सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 23 मार्च - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 23 मार्च 2021

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 23 मार्च

सायलों बंद हुआ तो प्रभावित होंगे 50 गांवों के सैकड़ों किसान, जनसुनवाई में पहुंचे किसानों ने कलेक्टर से की मुलाकात  


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सीहोर। मंडी स्थित सायलों केंद्र बंद होता है तो क्षेत्र के 50 गांवों के सैकड़ों किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। किसानों को वेयरहाउस तक अपनी गेंहू की उपज बेचने जाना होगा। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर मुगांवली सोसायिटी अंतर्गत आने वाले ग्राम सैमरादांगी और मुंगावली के किसानों ने किसान नेता विनय सिंह दांगी और ग्राम पटेल बाबूलाल दांगी के नेतृत्व में कलेक्टर अजय गुप्ता से मुलाकात की। किसानों ने सायलों केंद्र बंद करने से होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। किसानों ने कहा की काफी दिक्कतों और परेशानियों का सामना करना होगा। किसानों का गेंहू सायलों केंद्र पर ईमानदारी से इलेक्ट्रिक तौल कांटे पर तुलता है जबकी अन्य स्थानों पर तौल में की जाने वाली गड़बडिय़ों से किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। गेंहू उपार्जन का स्थान किसी भी हालत में परिवर्तित नहीं किया जाए किसानों को परेशानियों और आर्थिक नुकसान से बचाया जाए। ज्ञापन देने वालों में हदेश दांगी, भगवत सिंह परमार, मोहन सिंह, गिरधारीलाल, दुर्गाप्रसाद दांगी, हेमराज सिंह, दौलतराम, राजाराम, वनवारीलाल, जय सिंह, दिनेश वर्मा, मुकेश राकेश आदि किसानगण शामिल रहे।  


धबोटी बीट के नाकेदारों के विरूध आदिवासियों ने की पटटे, दिलाने के नाम पर लाखों रूपये वसूल करने की शिकायत


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सीहोर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले में वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का मासूम आदिवासियों से पटटे दिलाने एंव वन विभाग की भूमि से बेदखल की कार्रवाहीं नहीं कराने के नाम पर लाखों रूपये वसूली करके उनका शोषण किया जा रहा है इन आदिवासियों के द्वारा मुख्यमंत्री से लेकर वन मडलाअधिकारी को भी कई बार शिकायत करने के बाद पीडि़त भोलेभाले मासूम आदिवासियों को न्याय नहीं मिला है। इस दशा में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद जिला सीहेार के सचिव बाबूलाल भील के द्वारा जनसुनवाई कार्यक्रम में उपस्थित होकर जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौपा गया है। आदिवासियों ने बताया की सीहेार रेंज की बीट धबोटी कक्ष क्रमांक 31 की वन भूमि पर 30 वर्ष पूर्व टीटू पिता जोगी भूरिया आदिवासी नेता एवं शंकर सिंह पूजारी के साथ मिलकर वन विभाग की भूमि को साफ सफाई कर खेती योग्य जमीन बनाकर कब्जा किया था उक्त जमीन का पटटा बनवानें एवं जमीन से बेदखल की कार्रवाहीं नहीं कराने को लेकर धबोटी के नाकेदार कमलेश दोहरे और दीपेश राठौर के द्वारा आदिवासी बाबूलाल पुत्र जामा, अनार सिंह पुत्र मूलचंद्र, कैलाश पुत्र अनार सिंह, गुलाब सिंह पुत्र अनार सिंह, भीम सिंह पुत्र मूलचंद्र, जगदीश पुत्र गुलाब सिंह, खूम सिंह पुत्र जोसफ, सुनील पुत्र सुरेश से लाखों रूपये पटटे एवं जमीन से बेदखल नहीं करने के लिए गए है। वहीं जब दोनों नाकेदारों के द्वारा आदिवासियों के पटटे बनाकर नहीं दिए तो आदिवासयिों के द्वारा  एकत्रित कर दिया गया रूपये की वापस मांग की गई तो भोलेभाले मासूम आदिवासयिों को जंगली जानवर पकडऩे के जुर्म में मारपीटकर प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया गया। इन आदिवासयिों की खून पसीने से खरीदी गई मोटर साईकल जब्त कर केस बना दिया गया। दानों नाकेदारों के द्वारा भारी रकम वसूलकर ग्राम धबोटी के खाती समाज के लाड़ सिंह पुत्र भंवरजी खाती, दिलीप पुत्र भंवरजी खाती, गब्बर पुत्र पृथ्वी खाती, नरेश पुत्र सीताराम  खाती को सन 1980 से आज दिनांक तक की अतिक्रमण पात्रता सूची में आदिवासी दर्शया गया है। जबकी उक्त चारों लोग सवर्ण खाती जाति से ताल्लूक रखते है यह लोग आदिवासी की श्रेणी में नहीं आते है। तथा इन लोगों का वन विभाग की भूमि पर कोई कब्जा नहीं है। इसी प्रकार दिनेश पुत्र हुकुम सिंह खाती जो दूसरे गांव भाऊखेड़ा का निवासी है तुफान पुत्र लाड़ सिंह खाती तथा उपर दर्शाए गए समस्त खाती समाज के लोगों के नाम तहसील में कई एकड़ निजी जमीन दर्ज है। फर्जी तरीके से आदिवासी बनाकर भारी रकम वसूल कर कब्जा रिकार्ड में दर्शाया गया है। जो आदिवासी मूलता टीटू पुत्र जोगी भूरिया के नेतृत्व में झाबूआ से आकर सन 1980 से वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर फसल लेकर परिवार का पालन पौषण कर रहे थे दोनों नाकेदारों के द्वारा लाखों रूपये वसूलकर जमीन से बेदखल कर दिया है और फर्जी खाती समाज को आदिवासी बनाकर भारी रकम वसूलकर पात्रता सूची में जोड़ लिया गया है। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के नेता बाबूलाल भील जिला सचिव ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग की है की आदिवासियों से पटटे के नाम लिये गया पैसा नाकेदारों द्वारा वापस नहीं किया गया और मासूम आदिवासियों के नाम पात्रता सूची में नहीं जोड़े गए एवं फर्जीं आदिवासी बनाए गए खाती समाज के लोगों के अतिक्रमण पात्रता सूची से नाम नहीें हटाया गया तो समस्त जिले के आदिवासी कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन कर भूख हड़ताल प्रारंभ करेंगे। जिस के सारी जबावदारी मध्य प्रदेश शासन एवं जिला प्रशासन की होगी।


