विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 19 मई - Live Aaryaavart

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बुधवार, 19 मई 2021

विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 19 मई

कोरोनाकाल में लाॅकडाउन के चलते आर्थिक दंश झेल रहे अशासकीय शैक्षणिक संस्थानों के आर्थिक मदद की जाये - शशांक भार्गव


विदिशाः- अशासकीय शैक्षणिक संस्थानों को कोरोना की गाईड लाईन के चलते आर्थिक एवं कई तरह की परेशानियो से जूझना पड रहा है, जिसके कई बिंदू लेकर अशासकीय शैक्षणिक संस्थान संघ ने विधायक भार्गव जी को ज्ञापन दिया, जिसके तारतम्य में भार्गव जी ने प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग म.प्र. शासन भोपाल एवं कलेक्टर विदिशा को पत्र लिख कर मांग की है, कि कोविड-19 महामारी के चलते हुये अशासकीय शैक्षणिक संस्थानो के संचालकगण एवं उक्त संस्थाओं में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी लाॅकडाउन के कारण संस्थाए लगातार बंद रहने से विषम आर्थिक परिस्थ्तिियों का सामना कर रहे है, मेरा अनुरोध है, कि अशासकीय शैक्षणिक संस्थानों के हित में शासन स्तर से न्यायोचित मांगो का समुचित सामाधान किये जाने का अनुरोध किया है, संस्थानो की बिन्दुवार मांगों पर यथाशीघ्र कार्यवाही किये जाने की मांग है। राज्य शासन द्वारा आर.टी.ई. शुल्क प्रतिपूर्ति की राशियाॅ सत्र 2016-17, 2017-18, 2019-20, 2020-21 की आर.टी.ई फीस प्रतिपूर्ति की राशि तत्काल जिले में भेजकर भुगतान कराया जावे। निजी विद्यालयों की वसों का फिटनेश, बीमा, परमिट टेक्स दो वर्षाें का माफ किया जाए, जिस प्रकार प्रायवेट वसों का किया गया है। बिजली बिल विद्यालयों में व्यावसायिक की जगह घरेलू दर से किया जाये। विद्यालय के भवनों का संपत्तिकर, जलकर व अन्य करों को 2 वर्ष के लिये माफ   किया जाए। कक्षा नर्सरी/पहली से 12वी तक के विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण बिना किसी निरीक्षण व बिना परीक्षण के 5 वर्षांे की दी जाए। हाईस्कूल व हायर सेकेण्ड्री विद्यालयों की मान्यता में किरायानामा की बाध्यता को समाप्त किया जाए। कक्षा पहली से आठवी तक के विद्यालयों एवं विद्यालयों में कार्यरत स्टाफकर्मियों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाये, क्योकि शासन के निर्देशानुसार कक्षा 1 से कक्षा 8 वी तक के विद्यालय विगत 7 माह से बंद है। विद्यालय संचालकों के साथ ही विद्यालय में कार्यरत स्टाफकर्मियों को कई आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है।


जिले में नौ मिमी औसत वर्षा दर्ज 


जिले की तहसीलो में स्थापित वर्षामापी यंत्रो पर बुधवार 19 मई को दर्ज की गई वर्षा की जानकारी देते हुए अधीक्षक भू-अभिलेख ने बताया कि जिले में नौ मिमी औसत वर्षा दर्ज हुई है।  तहसीलवार दर्ज वर्षा तदानुसार सर्वाधिक सिरोंज तहसील में 40 मिमी, लटेरी में 11 मिमी, विदिशा में छह मिमी, कुरवाई में 6.6 मिमी, नटेरन में चार मिमी, ग्यारसपुर में तीन मिमी तथा गुलाबगंज में एक मिमी वर्षा दर्ज हुई है जबकि बासौदा में वर्षा नगण्य रही।  जिले की तहसीलो में अब तक दर्ज वर्षा की जानकारी इस प्रकार से है। विदिशा में 1157.8 मिमी, बासौदा में 984.8 मिमी, कुरवाई में 1345.8 मिमी, सिरोंज में 849.8 मिमी, लटेरी में 1053 मिमी, ग्यारसपुर में 1687 मिमी, गुलाबगंज 1056 मिमी, नटेरन तहसील में 1024 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है इस प्रकार जिले में आज दिनांक तक कुल औसत वर्षा 1144.8 मिमी दर्ज हुई है। 


