वाम दलों के आह्वान पर पूरे बिहार में प्रतिवाद, सड़क पर उतरे माले महासचिव - Live Aaryaavart

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बुधवार, 2 दिसंबर 2020

वाम दलों के आह्वान पर पूरे बिहार में प्रतिवाद, सड़क पर उतरे माले महासचिव

  • बुद्धा स्मृति पार्क में आयोजित हुई सभा, प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया

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पटना 2 दिसंबर, किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग कर रहे किसानों पर बर्बर दमन के खिलाफ आज पटना में भाकपा-माले सहित अन्य वाम दलों के आह्वान पर बुद्धा स्मृति पार्क में सभा आयोजित हुई और फिर डाकबंगला चैराहे पर प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया. आज के कार्यक्रम में भाकपा-माले, भाकपा और सीपीएम के अलावा राजद के नेताओं ने भी भाग लिया. मुख्य रूप से माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य, राजद नेता आलोक मेहता, सीपीआई के नेता कन्हैया कुमार, सीपीएम के राज्य सचिव अवधेष कुमार, माले के राज्य सचिव कुणाल, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के बिहार-झारखंड के प्रभारी राजाराम सिंह, धीरेन्द्र झा,  विधायक दल के नेता महबूब आलम, षषि यादव, केडी यादव, उमेष सिंह, अभ्युदय सहित बड़ी संख्या में वाम दलों के नेता - कार्यकर्ता उपस्थित थे. प्रतिरोध सभा में बड़ी-बड़ी तख्तियों के साथ माले व वाम दलों के नेता-कार्यकर्ता दिल्ली किसान आंदोलन के समर्थन में नारे लगा रहे थे और तीनों काले कानूनों की वापसी की मांग कर रहे थे. सभा के उपरांत पार्क से डाकबंगला चैरहा तक मार्च निकला और फिर डाकबंगला चैराहा पर प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया. इस मौके पर माले महासचिव ने कहा कि वार्ता के नाम पर मोदी ने किसानों को अपमानित किया है. एक तरह का पैटर्न बन गया है कि सरकार पहले ऐसे आंदोलनों को दबाती है, गलत प्रचार करती है, दमन अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी जब आंदोलन नहीं रूकता, तब कहती है कि यह सबकुछ विपक्ष के उकसावे पर हो रहा है. कृषि कानूनों के बारे में सरकार कह रही है किसान इसे समझ नहीं पा रहे हैं. तो क्या पंजाब जैसे विकसित प्रदेषों के किसानों को अब खेती-बारी सीखने के लिए आरएसएस की षाखाओं में जाना होगा़. सभा को उक्त नेताओं के अलावे राजाराम सिंह, अरूण मिश्रा, गजनफर नबाव आदि ने भी संबोधित किया. वाम नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार और बिहार की नीतीष सरकार घोर किसान विरोधी है. आज पूरा पंजाब सरकार के खिलाफ लड़ रहा है. कल पूरा देष मोदी सरकार के खिलाफ लड़ेगा. यह भी कहा कि बिहार की नीतीष सरकार केवल डींगे हांकती है लेकिन उसने 2006 में ही अपने यहां मंडियों को खत्म कर दिया था. आज बिहार के किसानों की हालत सबसे खराब है. आने वाले दिनों में बिहार में भी किसान आंदोलन का नया ज्वार आएगा. बिहार सरकार किसानों के धान खरीद की गारंटी नहीं कर रही है. वाम नेताओं ने कहा कि बिहार में वाम व जनवादी दलों के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन संगठित होने लगा है, यदि समय रहते सरकार ने तीनों काले कानूनों को वापस नहीं लिया, तो पूरे बिहार में आंदेालन चलाया जाएगा.

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