शहर में गूँजती सायरन की आवाज के साथ दिया कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाने का संदेश, सीहोर जिले में कोरोना की रोकथाम के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू


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वैश्विक महामारी कोरोना को हराने के लिए आज से सीहोर जिला मुख्यालय सहित सभी तहसीलों में भी विशेष जागरूकता अभियान शुरू हुआ। सीहोर शहर के कोतवाली चौराहा  पर ठीक प्रातः 11 बजे दूर तक गूँजती शायरन की आवाज के बीच जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं आमजनों ने मास्क लगाकर जिलेवासियों को संदेश दिया कि वैश्विक महामारी कोरोना फिर से पाँव पसार रही है, इसलिए खुद भी मास्क लगाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। साथ ही सदैव  दो गज की दूरी बनाएं रखें और अपने हाथों को नियमित रूप से सेनेटाइज करें अथवा साबुन से धोते रहें। कोरोना के खात्मे के लिए अपनी बारी आने पर कोरोना का टीका जरूर लगवाएँ। शहर के कोतवाली चौराहा  पर आयोजित हुए जन जागरण कार्यक्रम में विधायक श्री सुदेश राय, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री रवि मालवीय, श्री सीताराम यादव, राजकुमार गुप्ता, प्रिंस राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा कलेक्टर श्री अजय गुप्ता, एसपी श्री शशिन्द्र चौहान, अपर कलेक्टर श्रीमती गुंचा सनोबर, जिला पंचायत सीईओ हर्ष सिंह एएसपी श्री समीर यादव सहित अन्य अधिकारी एवं शहरवासी मौजूद थे। इस अवसर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना मास्क के घूम रहे लोगों को मास्क वितरित किये। साथ ही उन्हें समझाया कि कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाना नितांत जरूरी है। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए दुकानों के सामने विधायक श्री राय, कलेक्टर श्री गुप्ता एवं अन्य अधिकारियों द्वारा गोल घेरे भी बनवाये गए। दुकानदारों को सलाह दी गई कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपना कारोबार करें। साथ ही खुद भी मास्क लगाएं और ग्राहकों को भी लगवाएँ। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज  सिंह चौहान की पहल पर आज से कोरोना के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान शुरू  किया गया है। 


आत्मा परियोजना में दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सम्पन्न


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भोपाल जिले के फंदा एवं बैरसिया ब्लॉक के 20 कृषकों को स्थानीय कृषि महाविद्यालय सीहोर में आत्मा परियोजना अंतर्गत दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें उन्नत खेती अपनाकर अधिक आय प्राप्त करने तथा साथ ही अन्य सहव्यवसाय, दुग्ध, मछलीपालन,बकरीपालन,मधुमक्खी पालन से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण में आये कृषकों को प्रेरित किया गया । अधिष्ठाता डॉ एच.डी.वर्मा तथा महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चने के नवीनतम उन्नत किस्में, कृषि विपणन से समृद्धि, जैविक खेती एवं फसलोत्पादन तकनीकी, मशरूम की खेती, उद्यानिकी फसलों की उत्पादन तकनीक, उन्न्त तकनीक का महत्व बताया। प्रशिक्षण में समन्वित कीट प्रबंधन एवं मसूर की उन्नत खेती पर तकनीकी मार्गदर्शन तथा उत्पादन संबंधी समस्याओं पर चर्चा कर निराकरण के लिए सुझाव प्रदान किये । दलहन अनुसंधान प्रक्षेत्र, उद्यानिकी नर्सरी का भ्रमण करते हुए चने की नवीन उन्नत किस्मों व फल वृक्षों में कलिकायन एवं गूटी बॉधने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।


शासकी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मास्क अभियान प्रारंभ  


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स्थानीय शासकीय चन्द्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय की अनुशासन समिति एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कोविड के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए महाविद्यालय में मास्क अभियान प्रारंभ किया गया । जिसमें प्राचार्य डॉ आशा गुप्ता द्वारा समस्त स्टाफ, विद्यार्थियों तथा स्वयंसेवकों को मास्क प्रदान किये गये। इसके साथ स्वंय सेवकों द्वारा  कोविड-19 के बचाव के लिए समाज में जनजागरूकता फैलाने का आव्हान किया। उन्होने कोरोना के संक्रम से बचाव के लिए मास्क अभियान को जारी रखने और उचित सामाजिक दूरी बनाये रखने, एवं इसका प्रचार प्रसार करने का प्रण लिया । कार्यक्रम में एनसीसी प्रभारी, राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी आदि उपस्थित रहे।    


बालिकाओं को आत्म रक्षा के लिए "अपराजिता" के तहत प्रशिक्षण, 300 बालिकाओं को दिया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण  


