण्य तीथी के अवसर पर संदेश के रूप में जनता जर्नादन को देने की आवश्यकता है। आजादी के 70 दशक के बाद भी देश के अंदर राष्ट्र् विरोधी शक्तियां हमें चुनौती देते हुए नजर आ रही है। आज हमें भारत माता को परम वैभवशाली बनाने के लिए देश को आंतक से मुक्त, भ्रष्टचारी से मुक्ती बनाने के लिए वैचारिक कं्राती के माध्यम से जैहाद छेड़ने की आवश्कता हे।

भारतीय मजदूर संघ ने मनाया 66 वां स्थापना दिवस’
’भारतीय मजदूर संघ झाबुआ जिला अध्यक्ष बने संदीप मेहता, नवीन कार्यकारिणी की गई घोषणा’
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झाबुआ। भारतीय मजदूर संघ की 66वें स्थापना दिवस का 23 जुलाई को मनाया गया। उक्त आयोजन में आंगनवाड़ी, कार्यकर्ता, सहायिका महा संघ जिला इकाई झाबुआ भारतीय मजदूर संघ जिला इकाई झाबुआ की नवीन कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कोविड-19 के चलते  सभी सदस्यों की उपस्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 66 वे स्थापना दिवस का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सर्वप्रथम उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने संघ संस्थापक दतोपंत ठेंगडी, भारत माता व बाबा विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।यूनियन की उपाध्यक्ष श्रीमती रामकन्या बारिया द्वारा श्रमिक गीत के साथ समारोह को प्ररम्भ किया गया। भारतीय मजदूर संघ जिला अध्यक्ष संदीप मेहता ने कहा  भारतीय मजदूर संघ सिर्फ एक श्रमिक संगठन ही नहीं अपितु राष्ट्र निर्माण का अंग है। संघ संस्थापक दतोपंत ठेंगडी ने 23 जुलाई 1955 को भोपाल में बाबा विश्वकर्मा को साक्षी मानकर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की व देश के मजदूर आन्दोलन को ट्रेड यूनियन के वामपंथी मॉडल से मुक्ति दिलाई। भारतीय मजदूर संघ देश के प्रथम पायदान का श्रमिक संगठन है। जिसके लिए पहले राष्ट्र हित, फिर उद्योग हित व अंत में मजदूर हित है। इस अवसर पर यूनियन के उपाध्यक्ष प्रकाशचंद्र नीमा, जिला मंत्री राजेंद्र गोयल ने भी अपने विचार व्यक्त किए भारतीय मजदूर संघ के जिला संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा की संघ संस्थापक दतोपंत ठेंगडीजी के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गए हैं, क्योंकि आज पूरे देश में सिवाय भारतीय मजदूर संघ के सभी ट्रेड यूनियन राजनैतिक दल के अंग बन गये हैं। जबकि ठेंगडीजी का मानना था की मजदूरों का संगठन, मजदूरों द्वारा संचालित होना चाहिये तभी आन्दोलन से श्रमिक लाभान्वित हो सकते हैं। आयोजन में स्थापना दिवस आयोजन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे हैं आभार यूनियन के कोषाध्यक्ष मुकेश परमार ने माना।

नवीन जिला कार्यकारिणी की गई घोषणा’
यूनियन कार्य वृद्धि एवं मजदूरो के हितार्थ सहयोग सक्रिय भूमिका के लिए 2 वर्ष के कार्यकाल हेतु पदाधिकारियों की घोषणा भारतीय मजदूर संघ के जिला संयोजक गोपाल कृष्ण शर्मा द्वारा की गई जिसमें जिलाअध्यक्ष संदीप मेहता झाबुआ, उपाध्यक्ष प्रकाशचंद्र नीमा झाबुआ, उपाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह सिसोदिया झाबुआ, उपाध्यक्ष श्रीमती रामकन्या बारिया पारा, जिला मंत्री राजेंद्र गोयल पारा, सह मंत्री श्रीमती गायत्री सिनम ग्राम करवड़ पेटलावद ,सहमंत्री श्रीकांत भट्ट झाबुआ, सहमंत्री लोकेंद्र सिंह निनामा बनी पेटलावद,कोषाध्यक्ष मुकेश परमार मांडलीनाथू राणापुर, कार्यालय मंत्री रमेश परमार गोपाल कॉलोनी झाबुआ को बनाया गया। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका महासंघ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती गंगा गोयल ,जिला मंत्री श्रीमती जया वसुनिया, जिला अध्यक्ष श्रीमती कमला डिंडोर का मनोनयन किया  गया।