रोको टोको अभियान में एनएसएस भी तत्पर 


vidisha news
विदिशा जिले में कोरोना महामारी के संक्रमण की चैन तोडने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे है। उक्त कार्य में राष्ट्रीय सेवा योजना की विद्यार्थी भी बढ चढकर योगदान दे रहे है। जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के तहत मै कोरोना वॉलिटियर्स हेतु सेवाएं देने के लिए पंजीबद्ध एनएसएस के विद्यार्थी खासकर एसएसएज जैन कॉलेज के पीजी विद्यार्थियों द्वारा पुलिस प्रशासन के साथ रोको टोको अभियान में निरंतर अपनी सेवाएं देकर आमजनों को कोरोना के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहे है। रोको टोको अभियान के अंतर्गत पीतल मील चौराहे पर जो व्यक्ति बिना कारणो के बाहर पाए गए है उन्हें समझाना और मास्क लगाने हेतु प्रेरित करने का कार्य किया है उक्त कार्य में एनएसएस के विद्यार्थी श्री महेन्द्र नामदेव, श्री अनुज गोस्वामी, श्री शरद रघुवंशी, श्री सानिध्य सोनी, श्री रोशन भदौरिया ने अपना योगदान दिया है। 


कोविड दौरान अनाथ हुए व देखभाल संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चो के लिए विशेष प्रबंध 


कोरोना संक्रमणकाल के दौरान जिले के ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता का निधन कोरोना संक्रमण से हो जाने के कारण अथवा जिनके माता-पिता, अभिभावक कोरोना संक्रमण से पीडित होकर अस्पताल में भर्ती है। ऐसे व्यक्तियों, परिवारजनों के बच्चों के संरक्षण की कोई भी समस्या है या उन्हें अस्थायी आश्रय की आवश्यकता है उनके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा देखभाल करने तथा भरण पोषण का वहन करने का दायित्व क्रियान्वित किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री बृजेश शिवहरे 9407273520 ने बताया कि ऐसे बच्चो को फिट फेसिलिटी केन्द्रो में अस्थायी आश्रय दिया जाएगा। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित जिला स्तरीय सीनियर छात्रावास बरईपुरा (बालक) एवं सीनियर कन्या छात्रावास विवेकानंद चौराहा छात्रावास बालिका के लिए फिट फेसिलिटी घोषित की गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित स्पांसरशिप, फार्स्टर केयर क्रियाशील विभागीय योजनाओंं का लाभ भी दिया जाएगा। यदि इस प्रकार के प्रकरण किसी व्यक्ति के संज्ञान में आते है तो महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित आंगनबाडी केन्द्रो, परियोजना कार्यालय एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के अलावा हेल्प लाइन हेतु विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री बृजेश शिवहरे 9407273520, जिला बाल संरक्षण इकाई के परामर्शदाता श्री उमेश साहू 7000503723 के अलावा हेल्प लाइन नम्बर टोल फ्री 181, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 के अलावा वाटस एप नम्बर 9407896571 के अलावा ई मेल आईडी scpshelpline@gmail.com पर भी सूचित कर सकते है। 


वैक्सीनेशन कार्य में वॉलिटियर्सो की मदद जारी 


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मै कोरोना वांलिटियर्स के तहत पंजीयन कराने वाले कॉलेजो के छात्र-छात्राओं द्वारा वैक्सीनेशन केन्द्रो पर टीकाकरण हेतु आने वालो की मदद की जा रही है। जन अभियान परिषद के तहत पंजीबद्ध मै कोरोना वॉलिटियर्स अभियान को मूर्तरूप देने में एसएसएल जैन पीजी कॉलेज के स्वंयसेवकों ने आज नीमताल के पास माधवगंज क्रमांक एक में वैक्सीनेशन सेन्टर पर पहुंचकर विजय मालवीय और भारती अहिरवार ने आज अपनी सेवाएं दी है। जन अभियान परिषद की जिला समन्वय श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने बताया कि मै कोरोना वॉलिटियर्सो के द्वारा हर स्तर पर सोशल डिस्टेन्सिंग के पालन की समझाईश आमजनों को दी जा रही है