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जिले के आष्टा, सीहोर, इछावर ,नसरूल्लागंज तथा बुदनी विकासखण्डों मे उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया। इस कार्यक्रम के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के द्वारा लगभग 300 बालिकाओं को 8 मार्च से 22 मार्च तक मार्शल आर्ट, जूडो कराटे, ताईक्वांडों का प्रशिक्षण दिया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री प्रफुल्ल खत्री ने जानकारी दी कि महिलाओं,बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने के लियें शासन द्वारा अनेकों कानून एवं अधिनियम बनायें गये है। इसी क्रम में बालिकाओं को अपनी सुरक्षा तथा शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिये "अपराजिता" अभियान प्रारंभ किया गया है। जिसमें जिले भर में लगभग 300 बालिकाओं ने आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जूडो कराटे से हम शारीरिक एवं मानसिक रूप सें फिट रहते है। एवं बालिकाओं में आत्म विष्वास भी बडता है। मुसीबत आने पर वह अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकती है। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा आत्मरक्षा का प्रदर्शन भी दिखाया गया। तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बालिकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक 1 में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी अरविन्द एलीजर, महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी मोहन रेकवार, तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बालिकायें उपस्थित रही। 


शासकीय महाविद्यालय बकतरा तथा इछावर में रोजगार मेले होंगे आयोजित


जिला रोजगार अधिकारी ने जानकारी दी कि रोजगार कार्यालय के माध्यम से रोजगार मेलों का अयोजन 26 मार्च 21 को शासकीय महाविद्यालय बकतरा तथा 31 मार्च को शासकीय महाविद्यालय इछावर में प्रात: 11 बजे से सांच 04.00 बजे तक किया जायेगा। रोजगार मेले में विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा रोजगार के लिए युवक युवितियों चयन किया जायेगा। समस्त बेरोजगार युवक-युवतियां जिला रोजगार कार्यालय सीहोर के पोर्टल की वेबसाइट  www.mprojgar.gov.in  में पंजियन कर समस्त प्रमाणपत्रों सहित रोजगार मेले में भाग लें। इस अवसर पर केन्द्र एवं राज्य सरकार के कोविड-19 गाईडलाइन का सख्ती से पालन किया जायेगा । 


मनरेगा में 10 दिनों में मजदूरों के बैंक खाते में जमा हुई 700 करोड़ की धनराशि, वर्ष 2020-21 में 6300 करोड़ से अधिक मजदूरी 


राज्य में वर्ष 2020-21 में महात्मा गाँधी नरेगा के तहत 6300 करोड़ रूपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान 1.33 करोड़ मनरेगा मजदूरों के बैंक खाते में सीधे किया गया है। राज्य में योजना प्रारंभ होने के उपरान्त मजदूरी में वितरित हुई यह सर्वाधित राशि है। श्री मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने बताया कि कोविड काल के दौरान बड़ी संख्या में गाँव लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य की मांग पर भारत सरकार द्वारा 3 लेबर बजट एवं मजदूरी की राशि में वृद्धि करते हुए 2400 करोड़ रूपये से अधिक की अतिरिक्त राशि राज्य को उपलब्ध कराई गई। भारत सरकार द्वारा इस वर्ष राज्य को मनरेगा मजदूरी मद में 6300 करोड़ रूपये से अधिक क राशि उपलब्ध कराई गई, जिसका भुगतान मजदूरों के बैंक खाते में किया गया है। मनरेगा के तहत कोविड काल के दौरान 6 लाख 50 हजार से अधिक परिसम्पत्तियों का सृजन किया गया है। इन कार्यो का पूर्णता प्रमाण-पत्र भी जारी किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि मात्र विगत 10 दिनों में ही मजदूरों के बैंक खाते में 700 करोड़ रूपये की राशि जमा हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में प्राप्त होने वाली अभूतपूर्व राशि है।


ग्रामीण क्षेत्र के 36 लाख से अधिक परिवारों तक पहुँचा नल से जल • बृजेन्द्र सिंह यादव


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी कि देश की समूची ग्रामीण आबादी को शुद्ध पेयजल उनके घर पर ही नल कनेक्शन के जरिये दिये जाने की व्यवस्था की जायेगी। इसके बाद भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय जल जीवन मिशन'' की गाइड-लाइन जारी की। मिशन के मुताबिक गाँव के हर परिवार को नल कनेक्शन से जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जायेगी। इस पर होने वाला व्यय केन्द्र तथा राज्य सरकार बराबर-बराबर वहन करेंगी। इस मिशन के जरिये मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल में भी हर परिवार को घर में ही नल कनेक्शन से पानी उपलब्ध करवाये जाने से माताओं-बहनों को पानी के लिये नदी, तालाब, कुआँ अथवा बावड़ी तक जाने से निजात मिल जायेगी। राज्य सरकार के ग्रामीण आबादी को नल से जल मुहैया करवाने के कारगर प्रयासों से अब किसी को 'नीर के लिये पीर'' नहीं सहना होगी। जल प्रत्येक जीव के जीवन की पहली जरूरत है। राज्य सरकार भी इसे अपनी प्राथमिकता में रखते हुए इसकी शीघ्र उपलब्धता और बेहतर प्रबंधन को निरंतरता दे रही है। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की करीब सवा 5 करोड़ ग्रामीण आबादी को नल कनेक्शन के जरिये गुणवत्तापूर्ण जल उपलब्ध करवाने के लिये 'जल जीवन मिशन'' के अंतर्गत कार्यवाही के निर्देश दिये हैं। प्रदेश में जल जीवन मिशन से ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को गति मिली है और ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन। मिशन के जरिये अब तक 36 लाख 24 हजार 896 नल कनेक्शन दिये गये हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत सभी स्कूलों/आँगनवाड़ियों में नल कनेक्शन से पेयजल प्रदान करने के अभियान में भी प्रदेश में तेजी से काम किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में अब तक करीब 16 हजार शालाओं तथा करीब 9 हजार आँगनवाड़ियों में नल से जल सुलभ कराया जा चुका है। शेष स्कूल और आँगनवाड़ियों में नल से जल पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी है। जल जीवन मिशन में जल-संरचनाओं के निर्माण और संधारण के कार्य लगभग हर जिले में जारी हैं। ग्रामीण जनसंख्या के आधार पर प्राप्त प्रस्तावों पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल-प्रदाय योजनाओं की स्वीकृति दिये जाने का सिलसिला बना हुआ है।