डा. रामषंकर चंचल की साहित्य साधना किया गया फिल्म का निर्माण

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झाबुआ ।   प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार डॉ रामशंकर चंचल के जीवन और साहित्य साधना पर अविस्मरणीय फिल्म निर्माण किया निर्माता विनय वर्मा ने। फिल्म में डॉ रामशंकर चंचल के जीवन और साहित्य की दुनिया का सचित्र वर्णन किया गया है । डॉ रामशंकर चंचल की अनेकानेक उपलब्धियों  को दिखाया है वहीं डॉ. चंचल से लिया साक्षात्कार है जो यादगार प्रभावशाली और  प्रेरणा  दायक ह,ै फिल्म खूब सूरत सुखद अहसास करती है जो हमें डॉ रामशंकर चंचल की साहित्य साधना पर गर्व महसूस कराती है कि झाबुआ में जन्मे डॉ रामशंकर चंचल देश और विदेश में अपनी कविताओं के माध्यम से पहचान बनाकर झाबुआ को  गौरवान्वित किया है । सचमुच झाबुआ जिले को आप पर गर्व महसूस होता है। फिल्म के निर्माता विनय वर्मा के बारे में अपनी  बात रखते डॉ चंचल ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि मेरे शहर में विनय वर्मा जैसे कुशल  निष्ठावान निर्देशक निर्माता ह,ै जिन्होंने फिल्म के हर दृश्य को पूरी ईमानदारी से फिल्माया है ।

जैन पत्रकार संगठन आईजा ने किया पुजारियों का बहुमान - श्रीसंघ अध्यक्ष व समाजसेवी रहे उपस्थित

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थांदला। वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के ले लिए देश के प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लॉक डाउन लगाया था जिसके परिणाम स्वरूप सभी व्यक्ति अपने अपने घरों में बन्द हो कर रह गए थे। ऐसे में डॉक्टर्स, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अनेक सामाजिक संगठनों ने कोरोना वेरियर्स बनकर जनता की सेवा कर संकट काल में मानवता धर्म निभाया था। ऐसे विकट समय में अनेक जिंदगी प्रभावित हुई थी उनमें विभिन्न मंदिरों में सेवा कर रहे पुजारी भी शामिल है।मंदिर, देरासर उपाश्रय आदि धार्मिक स्थलों की सेवा रख रखाव मन्दिर के पुजारियों ने ही की थी। विकट समय में भी विश्व कल्याण की भावना को लेकर उन्होंने जन - जन की प्रार्थना प्रभु चरणों तक पहुँचाने का कार्य भी किया। उनके सेवा भाव को नमन करते हुए ऑल इण्डिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) ने अनूठा आयोजन नगर के अति प्राचीन तीर्थ श्रीचिन्तामणि पार्श्वनाथ मन्दिर (पूरा का मन्दिर) पर कर जावरा के विभिन्न जिनालय में सेवा दे रहे पुजारियों को कोरोना योद्धा बहुमान से किया गया। आयोजन को शासन के निर्देशों का पालन कर शोशल डिस्टेंश के साथ मास्क का उपयोग करते हुए किया गया। यही वजह है कि कार्यक्रम में केवल संघ प्रतिनिधि के रूप में श्रीसंघ के वरिष्ठजन जैन रत्न ज्ञानचंद्र चोपड़ा - अध्यक्ष श्री त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ हेमेंद्र सूरी जावरा, आजाद सिंह ढड्ढा - अध्यक्ष श्री ऋषभदेव पार्श्वनाथ मंदिरान ट्रस्ट जावरा, प्रकाशचंद्र मोदी - अध्यक्ष श्री त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ जयंत सूरी, अभय सुराणा - मार्गदर्शक प्रेस क्लब, बाबूलाल  नाहर - वरिष्ठ श्रावक समाजसेवी, संजय चैधरी - अध्यक्ष प्रेस क्लब, चंदनमल कोठारी - सचिव श्री ऋषभदेव पार्श्वनाथ मंदिरान ट्रस्ट को आतिथी के रूप में आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर की गईं। सबसे पहले प्रदेश के पूर्व राज्यपाल के निधन पर उन्हें दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई उसके बाद आईजा पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत मोतियों की माला व आईजा दुपट्टा पहनकर किया।कार्यक्रम के अध्यक्षीय स्वागत उद्बोधन में आईजा के प्रदेशाध्यक्ष पवन नाहर ने कहा कि आईजा हमेशा से ही समाज के हर वर्ग के लिये सकारात्मक सोच रखते हुए अनूठे आयोजन करता आया है, पुजारियों के सम्मान की सोच उसी का परिणाम है। आज देश कठिन समय से गुजर रहा है लेकिन इसमें भी हमें सकारात्मक बनकर एक दूसरे की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है व आत्मचिंतन का भी कि हम संघ समाज के लिये क्या कर सकते है अपने देश के लिये क्या कर सकते है। आईजा के प्रदेश मंत्री प्रदीप जैन द्वारा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुण्डिया व आईजा परिवार कि ओर से कठिन परिस्थितियों में अमूल्य समय देने पर अतिथियों व पुजारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। आगन्तुक अतिथियों ने भी अपने उद्बोधन में आईजा के इस कार्यक्रम को अदभुत व ऐतिहासिक बताते हुए सभी आयोजकों को धन्यवाद दिया व कहा कि संघ समाज भी समय समय पर पुजारियों के हित की रक्षा करता रहा है व आगे भी वह उनकी मदद करेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे संयोजक आईजा के महासचिव राजकुमार हरण ने अपने आईजा पुत्र भावेश व अंकित के साथ मिलकर भावना स्टुडियो कि ओर से पार्शनाथ भगवान व मंगल दीवों की डिजिटल आरती की एल ई डी लाइट वाली मनमोहक तस्वीरे मन्दिरजी में भेंट की।