संभागायुक्त ने ब्लैक फंगस के उपचार संबंधी निर्देश दिए 


भोपाल संभागायुक्त श्री कवीन्द्र कियावत ने सभी सीएमएचओ को निर्देश दिए हैं कि ब्लैक फंगस के संक्रमण से उत्पन्न लक्षणों का चिन्हांकन कर त्वरित उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि समस्त कोविड संदिग्ध, पुष्ट रोगी और स्वस्थ हो चुके छुट्टी प्राप्त कोविड रोगियों में मधुमेह का उचित चिन्हांकन एवं नियंत्रण किया जाना होगा। सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, प्रभारी कोविड अस्पताल एवं चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाता को निर्देश दिये गये है कि ब्लैक फंगस से होने वाले रोगों के प्रति सजग रहकर रोगियों का उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा ब्लैक फंगस संक्रमण के निरूशुल्क उपचार के लिए प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा चिकित्सा महाविद्यालयों में ईकाइयों का गठन किया गया है। इनमें मेडिसन विभाग, नेत्र विभाग, न्यूरो सर्जरी एवं नाक, कान, गला विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।   श्री कियावत ने ब्लैक फंगस के संक्रमण को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के पुष्ट रोगी के साथ-साथ कोविड-19 के संदिग्ध रोगी एवं कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्तियों में डायबिटीज की प्रतिदिन निगरानी रखी जाये एवं उस पर नियंत्रण किया जाये। जिन रोगियों को चिकित्सीय परामर्श अनुसार स्टेरॉयड दिया जा रहा है, उनमें रेंडम ब्लड शुगर स्तर की दैनिक निगरानी हर 8 घंटे के अंतराल पर सुनिश्चित की जाये। किसी भी स्थिति मे स्टेरॉयड एवं ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक अनुचित सेवन नहीं कराया जाये। मरीजों के लिये उपयोग होने वाला ऑक्सीजन मास्क, कैनुला को नियमित रूप से सैनेटाइज किया जाये। अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों में संक्रमण के नियंत्रण के लिए प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन किया जाये। ब्लैक फंगस संक्रमण की पहचान रोगियों के नाक, मुख और आँख से काले कण अथवा काला रिसाव होना, नाक बंद होना, नाक के आस-पास गालों की हड्डियों में दर्द, चेहरे में दर्द, लगातार सिर दर्द होना, जबड़े, दांत, आँख में दर्द, बुखार आना, शरीर में नील पड़ना, साँस लेने में परेशानी होना, सीने में दर्द, फेफड़ों में पानी आना, खून की उल्टी होना, मुँह से बदबू आना और मानसिक भ्रम जैसे लक्षण होते हैं। 


मूंग और उडद फसलों में सिंचाई संबंधी सलाह


ग्रीष्मकालीन अवस्था में तापमान के अनुसार फसल को आवश्यकता होने पर सिंचाई करें। गन्ने की फसल में निंदाई-गुडाई करें। जिससे खरपतवार नियंत्रण एवं नमी संरक्षण हो सके। ग्रीष्मकालीन मूंग व उडद फसल में उचित समय पर सिंचाई करें। जिससे नमी बनी रहे तथा बढते तापक्रम का फसल पर कम से कम प्रभाव पडे। उप संचालक कृषि ने बताया कि फसल पर रसचूसक कीट का प्रकोप दिखाई देने पर डायमिथोएट 30 ई.सी. 2 मि.ली.ध्ली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 0.2 मि.ली.ध्ली. पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। फसल गहाई के उपरांत उत्पाद को उचित नमी तक धूप में सुखायें। तत्पश्चात भण्डार गृह को साफ करके उसमें भण्डारित करें। फसल कटाई उपरांत खेत में उचित नमी हो तो जुताई करें। गेहू की कटाई के उपरांत नरवाई न जलाये। पूर्व में बोयी गयी फसलों के अवशेषों को खेत से बाहर करें जिससे कि बीमारी एवं रोगों की रोकथाम हो सके। खरीफ में जिन फसलों को बुवाई करनी हो उनकी उन्नतशील किस्मों के प्रमाणित बीज की व्यवस्था जरूर कर लें।


राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार 2021 के लिए प्रस्ताव आमंत्रित


मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधिता बोर्ड द्वारा प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे लोगों की पहचान करना एवं उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों जैव विविधता स्वामित्व रखने वाले विभाग (वन, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं जल संसाधन (जैव विविधता प्रबंधन समिति, संस्थागत) अशासकीय (व्यक्तिगत अशासकीय), व्यक्तिगत को (शासकीय) प्रोत्साहन देना है। वर्तमान में इस योजना के लिए कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की स्थिति में प्राप्त प्रविष्टियों का युक्तियुक्त परीक्षण कर प्रत्येक श्रेणी में एकएक श्रेष्ठतम प्रविष्टि - 31 जुलाई 2021 तक बोर्ड कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। 