2 हजार से अधिक ग्रामों में नल से जल

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम प्रदेश के सभी ग्रामीण अंचल के हर परिवार तक नल कनेक्शन से जल पहुँचाने के लिये लगातार कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध करवाने के लिये 15 हजार 370 करोड़ रूपये की लागत की जल-प्रदाय योजनाओं का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इनमें 10 हजार 68 सिंगल विलेज, 11 समूह और 39 समूह की अत: ग्राम अधोसंरचना शामिल हैं। पिछले एक साल में प्रदेश के दो हजार से अधिक ग्रामों के सौ फीसदी घरों में नल कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है।


जल गुणवत्ता एवं आपूर्ति प्रंबधन के कई कार्यो में देश में अव्वल

एनएबीएल प्रमाणीकरण प्राप्त करने के मामले में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। ग्रामीणों को पेयजल गुणवत्ता उपलब्ध करवाए जाने के लिए इस वर्ष में 7 प्रयोगशालाओं का एनएबीएल प्रमाणीकरण प्राप्त किया जा चुका है अब प्रदेश में 9 जल प्रशिक्षण प्रयोगशालाएँ एनएबीएल प्रमाणीकृत हैं। विभाग द्वारा अन्य प्रयोगशालाओं के प्रमाणीकरण की भी प्रक्रिया जारी है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय जल जीवन मिशन में 25 लाख से अधिक एफएचटीसी के लक्ष्य वाले 6 राज्यों (बिहार, वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, आन्ध्रप्रदेश, और मध्यप्रदेश) में भारत सरकार से अनुदान की तीसरी किस्त प्राप्त करने वाला पहला राज्य है। इसी तरह मध्यप्रदेश ने भौतिक उपलब्धि और वित्तीय व्यय प्रतिशत के आधार पर देश के इन 6 बड़े राज्यों में दूसरा स्थान बनाया है।


हर स्तर पर समितियाँ गठित

प्रदेश में जल जीवन मिशन के संचालन के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन और कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन का गठन किया गया है। साथ ही ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन भी किया जायेगा। योजना में निर्माण लागत की 10 प्रतिशत जन-भागीदारी होगी। ग्राम से जन-भागीदारी श्रम, सामग्री अथवा नगद राशि के रूप में ली जा सकेगी। अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल ग्रामों में जन-भागीदारी 5 प्रतिशत होगी।


मिशन मार्गदर्शिका के घटकों के अनुरूप कार्य-संचालन

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की मार्गदर्शिका के अनुसार प्रदेश में मिशन के बेहतर संचालन के लिए प्रमुख रूप से चार घटकों को शामिल कर उनके अनुरूप कार्यवाही की जा रही है। 1. कार्य प्रबंधन इकाई (पीएमयू) के अन्तर्गत दो टीमें गठित की जाती हैं। एक टीम तकनीकी सहायता देगी, वहीं दूसरी टीम प्रबंधन समर्थन के लिए मैकेनिज्म पर काम करेगी। जिला स्‍तर पर मिशन की सहायता के लिए जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई बनाई गई है। 2. कार्यान्वयन सहायता एजेन्सी (आईएसए) चयनित ग्रामीण क्षेत्र में जलप्रदाय योजनाओं से प्रभावित समुदाय को सुविधा प्रदान करने, जन-सहयोग की सहमति लेने, बुनियादी ढाँचे के प्रबंधन के लिए गठित ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को मार्गदर्शन देने का कार्य करेगी। प्रत्येक जिले की अपनी कार्यान्वयन सहायता एजेन्सी होगी। 3. तृतीय पक्ष मूल्यांकन संस्थाएँ (टीपीआई) निरीक्षण के बाद यह तय करेंगी कि निर्माण संस्था द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अनुसार कितना कार्य कर लिया है और किए गए कार्य के विरूद्ध संस्था को कितने भुगतान की पात्रता बनती है। तृतीय पक्ष मूल्यांकन संस्थाएँ जिले-वार कार्य करेंगी। 4. कौशल विकास प्रशिक्षण के अन्तर्गत ग्रामीण आबादी में स्थापित जल व्यवस्था का संचालन, संरक्षण और संधारण बेहतर हो सके, इसकी भी व्यवस्था की गई है। जलप्रदाय योजनाओं में भविष्य में आने वाली रूकाबट अथवा खराबी को स्थानीय स्तर पर दूर किया जा सके इसके लिए कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत स्थानीय युवाओं को समुचित प्रशिक्षण दिया जायेगा। जलप्रदाय योजना क्षेत्र के रहवासी करीब 50 हजार युवाओं को उनकी रूचि के अनुसार मैशन, पिलम्बर, इलेक्ट्रिशियन, मोटर मैकेनिक तथा पम्प आपरेटर के कार्यो का प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जायेगा। इससे जलप्रदाय योजनाओं को लेकर भविष्य में आई किसी भी कठिनाई को स्थानीय स्तर पर दूर किया जा सकेगा और युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।


