बिहार : 'युवा हल्ला बोल' से जुड़े बेरोजगार थाली और ताली बजाकर मोदी सरकार को जगाएंगे - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

बिहार : 'युवा हल्ला बोल' से जुड़े बेरोजगार थाली और ताली बजाकर मोदी सरकार को जगाएंगे

5 सितंबर को शाम 5 बजे से 5 मिनट के लिए ताली, थाली, घंटी बजाकर प्रधानमंत्री से मांग करेंगे कि देश के एग्जाम वारियर्स के साथ संवाद करें, मन की बात नहीं पर परीक्षा पर चरचा( ParikshaPeCharcha ) करें और बेरोज़गारी की समस्या का समाधान करें..
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पटना,4 सितम्बर। बेरोज़गार युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश कम होता नहीं दिख रहा। शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी सरकारी भर्तियों के लिए ‘युवा हल्ला बोल’ जारी रहा। ‘युवा हल्ला बोल’ का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने कहा कि एसएससी और रेलवे की लाखों भर्तियों को लेकर देशभर के छात्र आंदोलित हैं। लेकिन कोरोना के कारण सड़क पर उतरने की बजाए डिजिटल आंदोलन चला रहे हैं। छात्रों ने अपने घर बैठे ही जिस तरह की ऊर्जा और एकजुटता का परिचय दिया है, वो अतुलनीय है। ऐसे वक्त में जब जेईई नीट से लेकर एसएससी और रेलवे भर्ती तक का मुद्दा गरमाया है, तब ‘युवा हल्ला बोल’ लगातार छात्रों की आवाज़ बना हुआ है। एक तरफ इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षार्थियों की मदद के लिए हेल्पलाइन चलाया जा रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों के मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर ला दिया है। मंगलवार को छात्रों ने सोशल मीडिया पर जमकर ताकत दिखाई और धमाल मचाया। #SpeakUpForSSCRailwayStudents के दुनियाभर में ट्विटर ट्रेंड होने के कुछ ही घंटों में कर्मचारी चयन आयोग एसएससी ने एक कैलेंडर जारी किया। ‘युवा हल्ला बोल’ के कॉर्डिनेटर गोविंद मिश्रा का कहना है कि यह कैलेंडर एक लॉलीपॉप से ज़्यादा कुछ नहीं है। कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाएं हैं जो सालों से पूरी नहीं हुई है। साथ ही, रेलवे भर्ती की दो बड़ी परीक्षाएं की तो तारीख भी नहीं बताया जा रहा है डेढ़ साल से।



लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फरवरी 2019 में भारतीय रेल ने Non Technical Popular Categories के 35 हज़ार से ज़्यादा और Group D के एक लाख से ज़्यादा पदों पर भर्ती निकाली थी। आवेदन शुल्क के नाम पर छात्रों से 500 रुपये भी वसूले गए। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने अब तक प्रारंभिक परीक्षा नहीं करवाया है। यहाँ तक कि परीक्षा की तारीख का भी कोई अतापता नहीं। रेलवे की इन दो भर्तियों के लिए कुल 2 करोड़ 42 लाख आवेदन आए। क्या इससे आप अंदाजा लगा पा रहे हैं कि यह मुद्दा देश के कितने बड़े वर्ग को छूता है? इस अन्याय का प्रभाव 2 करोड़ 42 लाख परिवारों पर पड़ रहा है, मतलब दस करोड़ से भी ज़्यादा भारतीय नागरिकों पर। अगर जो 500 रुपये वसूले गए थे उसका हिसाब भी लगाया जाए तो पता चलेगा कि यह सरकार गरीब बेरोज़गार छात्रों से लगभग एक हज़ार करोड़ रुपये इक्कठा करके डेढ़ साल से बैठी है। यह घोर अन्याय है। सरकार ऐसा इसलिए कर पाती है क्योंकि आपको और हमको फर्क नहीं पड़ता। जिनपर इसका सीधा असर पड़ता है, उनकी आवाज़ छीन ली गयी है। देश का मीडिया दिखाता नहीं, विपक्ष उठाता नहीं और सरकार को सरोकार नहीं। अनुपम ने बताया कि देशभर के छात्रों ने जिस मजबूती से एकजुट होकर आवाज़ उठाई है वो जारी रहना चाहिए। जब तक समाधान नहीं होगा, तब तक हम शांत नहीं होंगे। चाहे आप सीधे तौर पर पीड़ित हों या न हों, अन्याय के खिलाफ बोलने में सबको एकजुट होना पड़ेगा। जब तक हम सोचते रहेंगे कि ये मेरा मुद्दा नहीं है, वो मेरा मुद्दा नहीं है, तब तक हमें भी अपने किसी मुद्दे पर कभी न्याय नहीं मिलेगा।

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