बिहार : इसी आंकड़ा को लेकर सुशासन का दम्भ भर रहे नीतीश कुमार - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 29 अक्तूबर 2020

बिहार : इसी आंकड़ा को लेकर सुशासन का दम्भ भर रहे नीतीश कुमार

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पटना। एनडीए के शासन काल में बिहार में अपराध दर में काफी गिरावट आई है। पूरे देश में अब बिहार अपराध के मामले में 23 वें नंबर है। बिहार में बड़े अपराध की घटना से लेकर सामूहिक नरसंहार जैसी घटनाओं पर विराम लग गया है।सीएम नीतीश कुमार इसी आंकड़ा को लेकर कूद रहे हैं । बिहार संज्ञेय अपराध के मामले में देश में 23वें स्थान पर है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक संज्ञेय हत्या के मामले में बिहार 11 वें और लूट में 16 वें स्थान पर है। एनसीआरबी द्वारा हाल में ही सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के वर्ष 2018 के अपराध के आंकड़े जारी किए गए हैं। मीडिया में आ रही अलग-अलग खबरों के बाद पुलिस मुख्यालय ने बिहार के संदर्भ में अपनी स्थिति स्षष्ट कर दी।

2017 में बिहार में अपराध दर

एडीजी सीआईडी विनय कुमार और एडीजी कानून-व्यवस्था अमित कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संज्ञेय अपराध की संख्या बढ़ी है पर अपराध दर में कमी आई है। 2018 में बिहार में अपराध की दर प्रति एक लाख की आबादी पर  222.1 रही, जो साल 2017 में 223.9 थी। राष्ट्रीय औसत 385.5 से तुलना करें तो यह काफी कम है। अपराध दर के मामले में देशभर में बिहार का स्थान पिछली बार भी 23 वां ही था। वहीं आईपीसी के तहत दर्ज घटनाओं के हिसाब से बिहार का स्थान देश में 22 वां है।

बिहार में हत्या की दर

एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़े में अलग-अलग शीर्ष में अपराध की दर को भी दर्शाया गया है। हत्या के मामले में बिहार की अपराध दर 2.5 रही जो कि 2017 में 2.7 थी। वहीं इसका राष्ट्रीय औसत 2.2 है। हत्या के मामले में बिहार देशभर में 11 वें नंबर पर है। इसी तरह डकैती में 0.2 की अपराध दर के साथ बिहार तीन राज्यों के साथ 16 वें स्थान पर है। लूट में बिहार की अपराध दर 1.5 रही और वह दो राज्यों के साथ 17 वें पायदान पर है। गृभेदन में 29 वां, चोरी व सामान्य अपहरण में 15 वां, महिला अपराध में 29 वां और बलात्कार में बिहार का 36 वां स्थान है। एडीजी विनय कुमार के मुताबिक हत्या के प्रयास मामले में बिहार की अपराध दर वर्ष 2017 के 9.1 के मुकाबले 2018 में 6.1 रही।

क्या होती है अपराध दर

देश में कई ऐसे राज्य हैं, जहां की आबादी काफी ज्यादा है। वहीं कई राज्य छोटे हैं और उनकी आबादी भी कम है। इसी वजह से राज्यों के हिसाब से आपराधिक घटनाओं की तुलना नहीं की जा सकती। इसका विश्लेषण अपराध दर के आधार पर होता है। अपराध दर का मतलब प्रति एक लाख की आबादी पर दर्ज किए गए मामले होते हैं। यानी एक लाख की आबादी पर कितनी घटनाएं हुई इसी आधार पर एनसीआरबी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों का विश्लेषण करता है।

पटना के अपराध के आंकड़ों को जांचा जाएगा

एनसीआरबी ने राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के साथ देश के 19 बड़े शहरों के अपराध की स्थिति पर भी आंकड़ा जारी किया है। इसमें पटना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन 19 शहरों में संज्ञेय अपराध के मामले में पटना का स्थान 7 वां है। वहीं हत्या में 17 वां, बलात्कार में 12 वां, लूट में 15 वां और गृहभेदन में 7 वां है। एडीजी के मुताबिक साल 2017 के पटना के आंकड़े में पूरे जिले के अपराध को शामिल किया गया था जबकि आबादी सिर्फ शहर की ली गई थी। वहीं हमारे कई थाने ऐसे हैं जिनका इलाका शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। यही वजह है कि एक बार इस संबंध में एनसीआरबी से बात की जाएगी।  

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