समर्थन मूल्य पर 683827 मैट्रिक टन गेंहू की खरीदी


समर्थन मूल्य पर जिले में गेंहू खरीदी का कार्य जारी है। जिला आपूर्ति अधिकारी श्रीमती रश्मि साहू ने बताया कि आज दिनांक तक जिले में कुल 683827 मैट्रिक टन गेंहू की खरीदी 67609 किसानो से की गई है।  आज बुधवार को 429 किसानो से 2960 मैट्रिक टन गेंहू समर्थन मूल्य पर क्रय किया गया है। जिला आपूर्ति अधिकारी श्रीमती साहू ने बताया कि जिले में कुल 671148 मैट्रिक टन गेंहू का परिवहन कर वेयर हाउसों में भण्डारण कराया गया है। भुगतान योग्य राशि 1350.55 करोड में से अब तक 1148.27 करोड की राशि का भुगतान किसानो को की जा चुकी है। गौरतलब हो कि जिले में समर्थन मूल्य पर गेंहू समर्थन मूल्य पर 102556 कृषको के द्वारा पंजीयन कराया गया है जिसमें से अब तक 101244 कृषको को एसएमएस प्रेषित किए जा चुके है जबकि आज कुल 721 किसानो को एसएमएस प्रेषित किए गए थे जिसमें से 429 किसानो के द्वारा समर्थन मूल्य पर गेंहू का विक्रय उपार्जन केन्द्रो पर किया गया है।


संपत्तियों के पंजीयन हेतु निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने पर स्लॉट हो जायेगा निरस्त


कोरोना संक्रमण से आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत दस्तावेज पंजीयन हेतु बुक किये गए स्लॉट समय के अंदर यदि पक्षकार उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित नहीं होते हैं, तो स्लॉट स्वतः ही निरस्त हो जाएगा। वरिष्ठ जिला पंजीयक ने समस्त पक्षकारों से आग्रह किया है कि उप पंजीयक कार्यालयों में दस्तावेज के पंजीयन की कार्यवाही हेतु निर्धारित स्लॉट समय पर ही उपस्थित हों जिससे असुविधा से बचा जा सके।


फिलहाल अपात्र परिवारों के नाम पोर्टल से नहीं हटेंगे


राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित परिवारों से अपात्र परिवारों को पोर्टल से विलोपन करने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोकने के निर्देश विभाग द्वारा जारी किये गये हैं। साथ ही विभाग ने निर्देश दिये हैं कि मृत, अस्तित्वहीन, अपात्र एवं राशन प्राप्त करने की इच्छा न रखने वाले हितग्राहियों के चिंहांकन की कार्रवाई की जा सकती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में सम्मिलित नवीन जोड़े गये परिवारों में से अपेक्षाकृत कम परिवारों द्वारा राशन प्राप्त करने के कारणों का आंकलन करने, जिन हितग्राहियों द्वारा लम्बे समय से राशन प्राप्त नहीं किया जा रहा है, उनके संबंध में एसओपी तय कर ऐसे व्यक्तियों के नाम हटाकर नए हितग्राहियों को जोड़ने के निर्देश पूर्व में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरंक्षण विभाग द्वारा दिये गये थे। 


मौजूदा बारिश में एक जुताई लाभदायक


कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को समसामयिक सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान वर्तमान में जो वर्षा हुई है, उसका लाभ उठाते हुये खेतों में मिट्टी पलटने वाले हल या कल्टीवेटर या डिस्क हैरो से एक जुताई अवश्य करें। इससे जमीन में छिपे हुए हानिकारक कीड़े बीमारियों के अण्डे, प्यूपा, लार्वा एवं फफूंद, जीवाणु आदि तेज धूप से नष्ट हो जाएंगे और खेत में उपस्थित घास, फूस, दूब कांस एवं जरवेरी आदि धूप में सूखकर एवं मिट्टी में दबकर खत्म हो जाएंगे। इससे फसल के दौरान कम नींदा पैदा होंगे अर्थात निंदाई में कम खर्च होगा और फसल की समय पर अच्छी बढ़वार होगी। गर्मी की जुताई करने से वर्षा के जल का अधिक संरक्षण ध् अवशोषण होता है, जिससे यह पानी, फसल को अवर्षा की स्थिति में सूखने से बचाने में सहायक होता है। साथ ही भूमि में वायु संचार बढ जाता है तथा मानसून आने पर खेत की शीघ्र जुताई कर समय पर बुवाई की जा सकती है।

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