वानिकी विकास के नए आयाम गढ़ता वन विभाग • कुंवर विजय शाह


प्रदेश में स्थापित वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रभावी पहल की गई है। इसी का परिणाम है कि वनों के साथ-साथ इस पर आश्रित ग्रामीणों की स्थिति में सुधार परिलक्षित हुआ है। वानिकी विकास की दिशा में अनेकानेक नीतिगत निर्णय लिए गए हैं, जिसके फलस्वरूप वन और वन्य-प्राणियों के बेहत्तर प्रबंधन के साथ ही वनों पर आश्रित वनवासियों के जीवन-स्तर में सुधार लाया जा सका है। यह सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। देश में सबसे अधिक बाघ इसी प्रदेश में है। पिछले साल बाघों की संख्या 526 होने के साथ प्रदेश को एक बार दोबारा टाईगर स्टेट का दर्जा मिला है। इसी तरह तेंदुओं की संख्या के मामले में भी हमारे प्रदेश ने कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य को पीछे छोड़कर तेंदुआ स्टेट दर्जा मिलने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश में 3 हजार 421 तेंदुओं की संख्या पाई गई। देश में उपलब्ध तेंदुओं की संख्या में से 25 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश में पाए गए हैं। प्रदेश में 13 राष्ट्रीय उद्यान और 24 अभ्यारण्य स्थित है। मुकुन्दपुर में सफेद बाघ सफारी, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान-जू भोपाल और रायसेन में तितली पार्क है। वन्य-प्राणी संरक्षण के क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएँ और अवसर उपलब्घ कराए गए हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मध्यप्रदेश में 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर (64,68,900 हेक्टेयर) कुल वन क्षेत्र है, जो राज्य के भू-भाग का 30.72 फीसदी और देश के कुल वन क्षेत्र का तकरीबन 12.38 फीसदी है। प्रदेश की वन नीति-2005 से लागू है। वन विभाग दो मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है। वन तथा वन्य जीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए उनके संवर्धन के साथ वनों पर आश्रित ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में असरदार पहल की गई है। राज्य सरकार का यह दृढ़ संकल्प है कि वानिकी के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक विभागीय योजनाओं का लाभ पहुँचना चाहिए, ताकि उन्हें मुख्य-धारा से जोड़कर आर्थिक रूप से समृद्ध किया जा सके। वन विभाग वनों की सुरक्षा और विकास के साथ-साथ वनों पर आश्रित वनवासियों के कल्याण के प्रति गंभीरता से कार्य कर रहा है।


7 करोड़ मानव दिवस का रोजगार

प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हरेक साल तकरीबन 7 करोड़ मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। बाँस, चारा उत्पादन एवं लाख उत्पादन के माध्यम से एक लाख से अधिक ग्रामीणों को वानिकी गतिविधियों के माध्यम से आजीविका उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग में प्रत्येक वन मण्डल द्वारा 10 वर्ष की कार्य-योजना तैयार कर वनों का प्रबंधन किया जाता है। योजना के माध्यम से कम घनत्व वाले वन क्षेत्रों में वनीकरण भी किया जाता है। इसके साथ ही बिगड़े वनों का सुधार एवं सघन वनों में पुनरउत्पादन के लिए सहायक वन वर्धनिक कार्य, सीमा एवं कठिन सुरक्षा के कार्य कराए जाते हैं।


आत्म-निर्भर म.प्र. में विभाग की गतिविधियाँ

प्रदेश सरकार ने आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश रोडमैप-2023 के रूप में महत्वाकांक्षी पहल को मूर्त रूप देने के लिए वन विभाग द्वारा कार्य-योजना तैयार की जा रही है। इसमें 'बफर में सफर' मुहिम के माध्यम से मानसून पर्यटन को बढ़ावा, टाईगर सफारी विकसित करना, लकड़ी/बाँस के प्र-संस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए दो विशेष आर्थिक क्षेत्रों का विकास, 20 बाँस कलस्टरों का व्यवस्थित विकास, प्रदेश की वनोपज का मध्यप्रदेश उत्पाद के रूप में जी.आई. रेगिंग, वनोपज के बेहतर मूल्य के लिए वनोपज मूल्य संवर्धन विकास, वन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन, उपयुक्त र्हैबिटेट में चीता को लाना, बाघों का घनत्व बढ़ाने और वन स्थिरता को बढ़ावा दिए जाने के लिए बाघों को अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में शिफ्ट करना, वनों के बाहर बृक्ष आवरण बढ़ाने में शासकीय गैर वन भूमि पर वृक्षारोपण की पहल और भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर पारदर्शिता को बढ़ाने जैसे कार्य किये जायेंगे।


वन रोपणियों में पौध तैयारी

प्रदेश में 11 अनुसंधान और विस्तार वृत्तों की 170 अनुसंधान और विस्तार रोपणियों में विभिन्न प्रजाति के 4 करोड़ 13 लाख पौधे उपलब्ध हैं। विभागीय वृक्षारोपण एवं गैर-वानिकी क्षेत्रों में रोपण के लिए आवश्यक पौधो की तैयारी, उपलब्ध पौधों का रख-रखाव और अनुसंधान विस्तार नर्सरियों के उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है। रोपणियों के पौधों के ऑनलाईन संधारण के लिए नर्सरी मैनजमेन्ट विकसित किया गया है। कुछ रोपणियों में सी.सी.टी.वी. कैमरे स्थापित कर रोपणियों की सुरक्षा और निगरानी की जा रही है।


संयुक्त वन प्रबन्धन

विभाग की कार्यप्रणाली में 'जन' का महत्वपूर्ण स्थान है। वन-जन को समन्वित कर वानिकी में भागीदारी का अंश बढ़ाने के साथ ही जन की सक्रियता बढ़ाने के उद्देश्य से संयुक्त वन प्रबंधन की विचारधारा को अपनाया गया है। संयुक्त वन प्रबंधन में 10 हजार 141 ग्राम वन समिति, 4419 वन सुरक्षा समिति और 1044 ईको विकास समिति गठित हैं। वन समितियों की कुल संख्या 15 हजार 604 है। इनके माध्यम से 79 हजार 705 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्रों का प्रबंधन किया जा रहा है। वन समितियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की सदस्यता आरक्षण के साथ ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद में से एक महिला की नियुक्ति अनिवार्य की जाकर महिला सशक्तिकरण को प्रभावी बनाया गया है। वन संरक्षण तथा वन संवर्धन के प्रयासों में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बसामन मामा स्मृति वन एवं वन्य-प्राणी संरक्षण योजना चालू है। इसके अलावा वन रक्षा एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को 'शहीद अमृता देवी विश्नोई' पुरस्कार से नवाजा जाता है।


