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सोमवार, 25 जनवरी 2021

बिहार : नए कृषि कानून से जन वितरण प्रणाली खत्म हो जाएगी" : प्रीति सिन्हा

  • "किसानों का आंदोलन आम आदमी की रोटी बचाने के लिए है": उमेश सिंह
  • "किसानों के साथ खड़ा होना ही आज का सच्चा देशप्रेम है": ग़ालिब
  • "किसानों के साथ हम पटना के लोग" नागरिक अभियान के सातवें दिन दानापुर में जुटे सैकड़ों लोग
  • मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट हो उठाई तत्काल रद्द करने की मांग
  • जनगीत और कवितापाठ से लोगों को किया जागरूक

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पटना ( 25 जनवरी 2021) :
तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आज गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर दानापुर स्टेशन दक्षिणी परिसर के बाजार पर ऑल इंडिया पीपल्स फोरम (एआइपीएफ) के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम "किसानों के साथ हम पटना के लोग" में राजधानी के नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने कृषि कानूनों के जनविरोधी पहलुओं से लोगों को अवगत कराते हुए इनके खिलाफ आवाज़ उठाने का आह्वान किया. कार्यक्रम की मुख्य वक्ता 'फिलहाल' पत्रिका की संपादक प्रीति सिन्हा ने कहा कि इन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से शुरू हुआ आंदोलन आज पूरे देश का आंदोलन बन चुका है. अगर ये लागू हो जाएंगे तो धीरे-धीरे जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और आम-अवाम की थाली से भोजन छिन जाएगा. लगभग 150 साथी खो चुके दिल्ली की सीमा पर डटे किसान केवल खेती नहीं बल्कि देश की आज़ादी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. मेहनतकाश जनता की कमाई से सेठों की थैली भरने वाली सरकार को इस आंदोलन के आगे झुकना ही होगा.  सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश सह सचिव उमेश सिंह ने कहा कि लोक कल्याणकारी  राज्य व्यवस्था में अब आम लोगों की थाली से रोटी छीनी जा रही है और चहेते पूंजीपतियों की तिजोरी भरी जा रही है. खाद्यान की हमारी आत्मनिर्भरता खत्म की जा रही है. किसानों की जमीन पर सरकार के चहेते पूंजीपतियों को कब्ज़ा दिलाया जा रहा है. किसान इस नई कंपनी राज के हाथों गुलामी के खिलाफ लड़ रहे हैं. इसलिए यह हम सबका आंदोलन है. इसे मिलकर जीतना ही होगा. मौके पर मौजूद युवा कवि कृष्ण समिद्ध ने आंदोलनरत किसानों के साथ खड़ा होने की अपील करते हुए वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना व अपनी अनेक कविताओं का असरदार पाठ किया. सांस्कृतिक संगठन 'कोरस' की समता राय, अपराजिता व जन संस्कृति मंच के अनिल अंशुमन ने अनेक जनगीतों की प्रस्तुति की और किसान आंदोलन के साथ जुड़ने का आह्वान किया.  कार्यक्रम का संचालन करते हुए इस नागरिक अभियान के संयोजक एआइपीएफ से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ग़ालिब ने कहा कि किसानों के साथ खड़ा होना ही आज का सच्चा राष्ट्रप्रेम है. आंदोलन से व्यापक समाज का जुड़ाव हो यह आज हम सबकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी हो गयी है. हफ्ते भर से चल रहे इस अभियान का यही मकसद है. "किसानों के साथ हम पटना के लोग" नामक इस नागरिक अभियान का यह सातवां दिन था. पटना के विभिन्न मुहल्लों, बाजारों, इलाकों में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी तक यह चलेगा जिसमें सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, कवि-साहित्यकार, प्राध्यापक-चिकित्सक, गायक,रंगकर्मी, युवा-मजदूर आदि समाज के सभी तबके भाग ले रहे हैं. गीत, कविता, नुक्कड़ नाटक व वक्तव्यों से किसान आंदोलन के समर्थन का आह्वान किया जा रहा है. उक्त वक्ताओं के साथ कार्यक्रम में इंसाफ मंच की आसमा खान ने भी उपस्थित लोगों से आंदोलन के समर्थन की अपील की.  कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रणजीव, जन संस्कृति मंच के संयोजक राजेश कमल, दीपू व मो.सोनू समेत प्रबुद्ध नागरिक समाज के दर्जनों लोग मौजूद थे.  एक सप्ताह से चल रहे इस नागरिक अभियान का समापन कल दीघा हाट पर होगा.

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