इन पुजारियों का हुआ सम्मान
पुजारियों का सम्मान कार्यक्रम में श्री राज राजेंद्र वाटिका जैन मंदिर के पुजारी चंपालाल शर्मा, श्री राजेंद्र सूरी जैन दादावाड़ी के पुजारी नरेंद्र ठाकुर, श्री आदिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर शुक्रवारिया के पुजारी लोकेश शर्मा, श्वेतांबर जैन मंदिर पिपली बाजार के पुजारी भगवती लाल शर्मा, धर्मानाथ जैन मंदिर जवाहर पेठ के पुजारी सत्यनारायण शर्मा, चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर (पूरा का मंदिर) के पुजारी सचिन शर्मा, शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर चैपाटी के पुजारी बद्रीलाल शर्मा, मनमोहन पार्श्वनाथ मंदिर के पुजारी प्रदीप व्यास आदि का सम्मान शाल श्रीफल पुष्पमाला एवं कोरोना योद्धा के आकर्षक सम्मान पत्र के द्वारा किया गया। आयोजन में आईजा में सक्रिय योगदान के लिये आईजा के नीलेश बरमेचा -इंदौर, राकेश डूंगरवाल - करवड़, मनीष वाघेला - थांदला को भी सम्मानित किया गया। वही राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं महिला बाल विकास आयोग कि ओर से प्रदेशाध्यक्ष पवन नाहर ने आईजा महासचिव को भी शाल-श्रीफल व उत्कृष्ट सेवा सम्मान की शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।

नगर के वरिष्ठ समाजसेवी भी रहे उपस्थित
कोरोना काल पर लघु आयोजन में नगर के वरिष्ठजन श्रेणिक धारीवाल, आनंदीलाल संघवी, संजय मेहता, राजकुमार मारवाड़ी,  मोनू खेमसरा, दिवेश कटारिया, अदिश ढड्ढा के साथ आईजा के पदाधिकारी सदस्य आदि भी उपस्थित रहे।

 क्रांतिकारी अमर बलिदानी चन्द्रशेखर आजाद व पंडित बाल गंगाधर तिलक एव की जन्म जयंती धूमधाम से मनाई
पत्रकारों जनप्रतिनिधियों व भाजपा मंडल के कार्यकर्ताओं ने दी पुष्पांजलि लगाए नारे
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थांदला। महान क्रान्तिकारी स्वराज्य की मांग करने वाले भारतीय को एकता सूत्र में बांधने वाले पंडित बाल गंगाधर तिलक एव अमर बलिदानी महान कांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद जी की जन्मजयंती आज भाजपाइयों द्वारा आजाद मार्ग पर  स्थित आजाद प्रतिमा पर माल्यार्पण करके मनाई गई, जहा पर सभी कार्यकर्ताओं द्वारा ष्चंद्रशेखर आजाद अमर रहेष् एव ष्बाल गंगाधर तिलक अमर रहेष् के नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने आजाद जी के जीवन पर प्रकाश डाला द्य उस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष बंटी डामोर,पूर्व नगर परिषद उपाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, पूर्व पिछड़ा मोर्चा जिलाध्यक्ष संतोष सोनी, व्यापारी प्रकोष्ठ अनिल भंसाली, जिला खेल प्रकोष्ठ समर्थ उपाध्याय, भाजयुमो जिला महामंत्री संजय भाबर, नगर मण्डल अध्यक्ष पारस तलेरा, महामंत्री सुरेश राठौड़, आई टी सेल के अजय सेठिया, दीपेश शाहजी, राकेश सोनी, दीपक राठौड़, राहुल पांचाल,मनीष वाघेला,राजू धानक,अक्का राठौड़,विष्णु सोनी एव कार्यकर्ता पत्रकारगण आदि उपस्थित थे।