वन संरक्षण

विभाग वनों की सुरक्षा और अवैध कटाई को सख्ती से रोकने में जुटा हुआ है। वन अपराधों की गोपनीय सूचनाओं के लिए मुखविर तन्त्र को प्रभावी बनाया गया है। वन अपराधों की समय-सीमा में विवेचना के अनुश्रवण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। वन्य-प्राणी संरक्षित क्षेत्रों में 1490 वायरलेस-सेट की लायसेंस को मंजूरी प्राप्त हो गई है। वन अपराधों की रोकथाम के लिए वृत्त मुख्यालय पर उडनदस्ता कार्यरत है। वन सुरक्षा में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों का उपयोग भी किया जा रहा है। वन भूमि पर अतिक्रमण में बे-दखली के लिए भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा 80 (अ) में वैधानिक कार्रवाई कर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाता है।


संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा-निगरानी

संवेदनशील क्षेत्रों में 329 वन चौकी, 4 जल चौकी, 387 बैरियर और 53 अंतर्राष्ट्रीय बैरियर के माध्यम से सुरक्षा और निगरानी की जाती है। इसके अलावा मैदानी अमले को 12 बोर की 2600 नई पंप एक्शन बन्दूक, 900 वायना कुलर, साढ़े पाँच हजार मोबाईल सिम और वन क्षेत्र वालों को 286 रिलाल्वर उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही विशेष सशस्त्र बल की तीन कंपनी भी तैनात रहती है। राज्य शासन, वन्य-प्राणियों द्वारा पहुँचाने वाली जनहानि और पशु हानि के ऐवज में त्वरित क्षतिपूर्ति उपलब्ध करा रहा है। वही वन्य-प्राणियों के स्वास्थ्य की बेहतर देख-रेख की जा रही है। वन्य-प्राणी संरक्षण तथा मानव वन्य-प्राणी द्वन्द्व को कम करने के लिए वन्य-प्राणी संरक्षण अधिनियम-1972 के प्रावधानों के अनुसार बाघों के क्रिटिकल रहवास क्षेत्रों ग्रामों का पुनर्स्थापन के लिए ग्रामों को चिन्हांकित कराकर पुनर्स्थापन प्रावधानित है। इसके लिए 10 लाख रूपये प्रति पुनर्वास इकाई की दर निर्धारित की गई है। यह पुनर्स्थापन संबंधित ग्राम के रहवासियों को सहमति बाद किया जाता है। पंजीकृत वन्य-प्राणी अपराध प्रकरणों की सुनवाई के लिए एस.टी.एस.एफ द्वारा जबलपुर, इंदौर, होशंगाबाद, सागर और सतना में विशेष न्यायालय स्थापित है। प्रदेश को वन्य-प्राणी तस्कर को पकड़ने में उल्लेखनीय सफलता पर इंटरपोल द्वारा सराहना भी की गई है।


बस्ती यादव को शिकायत करने से पहले मिली पात्रता पर्ची

  • कलेक्टर ने कहा प्लॉट खरीदने से पहले कॉलोनी की वैद्यता की पूरी जानकारी लें 
  • जनसुनवाई में कलेक्टर ने जिले भर आये लोगों की सुनी समस्याऐं,  दिये निराकरण के निर्देश 

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जनसुनवाई में आई बस्ती यादव ने यह सोचा नहीं था कि उसे पात्रता पर्ची नहीं मिलने की शिकायत करने से पहले ही उसे पात्रता पर्ची मिल जायेगी। बस्ती यादव जनसुनवाई में पात्रता पर्ची के लिए गुहार लगाती,  इससे पहले ही कलेक्टर श्री अजय गुप्ता ने उसे पात्रता पर्ची प्रदान कर दी। बस्ती यादव ने पात्रता पर्ची मिलते ही खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब मैं राशन की चिन्ता से मुक्त हो गई । इसके साथ ही जनसुनवाई में आये  ग्राम कजलास निवासी ‍दिव्यांग लोकेन्द्र बामनियां को कलेक्टर श्री गुप्ता ने तुरंत ब्लाइंड स्टिक प्रदान की ।


प्लॉट खरीदने से पहले कॉलोनी की वैद्यता के बारे में पूरी जानकारी लें

जनसुनवाई में आये श्री प्रेमनारायण, श्री राजेश मारन, श्री संतोष चौहान, महेश वर्मा, हेमन्त वशिष्ट सहित अनेक लोगों ने कॉलोनाइजर की शिकायत करते हुए बताया कि उसके द्वारा कॉलोनी में विकास कार्य नहीं किये गये  हैं, मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। आवेदन लेते हुए कलेक्टर श्री अजय गुप्ता ने कहा कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले यह भलीभांति सुनिश्चित कर लें कि उसके पास सभी शासकीय अनुमतियां हैं तभी प्लॉट खरीदें। उन्होने कहा कि सस्ते कीमत पर प्लॉट मिलने के लालच में बहुत से लोग अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदकर अपनी पूंजी लगा देते हैं और सुविधाओं के अभाव में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं  । इसके साथ ही कई प्रकरण ऐसे देखने में आये हैं कि कॉलोनाइजर प्लॉट क्रेताओं का पूरा पैसा लेकर फरार हो जाते है। उन्होने सभी से अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले उसकी वैद्यता के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें । 


