किशोरियों ने 18 वर्ष से पूर्व शादी न करने का संकल्प लिया - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

किशोरियों ने 18 वर्ष से पूर्व शादी न करने का संकल्प लिया

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पटना. सभ्य समाज ने बाल विवाह को मानव विकास के लिए एक नकारात्मक सूचक और बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया है. इससे बच्चे पूरी शिक्षा हासिल करने से वंचित रह जाते हैं. उन्हें कौशल विकास के अवसर नहीं मिल पाते हैं. विवाह से उपजी जिम्मेदारियां उन्हें पनपने और अपने जीवन के बारे में सपने देखने के अधिकार से वंचित कर देती हैं. आज गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति एवं सेव द चिल्ड्रन के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी में स्थित कमला नेहरू नगर,पटना में बाल विवाह के विरुद्ध किशोरियों के द्वारा चेतना रैली आयोजित की गयी. इस चेतना रैली का नेतृत्व चाइल्ड चैंपियन रोशनी कुमारी ने किया.इनके नेतृत्व में 70 से ज्यादा किशोरियों ने भागीदारी निभाई.कम उम्र में बच्चों, ख़ास तौर पर लड़कियों का यौन शोषण भी हो रहा  है. यौन शोषण के बाद बच्ची की हत्या कर दी जा रही है.वहीं कम उम्र के विवाह का दुष्परिणाम भी होता है, कम उम्र में गर्भावस्था और कम उम्र में गर्भावस्था का परिणाम होता है, लड़की के मरने की ज्यादा आशंकाएं, बच्चों में कुपोषण, विकलांगता और शिशु मृत्युदर में बढ़ोत्तरी की आशंका. इसके आलोक में चेतना रैली में शामिल किशोरियों ने 18 वर्ष से पूर्व शादी न करने का संकल्प लिया.अपने आसपास के पड़ोसी दोस्तों को जागरूक करने का भी संकल्प लिया. इस अवसर पर समिति की ओर से प्रदीप प्रियदर्शी एवं सेव द चिल्ड्रन के कार्यकर्ता कार्यकर्ता मंजुला ढूंढो, राजीव कुमार राणा रंजीत फैंसी मीठी शामिल हुए. मंजू डुंगडुंग ने कहा कि आज भी बाल विवाह जारी है.इस सामाजिक बुराई के खिलाफ सरकार ने मानव श्रृंखला बना जनजागरण व जनमत तैयार की थी.उन्होंने कहा कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आमलोगों को जागना जरूरी है. इसमें गैर सरकारी संस्था सड़क अहम भूमिका अदा कर सकती है.  उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर, कुपोषण जो वृद्धि को रोकता है, विद्यालय न जाने वाले बच्चे, बाल मजदूरी, बाल विवाह, किशोर जन्म, संघर्ष द्वारा विस्थापन तथा बाल हत्या.वे कारण जो चरम हिंसा और संघर्ष से अलग होते हैं, प्रायः उनके घरों के परिवारों द्वारा ही संचालित होते हैं; जल्द विवाह और गर्भधारण; बाल मजदूरी, खराब स्वास्थ्य और विद्यालय जाने में असमर्थ होना.

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