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शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

बिहार : पुल बहने को विभागीय अधिकारी इसे प्राकृतिक आपदा बता रहे हैं

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किशनगंज. एक बार फिर निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो गया.इस बार कनकई नदी की तेज धारा में निर्माणाधीन पुल बह गया. लोगों का कहना है कि नदी की रूट बदलने से विनाशकारी परिणाम सामने आया.26 मीटर लंबा इस पुल का 1 करोड़ 42 लाख की लागत से बना पुल बह गया.पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद एप्रोच बनाया जा रहा था.इसी बीच बुधवार को नदी के तेज प्रवाह में पुल बह गया.हालांकि निर्माण स्थल पर कोई शिलापट्ट या बोर्ड नहीं लगाया गया है. विभागीय अधिकारी इसे प्राकृतिक आपदा बता रहे हैं. दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत पत्थरघटी पंचायत के बड़ा गुआबाड़ी से कुढ़ेली जाने वाली सड़क पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पुल का निर्माण किया जा रहा है.ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा एक करोड़ 42 लाख की लागत से कनकई नदी पर 26 मीटर लंबा पुल का निर्माण कार्य विगत छह माह से चल रहा है. पथरघट्टी के ग्वालटोली के पास कनकई नदी का बहाव तेज हो गया है. जिसके कारण कच्ची सड़क तेजी से कटती गई. इस दौरान निर्माणाधीन पुल के एप्रोच पर चचरी बनाकर लोग आनाजाना कर रहे थे.पुल लगभग बनकर तैयार था, लेकिन एप्रोच पथ नहीं बनने के कारण फिलहाल इस पर से दो पहिया वाहन व पैदल आवागमन हो रहा था. मंगलवार की रात को उद्घाटन से पहले ही 60 डिग्री के एंगल पर झुक गया. पुल इस कदर झुक चुका है कि एप्रोच पथ की दीवार अलग हो चुकी है.पुल लगभग धाराशायी होने की कगार पर है.

आखिर यहां के लोग अब कैसे आएंगे जाएंगे ये बहुत बड़ा और बेहद गंभीर सवाल खड़ा हो गया है. आपको बता दें कि कुछ महीनों पहले गोपालगंज में भी नए बने अप्रोच पुल के टूट जाने से राज्य में जमकर सियासत हुई थी.अब पुल के एक हिस्से के धंस जाने से उधर का पूरा इलाका टापू की शक्ल ले चुका है. लोगों का कहना है कि 20 मीटर डायवर्सन को नहीं बांधने के कारण करोड़ों का नुकसान हो चुका है.  अप्रोच रोड की मरम्मती होते ही आवाजाही शुरू हो जाती. लेकिन उद्घाटन से पहले ही पुल जमीदोंज हो गया. गौरतलब है कि साल 2017 में आई प्रलयंकारी बाढ़ में दिघलबैंक प्रखंड पूरी तरह से तबाह हो गया था. जिसमें गोआबाड़ी-कुढ़ेली के बीच भी सड़कें कटीं. बाद में वहां पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ. लेकिन लोगों की उम्मीद पूरी होने से पूर्व ही उस पर पानी फिर गया. ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में अनियमितता बरती गई है. संवेदक और अभियंता ने नियमों को ताक पर रख कर पुल निर्माण कार्य किया है. ग्रामीणों के इस बयान के बाद मामले की लीपापोती करने का काम शुरू हो चुका है. संवेदक मो नदीम ने इसे प्राकृतिक आपदा बताया है.

सर्वविदित है कि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब उल्टी गिरती शुरू हो गई है. कभी भी तारीखों का ऐलान हो सकता है. चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले राजनीतिक पार्टियों अपने तरकश से बयानों के तीर चला रही हैं . नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस बार सीएम नीतीश कुमार के विकास के मॉडल पर वार करना चाहते हैं. इसलिए वो लगातार बिहार सरकार की कमियों को गिना रहे हैं. इस पुल के बह जाने के बाद  तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर हमला किया है. तेजस्वी ने ट्वीट कर लिखा है कि किशनगंज़ जिला में करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन सुशासनी पुल उद्घाटन से पहले टूट गया. देखते है 15 वर्षों की भ्रष्टाचारी सरकार और 60 घोटालों के प्रबन्ध संरक्षक कर्ता श्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी इसका दोष विपक्ष या प्रकृति में से किसे देते है? सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राय के साथ अन्य लोगों का कहना है कि इनके कारनामा से ही कहीं हाथ से कुर्सी भी बह न जाए? यह कयास लगाया जा रहा है.

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