राहुल के ईलाज के लिए कलेक्टर ने दी आर्थिक सहायता

जनसुनवाई में आये ग्राम थूना खुर्द निवासी अखिलेश विश्वकर्मा ने अपने भाई राहुल के ईलाज के लिए कलेक्टर से गुहार लगाई। कलेक्टर श्री अजय गुप्ता ने अखिलेश के आवेदन पर तुरंत कार्यवाही करते हुए रेड क्रॉस सोसायटी से 20 हजार रूपये की आर्थिक सहायता दी । आर्थिक सहायता का चेक उन्होने अखिलेश को उसी समय जनसुनवाई में प्रदान किया।  जनसुनवाई में आर्थिक सहायता, बीपीएल राशन कार्ड, अतिक्रमण, पट्टा से संबंधित 35 आवेदन पत्र प्राप्त हुए कलेक्टर श्री गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिये । जनसुनवाई में अपर कलेक्टर श्रीमती गुंचा सनोबर, सीईओ जिला पंचायत श्री हर्ष सिंह सहित अनेक विभागों के जिलाधिकारी उपस्थित थे। 


27 मार्च से 04 अप्रेल तक कृषि उपज मण्डी में रहेगा अवकाश  


होली त्योहार तथा वार्षिक लेखाबंदी (बैंक अवकाश ) होने के कारण कृषि उपज मण्डी प्रांगण में 27 मार्च  से 04 अप्रेल 2021, तक  कृषि उपज व लहसुन-प्याज का विक्रय(नीलामी) नहीं होगी ।  


जिला सतर्कता एवं मॉनीटरिंग समिति की बैठक आयोजित

  • अनुसूचित जाति-जनजाति के 237 प्रकरणों में दो करोड़ अस्सी लाख पचार हजार रूपये राहत राशि वितरित

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अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत जिला स्तरीय सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठकआयोजित की गई। बैठक में पिछले तीन माह के प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अपर कलेक्टर श्रीमती गुंचा सनोंबर ने कहा कि पीड़ितो को शीघ्र राहत उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाये।  साथ ही पीड़ितों को नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई जाये। उन्होने कहा कि जिन प्रकरणों में जाति प्रमाण पंत्रों की आवश्यकता है उनके जाति प्रमाण पत्र शीघ्र बनाये जाने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये। बैठक आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री हरजीत सिंह ने प्रकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने बताया कि वर्तमान में कोई भी प्रकरण लंबित नहीं हैं।


स्वीकृत प्रकरणों में राहत

बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में पिछले अप्रेल 2020 से मार्च 2021 तक अनुसूचित जाति एवं जन जाति के कुल 237 प्रकरणों में दो करोड 80 लाख 50 हजार की राहत राशि दी गई है । जिसमें अनुसूचित जाति के कुल 203 प्रकरणों मे 2 करोड 39 लाख 50 हजार रूपये की राहत तथा अनुसूचित जन जाति के कुल 34 प्रकरणों में 41 लाख रूपये की राहत राशि पीड़ितों को वितरित की गई है।


प्रदेश के 17 लाख किसानों के खाते में 340 करोड़ रुपए एवं 30 लाख किसानों को राहत राशि की द्वितीय किस्त के रूप में 1530 करोड़ रुपए का मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंगल क्लिक के माध्यम से किया वितरण

  • सीहोर जिले के एक लाख 47 हजार 858 किसानों के खातों में 29 करोड़ 57 लाख, रूपये से अधिक राशि का अंतरण  , जिला स्तरीय कार्यक्रम  सीहोर कृषि उपज मण्डी प्रांगण में आयोजित किया गया

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मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत प्रदेश के 17 लाख किसानों को 340 करोड़ रुपए एवं 30 लाख किसानों को राहत राशि की द्वितीय किस्त के रूप में 1530 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा मिंटो हाल भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में अंतरण किया । इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री चौहान ने  स्कूल शिक्षा विभाग के 105 करोड़ रूपये की लागत के नवनिर्मित शैक्षणिक भवनों का लोकार्पण किया। मिंटो हॉल भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सीहोर जिले के ग्राम बिजोरी निवासी किसान श्री घिसीलाल को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतीक स्वरूप राहत राशि का चैक प्रदान किया। जिला स्तरीय कार्यक्रम सीहोर कृषि उपज मण्डी प्रांगण में आयोजित किया गया है। इसके साथ ही सभी ब्लॉक एवं ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित किये गये ।  जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने दोपहर 02 बजे  कार्यक्रम में DDMP चैनल के माध्यम से जुड़कर कार्यक्रम को देख एवं सुना। मंडी प्रांगण में आयाजित कार्यक्रम में विधायक श्री सुदेश राय, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री रवि मालवीय, कलेक्टर श्री अजय गुप्ता, अपर कलेक्टर श्रीमती गुंचा सनोबर, जिला पंचायत सीईओ हर्ष सिंह , श्री सीताराम यादव, श्री राजकुमार गुप्ता, श्री प्रिंस राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी उपस्थित थे।


जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता संपन्न


आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना जिला सीहोर मध्य प्रदेष द्वारा 22 मार्च  को चंद्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय सीहोर में आयोजित जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता की गई । इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शासकीय महाविद्यालय बुधनी के श्री हरिओम कीर, द्वितीय स्थान शासकीय कन्या महाविद्यालय की कु. प्राची राठौर तथा तृतीय स्थान शहीद भगत सिंह शा स्नातक महाविद्यालय आष्टा कु. अरूणा परिहार ने प्राप्त किया । इन सभी विद्यार्थियों को 25 मार्च  को  ’’दांडी मार्च का आजादी में योगदान ’’विषय पर विश्वविद्यालय स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में सहभागिता करने हेतु बरकतउल्लाविष्वविद्यालय भोपाल जायेंगे।  


आज 18 व्यक्तियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजीटिव प्राप्त हुई, वर्तमान में कोरोना एक्टिव/पॉजीटिव की संख्या 90