जैन चातुर्मास में आत्म शुद्धि के साथ ही महावीर के बताये मार्ग पर चलने का लिया जावेगा सकल्प
चातुर्मास का महिमा अतुल्य एवं आत्म शांति प्रदाता होती है- संजय मेहता
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झाबुआ । श्री जैन श्वेताम्बर श्री संघ के अध्यक्ष संजय मेहता ने  पवित्र चातुर्मास पर्व को लेकर इसकी महिमा की जानकारी देते हुए बताया कि जैन चातुर्मास पर्व विश्व में सर्वाधिक समय तक चलने वाला पर्व है, जो सम्पूर्ण वर्ष के एक तिहाई भाग यानि बारह महीनों में से चार महीनों तक मनाया जाने वाला यह अकेला ऐसा पर्व समारोह है। यह गिनीज बुक में दर्ज होना चाहियें। जैन चातुर्मास पर्व विश्व में अकेला ऐसा पर्व है, जिसमे राग का समावेश नहीं, वीतरागता का समावेश है। जैन चातुर्मास पर्व शारीरिक आनंद का नही, आत्मा के आनंद का पर्व है। जैन चातुर्मास पर्व घूमने फिरने का नही, हो सके जहां तक एकांतवास का पर्व है।जैन  चातुर्मास  पर्व की खुशियाँ मनाने के लिए बार बार विविध आइटम्स खाने का नही, बल्कि एकासना, आयम्बिल या उपवास रखने का पर्व है।जैन चातुर्मास पर्व होटल, मॉल में जाकर सांसारिक खुशियाँ मनाने का नही, आराधना भवन जाकर आत्मिक खुशियाँ मनाने का है। जैन चातुर्मास पर्व थियेटर में जाकर सिनेमा देखने का पर्व नही, जिनालय में जाकर वीतराग प्रभु को निहारने का पर्व है। जैन चातुर्मास पर्व यहाँ-वहाँ घूमकर समय की बर्बादी का पर्व नही, समय का सद् उपयोग कर गुरुवाणी सुनकर जीवन में धारण करने का पर्व है। जैन चातुर्मास पर्व संसार के भँवर में फसाने वाला नही, संसार सागर से तिराने वाला पर्व है.. हम सभी चातुर्मास की आराधना में जुड़कर अपनी आत्मा का कल्याण करे । श्री मेहता ने बताया कि जैन समाज में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इस अवधि में समाज के संत, मुनि, साध्वी एक निश्चित स्थान पर विराजमान होकर चातुर्मास करते हैं। इस बार चातुर्मास 4 जुलाई से प्रारंभ होकर जिसका समापन 29 नवंबर को होगा। वर्ष 2020 के पश्चात् विक्रम संवत् 2080 में एक श्रावण मास की अधिकता रहेगी जिससे इस वर्ष में चातुर्मास पांच माह का रहेगा। उल्लेखनीय है कि जैन समाज द्वारा चातुर्मास के चार माह विशेष धर्म-आराधना की जाती है। झाबुआ में भी समग्र जैेन समाज में चातुर्मास को लेकर तप आराधना का क्रम प्रारभ हो चुका है तथा कोराना के चलते इस बार अपने अपने घरो ं पर रह कर ही आराधना, सामायिकी, तपस्या आदि किये जावेगें । इस एकल साधना का भी जैन धर्मो के अनुसार काफी महत्व है।

निविदाए आमंत्रित

झाबुआ।  जिले में नोवेल कोरोना वायरस कोविड-19 संक्रमण काल के दौरान नवीन तकनीकी वाट्सअप चेटबोट के माध्यम से सेवा प्रदान किये जाने वाले प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिये लोक सेवा प्रबधंन की सेवाओं के प्रदाय के लिये वाट्सअप चेकबाॅट एवं वेब पोर्टल तथा जिला प्रशासन झाबुआ का आधिकारिक वाट्सअप चैकबाॅट अकांउट बनाया जाना है। इस वाट्सअप चैकबाॅट अकांउट एवं वेब पोर्टल बनाये जाने के कार्य के लिये निविदाये आमंत्रित की गई। निविदा प्रपत्र जिले की वेब साईट ूूूण्रींइनंण्दपबण्पद एवं कार्यालयीन समय में कार्यालय पर उपलब्ध हैं। निविदा प्रपत्र भरकर कार्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2020 है। अधिक जानकारी के लिये कार्यालय कलेक्टर /जिला प्रबंधक (लोक सेवा प्रबंधन विभाग) से सम्पर्क किया जा सकता है।

श्री कनोज द्वारा कार्यभार ग्रहण

झाबुआ। संयुक्त आयुक्त सहकारिता एवं संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं इंदौर संभाग श्री जगदीश कनोज द्वारा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित झाबुआ के प्रशासक पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया गया है।

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