पिछले 24 घंटे के दौरान 18 व्यक्तियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजीटिव प्राप्त हुई है। सीहोर के चाणक्यपुरी से 02, जयंती कॉलोनी, स्टेशन रोड से 01-01, आष्टा के कोठरी से 01, बुधनी अंतर्गत वार्ड नं 12 से 02, रेंहटी से 05, माझरकुई से 03, अमीरगंज तथा भोमड़ा से 01-01, मालीबांयां से 01 व्यक्ति की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजीटिव प्राप्त हुई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि वर्तमान में जिले में एक्टिव/पॉजिटिव की संख्या 90 है। आज 0 व्यक्ति रिकवर हुए। अब तक कुल रिकवर की संख्या 2820  है। 48 संक्रमितों की उपचार के दौरान मृत्यु हुई है। आज 310 सैम्पल लिए गए है। जांच के लिए सीहोर शहरी क्षेत्र से 86,  नसरूल्लागंज 23 , आष्टा से 48, इछावर से 09, श्यामपुर से 67,  बुदनी से 77सैम्पल लिए गए है । आज पॉजीटिव मिले नए कंटेनमेंट जोन सहित समस्त कंटेनमेंट एवं बफर जोन में स्वास्थ्य दलों द्वारा सघन स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है। वहीं पॉजीटिव मिले व्यक्तियों के करीबी संपर्क वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जा रही है। प्रत्येक कंटेनमेंट जोन में सर्वे के लिए एक से दो दल लगाए गए है । सर्वे दल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को बनाया गया है तथा स्वास्थ्य सर्वे दल में ए.एन.एम. आशा कार्यकर्ता, आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। जिले में कुल कोरोना पॉजीटिव व्यक्तियों की संख्या 2958 है जिसमें से 48 की मृत्यु हो चुकी है 2820 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो गए है तथा वर्तमान में एक्टिव/पॉजीटिव की संख्या 90 है। आज 310 सैंपल जांच हेतु लिए गए। कुल जांच के लिए भेजे गए सेंपल 80664 हैं जिनमें से 76389 सेंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। आज 407 सेंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। कुल 1246 सेंपलों की रिपोर्ट आना शेष है। पैथालॉजी द्वारा कोरोना वायरस सेंपल की रिजेक्ट संख्या कुल 71 है। आज पॉजिटिव मिले नये कन्टेनमेंट झोन सहित समस्त कन्टेनमेंट एवं बफर जोन मे स्वास्थ्य दलों द्वारा स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है वहीं पॉजिटिव मिले व्यक्तियों के करीबी संपर्क वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जा रही है। प्रत्ये कन्टेनमेंट जोन मे सर्वे के लिए जिले में जो व्यक्ति होम क्वारंटाइन में है उनके निवास स्थान से सीधे संवाद हेतु जिला स्तरीय कोविड-19 काल सेंटर स्थापित किया गया है जिसका संपर्क नंबर-07562 226470 है एवं 1075 नंबर पर कॉल कर जानकारी ली जा सकती हैं। जिला स्तर पर मोबाइल नंबर 9425400273, 9425400453, 9479595519 पर कॉल सेंटर पर संपर्क किया जा सकता है। राज्य स्तर पर 104/181 नंबर पर काल करके भी टेलीमेडिसीन सेवा का लाभ लिया जा सकता है। 104 नंबर पर ई-परामर्श सेवा का भी लाभ लिया जा सकता है। होन कारोन्टाइन व्यक्तियों तथा उनके परिजनों के लिए हल्पलाईन नंबर 18002330175 जारी किया गया है। होम कारान्टाइन व्यक्ति अथवा उनके परिजन इमोशनल वेलनेस अथवा साईकॉलोजीकल सपोर्ट एवं अन्य जरूरी परामर्श मानसिक सेवा प्रदाताओं से नि:शुल्क प्राप्त कर सकते है।


नेशनल लोक अदालत में मिलेगी सम्पत्ति एवं जल कर उपभोक्ता प्रभार में छूट

  • नगरीय विकास मंत्री श्री सिंह ने नागरिकों से किया इस छूट का लाभ लेने का आग्रह 

प्रदेश में वर्ष 2021 में आयोजित होने वाली लोक अदालतों में सम्पत्ति कर, जल कर उपभोक्ता प्रभार एवं अन्य करों के अधिभार में निर्धारित शर्तों के साथ छूट दी जायेगी। यह छूट उन नगरीय निकायों में लागू नहीं होगी, जहाँ लोक अदालत के दिन निर्वाचन संबंधी आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील होगी। प्रदेश में 10 अप्रैल, 10 जुलाई, 11 सितम्बर और 11 दिसम्बर 2021 को नेशनल लोक अदालत आयोजित की जायेगी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने नागरिकों से आग्रह किया है कि लोक अदालतों में पहुँचकर विभाग द्वारा दी जा रही इस छूट का अधिक से अधिक लाभ लें। सम्पत्ति कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार रुपये तक बकाया होगी, उनमें मात्र अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। जिन सम्पत्ति कर के प्रकरणों में कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार रुपये से अधिक तथा एक लाख रुपये तक बकाया है, उनमें अधिभार में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। सम्पत्ति कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि एक लाख रुपये से अधिक बकाया है, उनमें मात्र अधिभार में 25 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। जल कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 10 हजार रुपये तक बकाया है, उनमें मात्र अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। जल कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 10 हजार से अधिक तथा 50 हजार तक बकाया होने पर मात्र अधिभार में 75 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। जल कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार से अधिक बकाया है, उनमें मात्र अधिभार में 50 प्रतिशत की छूट दी जायेगी। यह छूट मात्र एक बार ही दी जायेगी। यह छूट वर्ष 2019-20 तक की बकाया राशि पर ही दी जायेगी। छूट के बाद राशि अधिकतम दो किस्तों में जमा करवाई जा सकेगी, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत राशि लोक अदालत के दिन जमा करवाना अनिवार्य होगा। यह छूट सिर्फ लोक अदालत के लिये ही मान्य होगी। लोक अदालत में कोविड-19 की गाइड-लाइन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये गये हैं।

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